
जीएसटी ऑडिट में पेचीदगी, तारीख बढ़ाए या पेनाल्टी हटाए सरकार
भिलाई . जीएसटी लागू होने के बाद पहली बार होने जा रहे जीएसटी ऑडिट को लेकर जितने कारोबारी परेशान हैं, उतने ही चार्टड एकाउंटेंट को भी दिक्कतें हो रही है। ऑडिट को लेकर लगातार आ रही दिक्कतों को देख आईसीए भिलाई ब्रांच ने बुधवार को सेमिनार का आयोजन किया। जिसमें इंदौर से आए सीए सुनील पी जैन ने जीएसटी ऑडिट में आने वाली चुनौतियों को बताया। उन्होंने ऑडिट की बारीकियों को समझाया ताकि ऑडिट के वक्त सीए परेशान ना हो। मौके पर द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टड अकाउंटेंट भिलाई ब्रांच के अध्यक्ष पियुष जैन ने कहा कि जीएसटी भारत में आर्थिक सुधारों में सबसे बड़ा सुधार है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में चुनौतियां बढ़ती जा रही है। इसलिए चार्टर्ड अकाउंटेंट को एक प्रोफेशनल की तरह इसकी बारीकियों को समझना जरूरी है। ताकि इस चुनौतियों को नए अवसर में तबदील किया जा सकें। इस सेमिनार में विशेषकर जीएसटी फार्म 9 सी पर चर्चा हुई। इसमें रिर्टन के दौरान त्रुटि, क्रेडिट के आंकड़ों में अंतर का कारण स्पष्ट करना आदि पर जानकारी दी गई।
सही कैल्कुलेशन करना जरूरी
सेमिनार में वक्ता सीए सुनील पी जैन ने बताया कि ऑडिटर के रूप में एक सीए को सारी जानकारियों की बारीकी से परख कर रिपोर्ट फाइल करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि टर्नओवर की व्याख्या जीएसटी में अलग तरीके से की गई है और इसका कैलकुलेशन करते वक्त अत्यंत सावधानी की आवश्यकता है अन्यथा भविष्य में विभाग नोटिस जारी कर सकता है। टर्नओवर में एडवांस मिली राशि, गलत तरीके से लिए क्रेडिट, लेट फाइलिंग फीस पेनाल्टी, ब्याज, गलत हेड, गलत टैक्स रेट आदि का समावेश भी नियमत: करना होगा। उन्होंने बताया कि आयकर ऑडिट से यह जीएसटी ऑडिट बहुत ज्यादा पेचीदा और तकनीकी दिक्कतों सेतो भरा है इसमें की गई भूल व्यापारी और सीए दोनो के लिए दुखदायी और पेनाल्टी लगाने वाली हो सकती है।
व्यापारी भी रखें रिकॉर्ड
पूर्व अध्यक्ष सीए महावीर जैन ने बताया कि व्यापारियों को जीएसटी कानून में बताए गए विभिन्न रिकॉर्ड जैसे बिक्री - खरीदी रजिस्टर, स्टॉक की जानकारी, टैक्स क्रेडिट की जानकारी आदि जानकारी अपडेट करनी चाहिए। साथ ही जीएसटी कानून में बताए गए सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड प्रावधानों और फॉर्मेट के हिसाब से बनाना और प्रस्तुत भी करना होगा अन्यथा रिकॉर्ड न रखने की पेनाल्टी विभाग लगा सकता है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों के साथ ही सीए को ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख भी करना होगा। इस कार्यक्रम का संचालन संचालन प्रियेश लिखवानी ने एवं आभार प्रदर्शन सचिव राजेश बाफना ने किया। सेमिनार में राकेश, पदम बरडिया, श्रीपाल कोठारी, राजेन्द्र कोठारी, महावीर जैन, मिनेश जैन, हर्ष जैन, पारस छाजेड़ सहित भिलाई शाखा के 210 से ज्यादा सीए और छात्र मौजूद थे।
31 दिसंबर है आखिरी तारीख
भिलाई सीए ब्रांच के अध्यक्ष पियुष जैन ने सरकार को लिखा है कि फार्म भरने में आ रही दिक्कतों की वजह से काम पेडिंग होता जा रहा है। 31 दिसंबर को आखिरी तारीख होने की वजह से समय पर फार्म सबमिट होने में दिक्कतें आ रही है। ऐसे में इसकी आखिरी तारीख बढ़ानी चाहिए। उन्होंने बताया कि अंतिम तिथि के बाद जो पेनाल्टी लगाई जा रही है। उसे हटा देना चाहिए। क्योंकि उसमें प्रतिदिन 2 सौ रुपए से लेकर टर्न ओवर का आधा प्रतिशत पेनाल्टी के रूप में वसूला जाएगा और पहला साल होने की वजह से विभाग को इस पर रियायत देनी चाहिए। भिलाई की सीए शाखा ने न्यूनतम ऑडिट फीस भी तय कर ली है। सीए 15 हजार रुपए फीस लेंगे।
Published on:
06 Dec 2018 12:27 am
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