
डेयरी टेक्नोलॉजी में रखा IIT भिलाई ने कदम, अब मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी से सही समय पर होगा गायों का कृत्रिम गर्भाधान
भिलाई. आइआइटी भिलाई अब डेयरी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग देगा। संस्थान आर्टिफिशियल मशीन लर्निंग का उपयोग कर गायों के कृत्रिम गर्भधान के लिए सही समय की गणना कर बताएगा। यह पता लगाया जा सकेगा कि कृत्रिम गर्भधान के लिए गाय तैयार है या नहीं। गाय से अधिक से अधिक दूध लेने की दिशा में मशीन लर्निंग से मिले आंकड़े बेहद काम के साबित होंगे।
सफलता दर में वृद्धि करना
आइआइटी भिलाई ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत शनिवार से कर दी है। संस्थान ने बेंगलूरु के स्टार्टअप वीफोर लैब्स प्रा. लिमिटेड के साथ प्रोजेक्ट साझा किया है। कंपनी मिल्क प्रोडक्शन के क्षेत्र में कार्यरत है। गायों का डाटा देगी। इस प्रोजेक्ट के पीछे आइआइटी भिलाई का मकसद कृत्रिम गर्भधान की सफलता दर में वृद्धि करना है।
पीएचडी स्कॉलर व एमटेक छात्र भी शामिल
गायों के गर्भधान लागत में बचत के साथ यह सुनिश्चित करना है कि डेयरी फार्म में सालभर दूध उत्पादन समान मात्रा में होता रहे। परियोजना का नेतृत्व आइआइटी भिलाई के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरजद आलम खेरानी कर रहे हैं। इसमें उनके साथ एक पीएचडी स्कॉलर व एक एमटेक का छात्र शामिल है।
हमारे विद्यार्थियों को होगा फायदा
मशीन लर्निंग और डेयरी टेक्नोलॉजी दोनों ही भविष्य की मांग है। यही वजह है कि आइआइटी प्रशासन अपने विद्यार्थियों को इस दिशा में बेहतर मौके देना चाहता है। हमारे विद्यार्थी इस प्रोजेक्ट के जरिए न सिर्फ डेयरी टेक्नोलॉजी की बारीकियां समझेंगे बल्कि स्टार्टअप संचालित करने का सही तरीका भी उन्हें मालूम होगा। ऐसे में आगे चलकर विद्यार्थियों के लिए डेयरी टेक्नोलॉजी या खुद का स्टार्ट-अप शुरू करने की संभावना भी बढ़ जाएंगी। जल्द ही बीटेक विद्यार्थियों को भी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया जाएगा।
Published on:
17 Sep 2018, 11:05 AM IST
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