
अतुल श्रीवास्तव राजनांदगांव. बालिका गृह राजनांदगांव में पल रही उचित देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाली बच्ची को विदेश में आशियाना मिल गया है। स्पेन के बार्सिलोना शहर के एक परिवार ने भारत सरकार की दत्तक ग्रहण योजना के तहत इस बच्ची को गोद लिया है। गोद की सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है और अब रविवार को इस बच्ची को उसके नए पालक को सौंप दिया जाएगा।
अगस्त 2014 में बेमेतरा के बस स्टैंड में मिली थी बच्ची
अगस्त २०१४ में बेमेतरा के बस स्टैंड में छह साल की एक गुमशुदा लड़की खुशबू (बदला हुआ नाम) मिली थी। इस बच्ची को बाल कल्याण समिति दुर्ग के आदेश पर राजनांदगांव के बालिका गृह में भेजा गया था। छह अगस्त २०१४ से यह बच्ची यहीं रह रही थी। उस वक्त वह निरक्षर थी। उसकी शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की गई और अब वह कक्षा चौथी में पढ़ रही है। उसके परिजनों को ढ़ूंढने का काम पुलिस और प्रशासन ने किया लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलने के बाद इस बच्ची को दत्तक ग्रहण के लिए लीगल फ्री करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
आज सौंपा जाएगा
राजनांदगांव में दत्तक ग्रहण एजेंसी नहीं होने के कारण बालिका गृह राजनांदगांव के प्रतिनिधियों ने पड़ोस के जिले कवर्धा की दत्तक ग्रहण एजेंसी को शनिवार सुबह इस बच्ची को सौंप दिया। फ्लाइट के शेड्यूल में कुछ विलंब होने के कारण अब दत्तक लेने वाली दम्पत्ति कल रविवार को कवर्धा पहुंचेगी, जहां से इस बच्ची को उसके नए पालकों को सौंप दिया जाएगा।
इस परिवार ने अपनाया
राजनांदगांव की स्वयंसेवी संस्था सृजन सामाजिक संस्था द्वारा संचालित बालिका गृह में रह रही इस बच्ची के लिए स्पेन के बार्सिलोना के एक दम्पत्ति ने गोद लेने आवेदन दिया। ४९ वर्षीय पेशे से टेक्निकल आर्किटेक्ट व्यक्ति और उनकी पत्नी को विवाह के कई वर्षों बाद भी औलाद न होने पर और उनके आवेदनों पर कई दौर की जांच प्रक्रिया और उनके निवास के भौतिक सत्यापन के बाद इस बच्ची को इस दम्पत्ति को गोद दिए जाने का निर्णय लिया गया। पिछले साल ९ नवम्बर २०१७ को यह तय हो जाने के बाद इस बच्ची का पासपोर्ट बालिका गृह ने बनाने की प्रक्रिया पूरी की और दिसम्बर में यह काम पूरा हो गया।
2013 से संचालित है बालिका गृह
राजनांदगांव में बालिका गृह का संचालन शहर की सृजन सामाजिक संस्था द्वारा वर्ष २०१३ से महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। किशोर न्याय अधिनियम २०१५ के अंतर्गत पंजीकृत संस्था वर्ष २०१५ से चाइल्ड लाइन का भी संचालन कर रही है। संस्था के प्रमुख शरद श्रीवास्तव ने बताया कि यह पहला मामला है जब बालिका गृह में रह रही किसी बच्चे को विदेश में परिवार मिल रहा है।
यह सब भेजा
दत्तक लेने के लिए इस दम्पत्ति ने एक पूरा एलबम बनाकर कारा के समक्ष और इस बच्ची के पास भेजा था। इस एलबम में बार्सिलोना शहर की तस्वीरों के अलावा अपने घर, बच्ची के बेडरूम, घर की रसोई, स्टडी रूम, अपनी और अपने माता-पिता व रिश्तेदारों की तस्वीर भी भेजी गई थी।
यह है गोद की प्रक्रिया
दत्तक दिए जाने के लिए नियमों में अब काफी बदलाव आ गया है। दत्तक लेने के लिए अब सरकारी वेबसाइट में कारा (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी) यानि केद्रीय दत्तक संसाधन संस्था के नियमों के तहत विज्ञापन जारी किया जाता है। इसमें आवेदक को लड़का या लड़की गोद लेने की इच्छा के साथ अपना पूरा व्यक्तिगत विवरण, पुलिस वेरिफिकेशन, सम्पत्ति का विवरण, स्वस्थ्य होने का प्रमाण-पत्र, बच्चा न होने का प्रमाण-पत्र भेजना होता है। आवेदन में दी गई जानकारी का सत्यापन किए जाने के बाद आवेदन को तीन बच्चों की तस्वीर दिखाई जाती है। इनमें से उसे एक को चुनना होता है। इस मामले में आवेदक दम्पत्ति ने लड़की गोद लेने की इच्छा जाहिर की थी।
Published on:
20 Jan 2018 11:10 pm
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