
ईएसआईसी हॉस्पिटल, भिलाई का हुआ लोकार्पण, अब तक शुरू नहीं हुई आईपीडी सेवा
20 दिन में आए 400 मरीज
ईएसआईसी हॉस्पिटल, भिलाई में हर दिन करीब 25 मरीज पहुंच रहे हैं। 20 दिनों में रविवार व त्योहार की छुट्टी भी रही। इस तरह से 400 मरीज उपचार करवाने आए हैं। यह संख्या आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) में सुबह 9 से शाम 4 बजे के बीच पहुंचने वालों की है। इस दौरान फार्मेसी से जरूरी दवा मिल जाती है। इसके बाद आने वाले मरीजों को यहां ताला लटका मिलता है। इमरजेंसी के लिए व्यवस्था दूसरे दरवाजे से की गई है। जहां दो बेड और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार की सुविधा है।
रेफर भी नहीं किया जा रहा
ईएसआईसी हॉस्पिटल, भिलाई से ईएसआईसी कार्डधारियों को निजी अस्पताल में रेफर भी नहीं किया जा रहा है। यह व्यवस्था अभी भी डिस्पेंसरी से जारी है। शहर में 9 डिस्पेंसरी संचालित हैं, जिसे राज्य सरकार संचालित करती है। वहीं ईएसआईसी हॉस्पिटल, भिलाई का संचालन केंद्र सरकार के अधीन है।
38 चिकित्सक चाहिए अस्पताल को रन करने
100 बिस्तर के ईएसआईसी हॉस्पिटल को संचालित करने के लिए 38 चिकित्सक चाहिए। वर्तमान में 5 चिकित्सकों को कर्नाटक से 15 दिनों के लिए बुलाए हैं। इसके बाद फिर 5 चिकित्सक को दूसरे राज्य से बुलाया जाएगा। 58 स्टॉफ की जरूरत है। उसके स्थान पर करीब 15 स्टाफ इंद्रौर से बुलाकर काम लिया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी जरूरत है।
पहले होगी भर्ती
अस्पताल भवन का लोकार्पण हो चुका है, अब चिकित्सकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ-साथ स्टाफ की भी भर्ती की जाएगी। वहीं सारे नए मशीन और फर्नीचर के लिए निविदा बुलाई जाएगी। मशीन आने के पहले उसके विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद मरीजों को अस्पताल का हकीकत में लाभ मिलेगा।
अभी सिर्फ भवन बना
100 बिस्तर अस्पताल के लिए बड़े-बड़े कमरे तैयार हैं, उसमें बेड लगाया जाना है। वहीं एक्स-रे समेत दूसरी तमाम मशीनों के लिए कमरे तैयार हो चुके हैं। मशीनों के लिए टेंंडर किया जाना है।
4 लाख हैं हितग्राही
भिलाई में इस अस्पताल को तैयार होने में करीब 8 साल लगे हैं। ईएसआईसी हॉस्पिटल, भिलाई के 90 हजार ईएसआईसी कार्डधारी हैं। इनके परिवारों को मिलाकर कुल, करीब 4 लाख हितग्राही हैं। 4 लाख मजदूर सदस्यों को कभी भी ईलाज के लिए हॉस्पिटल में आना पड़ सकता है। इसको देखते हुए अस्पताल को शुरू करने से पहले पर्याप्त चिकित्सक, स्टाफ की व्यवस्था की जानी थी। अस्पताल सिर्फ नाम के लिए शुरू करने से मजदूर परिवार को अधिक दिक्कत हो रही है। यहां 24 घंटे इलाज की सुविधा मिलेगी, यह सोच कर लोग रात बिरात भी पहुंच रहे हैं।
अधूरे कार्य को किया जा रहा पूरा
अस्पताल भवन के भीतर में अलग-अलग निर्माण किया जा रहा है। इमरजेंसी सेवा के लिए रास्ता बनाया गया है, उसके गेट का काम अधूरा है। अस्पताल के सामने हिस्से में भी अधूरे काम को पूरा किया जा रहा है।
Published on:
11 Mar 2024 10:06 pm
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