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ईदगाह में हुई विशेष नमाज : केरल के बाढ़ पीडि़तो को अल्लाह मदद बख्शे और देश में कायम रहे अमन चैन

अल्लाह केरल में आई त्रासदी से पीडि़त लोगों को मदद बख्शे और उनकी मदद में हम सभी मदद को आगे आएं। क्योंकि वे भी खुदा के बंदे हैं जिन्हें हमारी मदद की जरूरत है।

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Bakrid Chhattisgarh

ईदगाह में हुई विशेष नमाज : केरल के पीडि़तो को अल्लाह मदद बख्शे और देश में कायम रहे अमन चैन

भिलाई. अल्लाह केरल में आई त्रासदी से पीडि़त लोगों को मदद बख्शे और उनकी मदद में हम सभी मदद को आगे आएं। क्योंकि वे भी खुदा के बंदे हैं जिन्हें हमारी मदद की जरूरत है। कुछ ऐसी ही दुआ ईद-उल-जुहा के दिन बुधवार को जामा मस्जिद के समीप सेक्टर-6 ईदगाह मैदान में इमाम इकलाब अंजूम हैदर ने पढ़ी। उन्होंने कहा कि ईद-उल-जुहा के दिन दी जाने वाली जानवर की कुर्बानी हमें संदेश देती है कि हम सभी की जिंदगी उस अल्लाह की अमानत है और हमें अपनी प्यारी चीज को कुर्बान करने हमेशा तैयार रहना चाहिए साथ ही लोगों की मदद करना भी अल्लाह की इबादत ही होती है। नमाज के बाद लोगों ने केरल पीडि़तों के लिए सहयोग राशि भी इक्टठी की।

दुआ में कहा कि हमारे शहर में बना यह भाईचारा कायम रहे

इस मौके पर उन्होंने अपनी दुआ में देश, राज्य और शहर में अमन-चैन के साथ सभी लोगों की खुशहाली मांगी। उन्होंने दुआ में कहा कि हमारे शहर में बना यह भाईचारा कायम रहे। इस अवसर पर जामा मजिस्द में ईद की बधाई देने जनप्रतिनिधियों का तांता लगा रहा। जिसमें पूर्व विधायक बदरूद्दीन कुरैशी, महापौर देवेन्द्र यादव, पूर्व महापौर नीता लोधी, बृजमोहन सिंह, इरफान खान, राजेश शर्मा आदि ने लोगों को गले लगाकर ईद की बधाई दी। मस्जिद के बाहर मेले सा माहौल रहा।

घरों में दी गई कुर्बानी
बुधवार को ईद उल जुहा के मौके पर अपनी प्यारी चीज की कुर्बानी के रूप में बकरे को कुर्बान किया। इससे पहले शहर के मस्जिदों और ईदगाह मैदान में ईद की विशेष नमाज हुई। इस्लाम के अनुसार यह ईद हज की वापसी के बाद पड़ती है इसलिए इसे बड़ी ईद भी कहा जाता है। हजरत इब्राहिम ने आज ही के दिन अल्लाह के हुक्म पर सबसे प्यारे अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान किया था पर विश्वास की इस परीक्षा में उनके बेटे को अल्लाह ने जिंदा कर दिया। तभी से मुसलमान इस दिन कुर्बानी देकर खुद को खुदा के नजदीक पाते हैं।

निभाया फर्ज
रमजान के 70 दिन बाद आने वाली इस ईद पर सभी मुसलमान नमाज के बाद घर गए और वहां कुर्बानी दी। उन्होंने इसके तीन हिस्से कर एक हिस्सा गरीबों को, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों को बांटा और तीसरा घर पर रखा। माना जाता है कि इस्लाम के पांच फर्ज में आखिरी फर्ज अपनी प्यारी चीज को रब की राह में खर्च करने का होता है। इस दिन कुर्बानी देना शबाब का काम माना जाता है।

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