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ये है एशिया का सबसे बड़ा फॉर्म, यहां 500 एकड़ में होती है 20 तरह के फलों की आर्गेनिक खेती, है न अमेजिंग छत्तीसगढ़

एशिया का सबसे बड़ा सीताफल फॉर्म धमधा ब्लॉक के ग्राम धौराभाठा में है। 500 एकड़ के इस फॉर्म में 20 प्रकार के फलों की आर्गेनिक खेती हो रही है। इसमें 180 एकड़ में केवल सीता फल की खेती है। (Asia biggest farm house in chhattisgarh )

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Mar 07, 2020

ये है एशिया का सबसे बड़ा फॉर्म, यहां 500 एकड़ में होती है 20 तरह के फलों की आर्गेनिक खेती, है न अमेजिंग छत्तीसगढ़

ये है एशिया का सबसे बड़ा फॉर्म, यहां 500 एकड़ में होती है 20 तरह के फलों की आर्गेनिक खेती, है न अमेजिंग छत्तीसगढ़

दुर्ग. एशिया का सबसे बड़ा सीताफल फॉर्म (custard apple Farming in chhattisgarh) धमधा ब्लॉक के ग्राम धौराभाठा में है। 500 एकड़ के इस फॉर्म में 20 प्रकार के फलों की आर्गेनिक खेती हो रही है। इसमें 180 एकड़ में केवल सीता फल की खेती है। सीताफल के पेड़ की आयु 90 साल होती है। इस प्रकार यह 3 पीढिय़ों के लिए निवेश की तरह है। फॉर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल शर्मा बताते है कि सीजन में हर दिन 10 टन सीता फल निकलता है। सीता फल पकने पर इसका पल्प निकाल लेते हैं, जो आइसक्रीम आदि बनाने में काम आती है।

यहां बाला नगर प्रजाति के सीता फल की खेती होती है जो सर्वश्रेष्ठ प्रजाति माना जाता है। शर्मा ने बताया कि भुवनेश्वर शहर में हर दिन 10 टन सीता फल की खपत होती है, इसलिए बाजार की चिंता नहीं रहती। उन्होंने बताया कि 16 देशों के प्रतिनिधि मंडल ने इस फॉर्म का भ्रमण किया था। इसके बाद सऊदी अरब से लेकर सोमालिया तक की कंपनियां से फलों के निर्यात के लिए अनुबंध का ऑफर है।

खास बात है जैविक खेती
फार्म में 150 गिर प्रजाति की गाय पाली गई हैं। इनके चारे के लिए 40 एकड़ में गन्ना, मक्का और नैपियर घास लगाई गई है। मैनेजर राकेश धनगर ने बताया कि 1 गिर गाय से निकले गोबर से 10 एकड़ में जैविक खेती की जा सकती है। यहां आर्गेनिक खाद, कीटनाशक बनाने के लिए यूनिट तैयार की गई है। इससे इजरायल की पद्धति से आर्गेनिक खाद 500 एकड़ तक फैले खेत में पहुंचाया जाता है।

वाटर हार्वेस्टिंग का मॉडल
फॉर्म में पानी की सतत सप्लाई रहे, इसके लिए लगभग 10 एकड़ में 2 तालाब बनाया गया है। इसके लिए शासन की ओर से 24 लाख रुपए की सब्सिडी मिली। यह वाटर हार्वेस्टिंग का भी शानदार मॉडल साबित हुआ और नजदीक के 10 गांवों में इससे जलस्तर काफी बढ़ गया। इसके पास की अधिकतर भाठा जमीन है।

हर दिन 8 टन ड्रैगन फ्रूट
यहां ड्रैगन फू्रट और स्वीट लेमन जैसे एन्टी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर फलों के ढेरों पेड़ हैं। सीजन में हर दिन लगभग 8 टन उत्पादन होता है जो दिल्ली, हैदराबाद जैसे शहरों में जाता है। इनके 35 एकड़ जमीन में थाई प्रजाति के अमरूद लगे हैं इसकी विशेषता यह है कि इसमें शुगर कम है और काफी दिनों तक टिक जाता है।

मुम्बई में पांच वेंडर
राकेश ने बताया कि हमारे 5 वेंडर मुम्बई के सीएसटी में हैं जिनसे तुरंत माल खप जाता है। सीजन में हर दिन 10 टन अमरूद का उत्पादन होता है और पूरे सीजन में लगभग 500 टन। खजूर के लगभग 500 पेड़ हैं जिनसे सीजन में 10 टन खजूर उत्पादित होता है। इस साल यहां 60 एकड़ में 550 टन एप्पल बेर का उत्पादन किया जा रहा है।