
Ankita sharma UPSC topper in durg
भिलाई . चीर दे हिमालयों की चोटी, गंगा की वो धार बन, कर दे खाक राह की आड़ को, तू कर अपनी ज्वाला ऐसी बुलंद.. कभी तेज कभी मध्यम हो सरल, चाहे जो हो तेरी रफ्तार बढ़ता चल.. कविता की यह चंद पंक्तियों को सुनाकर दुर्ग की बेटी अंकिता शर्मा ने यूपीएससी में बाजी मार ली। दुर्ग निवासी राकेश शर्मा की बड़ी बेटी अंकिता शर्मा शुक्ला ने तीसरे प्रयास में 203 वां रैंक पाकर अपनी मंजिल को हासिल किया। पहले पिता और शादी के बाद पति कैप्टन विवेकानंद शुक्ला ने उसका हमेशा आत्मविश्वास बढ़ाया। पाकिस्तान बार्डर स्थित अखनूर में अंकिता के घर शुक्रवार की रात जश्न का माहौल है, तो दुर्ग में उसके मायके में भी बधाई देने वालों की भीड़ लगी है। पिता खुश हैं कि अंकिता खानदान में पहली है जो आईपीएस चुनी गई। खुशियों से छलकी उनकी आंखें और चेहरे पर मुस्कान के साथ वे सिर्फ इतना ही कह पाए कि बेटी का पिता होने पर मुझे गर्व है।
पढ़ाई और गृहस्थी बड़ा चैलेंज
दो साल पहले ही कैप्टन विवेकानंद शुक्ला के साथ परिणय सूत्र में बंधी अंकिता के लिए पढ़ाई और गृहस्थी संभालना आसान नहीं था। पति की ट्रांसफर वाली जॉब के बीच कई बार पढ़ाई के लिए वक्त भी नहीं मिलता तो वह मायके दुर्ग आ जाती। हमसफर के साथ ने उसे हमेशा आगे बढऩा सिखाया। वह बताती है कि खुद पर भरोसा और आत्मविश्वास के साथ की गई मेहनत के दम पर उसे यह सफलता मिली। बीकॉम और फाइनेंस में एमबीए के बाद उसने यूपीएससी के लिए लोक प्रशासन विषय को चुना था। दो बार असफलता हाथ लगी पर उसने अपनी कमजोरियों को दूर कर तीसरे चांस में सफलता पा ही ली।
इंटरव्यू में पूछा - कैसे करोगी मैनेज
अंकिता को इंटरव्यू में पैनल ने प्रश्नों की शुरुआत तो नक्सलवाद से की पर उसका साक्षात्कार कविता पर जाकर खत्म हुआ। नक्सलवाद की ताकत और कमजोरी क्या है?. इससे कैसे निपटा जा सकता है, आईपीएस बनने के बाद गृहस्थी को कैसे करोगी मैनेज? बैंक में बड़ी समस्या क्या हैं जैसे प्रश्नों के उत्तर अंकिता ने फर्राटे से दिए। आखिर में जब उसकी हॉबी पूछी गई तो उसने कविता लिखना बताया। बस क्या था इंटरव्यू पैनल ने कविता सुनाने कह दिया। उसने एक मोटिवेशनल कविता सुनाई और उसे सुनने के बाद जो तारीफ मिली उसे बयां करने अंकिता के पास शब्द नहीं थे।
गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं अंकिता
अंकिता के पिता राकेश शर्मा ने बताया कि वह शुरू से ही मेघावी छात्रा रही। सेंट जेवियर स्कूल में गोल्ड मेडलिस्ट रहकर सेंट थामस कॉलेज से उसने बीकॉम की परीक्षा में गोल्ड मेडल लिया। एमबीए की पढ़ाई उसने श्रीशंकराचार्य कॉलेज जुनवानी से की और वहां भी गोल्ड मेडल हासिल किया। वे कहते हैं कि उनकी दो बेटियां और है वे चाहते हैं कि वे भी दोनों अपनी बड़ी बहन की राह पर चलें।
Published on:
27 Apr 2018 11:42 pm
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