
पिता शहीद हुए तो मां बनी फौजी, होश संभालते ही डॉ. तारकेश्वर ने देश के लिए थाम ली बंदूक
भिलाई. हम हैं ना... डॉक्टर की ओर से बोला गया यह चंद शब्द बीमार व्यक्ति को अपनेपन का अहसास कराता है। डॉक्टर्स डे पर पत्रिका आपको रूबरू करा रहा है आपके आसपास के उन डॉक्टरों से जो फौज में हैं और अपने मानव सेवा के संकल्प से फौजी साथियों और जरूरतमंदों का इलाज कर रहे हैं साथ एक फौजी की तरह मौका आने पर अपनी बंदूक से देश के दुश्मनों का भी इलाज कर देते हैं..।
आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट तारकेश्वर
हाथों में एके 47 और कंधे पर लटके बैग में जीवनरक्षक दवाइयां और स्टेथोस्कोप। आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट तारकेश्वर देश के साथ-साथ मानवता की सेवा के उस संकल्प को पूरा कर रहे हैं। जिसका सपना उनके शहीद पिता ने देखा था और फौजी मां ने कड़े संघर्ष के साथ पूरा किया। आईटीबीपी के 38 बटालियन में बतौर मेडिकल ऑफिसर वे पिछले 2 साल से छुरिया के माओवाद प्रभावित संवेदनशील क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे हैं।
वे कहते हैं कि अगर सभी डॉक्टर यह सोच ले कि उन्हें किसी बड़े अस्पताल में मोटे पैकेज पर नौकरी करना है तो देश की सुरक्षा में लगे जवानों की सेहत की चिंता कौन करेगा? उन्होंने कहा कि उनके कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी है। वे एक डॉक्टर है तो साथ के साथ ही फौजी भी हैं, इसलिए देश के लिए बंदूक चलाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
रात 2 बजे भी हाजिर
डॉक्टर तारकेश्वर कहते हैं कि मानवता की सेवा के लिए वे 24 घंटे उपलब्ध हैं। फिर चाहे वह उनकी फोर्स के जवान हो या कोई सिविलियन्स। क्योंकि व्यक्ति कोई भी हो एक डॉक्टर के लिए उसकी जान बचाना ही पहला धर्म होता है।
परिवार से पहले देश की सेवा
डॉ तारकेश्वर का परिवार देशसेवा में ही समर्पित है। उन्होंने बताया कि 1990 में जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था तब उनके पिता बीएसएफ में सर्विस में थे। वे आतंकवादियों से लोहा लेते शहीद हो गए। उस वक्त वे मात्र 3 साल के थे। 1993 में मां ने पिता की जगह बीएसएफ में नौकरी कर ली। मां का सपना पूरा करने वे डॉक्टर बने।
एमबीबीएस की डिग्री हाथ में आते ही बाद एक दिन मां ने कहा कि अब तुम्हें फौज में ही जाना है। बस क्या था मां की इच्छा को पूरा करने 2014 में वे आईटीबीपी में बतौर मेडिकल ऑफिसर के रूप में चयनित हो गए। उनकी मां वर्तमान में बतौर इंस्पेक्टर जोधपुर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे कहते हैं कि बचपन से ही उन्होंने घर में ऐसा माहौल पाया जहां यही सिखाया गया कि परिवार से पहले देशसेवा है।
Published on:
01 Jul 2018 05:08 pm
बड़ी खबरें
View Allभिलाई
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
