28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Highway Incident: खून की प्यासी हुई फ्लाईओवर ब्रिज, रोजाना हो रही मौत… अधिकारी अब तक मौन

Bumpy Roads: सुपेला से कुम्हारी तक 4 साल से बन रहे फ्लाई ओवर में से सिर्फ पावर हाउस और सुपेला फ्लाई ओवर का ही निर्माण हो पाया है। वहीं डबरापारा फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माणाधीन है, लेकिन यहां बने एप्रोच रोड पर गड्ढों की भरमार है। इसके कारण दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है। वाहन चालक को इससे गड्ढे का पता नहीं चलता और समतल रोड समझकर गड्ढे में चला जाता है।

3 min read
Google source verification
gaddhe.jpg

Poor Road Quality: सुपेला से कुम्हारी तक 4 साल से बन रहे फ्लाई ओवर में से सिर्फ पावर हाउस और सुपेला फ्लाई ओवर का ही निर्माण हो पाया है। वहीं डबरापारा फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माणाधीन है, लेकिन यहां बने एप्रोच रोड पर गड्ढों की भरमार है। इसके कारण दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है। वाहन चालक को इससे गड्ढे का पता नहीं चलता और समतल रोड समझकर गड्ढे में चला जाता है।

डबरापारा तिराहा खतरनाक
इधर यहां पर पीक टाइम में ट्रैफिक जाम से लोगों को जूझना पड़ रहा है। निर्माण एजेंसी की निरंकुशता और प्रशासनिक उदासीनता की कमी के चलते फ्लाई ओवर का निर्माण पूरा नहीं हो सका और न ही एप्रोच रोड के सैकड़ों गड्ढों को अभी तक भरा जा सका है। सुपेला से कुम्हारी तक वर्ष 2019 से चार फ्लाई ओवर का निर्माण किया जा रहा है। इसमें सबसे खतरनाक डबरा पारा फ्लाई ओवर साबित हो रहा है।

डबरापारा तिराहा ऐसे स्थान पर है, जहां से तीन रास्ते हैं। एक रास्ते से हथखोज इंडस्ट्रियल एरिया से डंफर और ट्रक जैसे हैवी वाहन रोजाना सैकड़ों की संख्या में यहां से गुजरते हैं। वहीं रायपुर से दुर्ग और दुर्ग से रायपुर आवाजाही करने वाले वाहन चालकों के लिए यही एकमात्र रास्ता है। सड़क के दोनों छोर पर गडढ़ों की वजह से चालकों को गाड़ी चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

यह भी पढ़ें: Bulldozer Action in CG : जारी है प्रशासन का बुलडोजर, अब तक इतने चखना दुकान किए ध्वस्त

मिडिल कट के पास नाली को खुला छोड़ दिया
सुपेला फ्लाई ओवर के पास सड़क के दोनों किनारे नाली का निर्माण किया गया है। यहां मिडिल कट के पास नाली को ढंका नहीं गया है। ऐसे में कभी भी वाहन चालक नाली में गिर सकते हैं। सर्विस लेन पर हजारों लोग रोजाना सफर कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई वाहन चालक नाली में गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है।

नेहरूनगर ब्रिज के पास रोड की टोपोलॉजी है खराब

नेहरू नगर ब्रिज के नीचे फोर लेन की सड़क खराब टोपोलॉजी से गुजर रही है। यहां सड़क समतल नहीं है। कुछ दिन पूर्व सड़क से बैलेंस खो देने के कारण एक वाहन चालक चार पहिया वाहन की चपेट में आ गया, जिससे उसके तीन साल के बच्चे की मौत हो गई। सड़क की हालत देखकर यह आसानी से समझ आ जाएगा कि सड़क कहीं से फीली हुई है तो कहीं दबी हुई। ऐसे में वाहन चालकों को स्लीप होने में देर नहीं लगती।

तीन साल में पूरा होना था,अब तक है अधूरा
वर्ष 2019 से 2021 तक इस फ्लाई ओवर का निर्माण पूरा हो जाना था, लेकिन अभी तक इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसके बाद कोरोना महामारी के कारण निर्माण एजेंसी को तीन साल का समय भी मिला, लेकिन उसने काम पूरा नहीं किया। इसका खामियाजा इस सड़क को रोज उपयोग करने वाले राहगीरों पर पड़ रहा है। बार-बार सड़क की दयनीय स्थिति के कोरण लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन निर्माण एजेंसी को कोई फर्क नहीं पड़ा।

एप्रोच रोड का नहीं हुआ निर्माण
सुपेला और पावर हाउस फ्लाई ओवर का निर्माण इतनी लापरवाही पूर्वक किया गया है कि तीन महीने में फ्लाई ओवर की सड़क बैठ गई। सड़कों पर बड़े- बड़े गड्ढे हो गए। निर्माण एजेंसी ने डामर की लीपापोती की लेकिन कोई गड्ढे ठीक नहीं हुए। यहां निर्माण एजेंसी की घोर लापरवाही पर पर्दा डालने वाले प्रशासन की ढिलाई का नतीजा राहगीर भुगत रहे हैं।

यह भी पढ़ें: Chhattisgarh New CM : रेणुका सिंह ने भी दिया सांसद पद से इस्तीफा... जल्दी ही मुख्यमंत्री का चेहरा होगा तय

बारिश के कारण डबरा पारा का काम रूका
कुम्हारी में सर्विसलेन का डामरीकरण कर लिया गया है। पावर हाउस भी कंप्लीट है। बारिश की वजह से डबरापारा का काम बचा है। एक सप्ताह में उसका भी डामरीकरण कर लिया जाएगा।

अभिजीत सोनी, सब इंजीनयर एनएच पीडब्ल्यूडी