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गैंगस्टर तपन को भागने में मदद करने वाले ASI व आरक्षक को चार साल की सजा

न्यायालय ने जगदलपुर पुलिस लाइन से सेवानिवृत्त एएसआइ मनबहल सिंह ठाकुर (62) और आरक्षक लोकेश नागेश (39) को गैंगस्टर तपन सरकार को पुलिस अभिरक्षा से भगाने में मदद करने का दोषी पाया है। दोनों को धारा 220 व 225 के तहत दो-दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई है।

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गैंगस्टर तपन को भागने में मदद करने वाले ASI व आरक्षक को चार साल की सजा

दुर्ग@Patrika. न्यायालय ने जगदलपुर पुलिस लाइन से सेवानिवृत्त एएसआइ मनबहल सिंह ठाकुर (६२) और आरक्षक लोकेश नागेश (३९) को गैंगस्टर तपन सरकार को पुलिस अभिरक्षा से भगाने में मदद करने का दोषी पाया है। न्यायाधीश भूपेन्द्र कुमार वासनीकर ने दोनों को धारा २२० व २२५ के तहत दो-दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर २-२ सौ रुपए जुर्माना भी लगाया। जुर्माना जमा नहीं करने पर १-१ माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं महादेव महार हत्याकांड में सजा काट रहे #gangster Tapan sarkar, गैंगस्टर तपन सरकार को पुलिस अभिरक्षा से भागने के मामले २ साल की सजा सुनाई गई है। उस पर २०० रुपए जुर्माना लगाया गया है। #Durg District Court

पुलिस कर्मियों ने लोकसेवक होकर भी विधि के विपरीत कार्य किया
इस बहुचर्चित प्रकरण पर फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि तपन सरकार विधि पूर्ण अभिरक्षा के अधीन था, जो किसी अन्य अपराध के लिए था और उसे अन्य प्रकरण में दुर्गन्यायालय में होने वाली पेशी में प्रस्तुत करना था। इसके लिए अभिरक्षा में उसे जगदलपुर जेल ने भेजा था। तपन सरकार अन्य आरोपी के सहयोग से प्रेम नगर स्थित अपने जीजा व बहन के घर गया जो कि उसके भागने के प्रयत्न को दर्शित करता है। वहीं पुलिस कर्मी मनबहल व लोकेश लोक सेवक होते हुए भी आरोपी तपन सरकार को प्रतिरोध में रखने के बाद भी न्यायालय की जगह अन्य स्थान पर ले जाकर विधि के प्रतिकूल कार्य किया है।

तपन को प्रेमनगर में बहनोई के घर ले गए थे पुलिस कर्मचारी
८ मार्च २०१० को मोहन नगर पुलिस सिकोलाभाठा में गश्त कर रही थी। इसी बीच क्राइम ब्रांच स्टाफ ने सुबह ९.३० बजे सूचना दी कि तपन सरकार को जगदलपुर जेल से दुर्ग लाया गया है। उसे भगाने के उद्देश्य से पुलिस अभिरक्षा में तैनात कर्मचारी उसे प्रेमनगर स्थित तपन सरकार के जीजा व बहन के घर ले गए हैं। सूचना मिलते ही मोहन नगर पुलिस ने पहले तरुण मजूमदार के घर के चारो ओर घेराबंदी की और तपन सरकार को पकडऩे कार्रवाई शुरू की। तपन सरकार पुलिस को देखकर वह अभिरक्षा में तैनात पुलिस कर्मचारियों के साथ घर के पीछे दरवाजे से भागने का प्रयास किया। जिसे पुलिस ने गली से गिरफ्तार कर थाना लाई।

सजा से बचने बनाई थी योजना
तपन सरकार को आभाष हो गया था कि उसे महादेव महार हत्याकांड में सजा होने वाली है। इसी वजह से उसने अभिरक्षा में तैनात पुलिस कर्मचारियों को विश्वास में लिया और लालच देकर अपनी योजना में शामिल किया। जांच में खुलासा हुआ था कि तपन सरकार ने फरार होने जगदलपुर से दुर्ग आते समय योजना बना ली थी।

पुलिस ने घेरा बंदी की तो एक लाख का दिया लालच
गैंगस्टर को पकडऩे पुलिस ने प्रेम नगर में जाल फैला रखा था। जैसे ही तपन सरकार अपने जीजा के निवास से भागा पुलिस ने उसे पकडऩे घेराबंदी की। इस दौरान तपन सरकार ने मोहन नगर और क्राइम ब्रांच पुलिस को भागने के एवज में १ लाख रुपए देने का लालच दिया।

सुनवाई के दौरान एक आरक्षक की मौत
मोहन नगर पुलिस ने इस मामले में एक एएसआइ और दो आरक्षक के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान आरक्षक सुखराम कश्यप की मृत्यु हो गई। मृत्यु होने पर न्यायालय ने सुखराम का नाम प्रकरण से पृथक कर दिया था।