
छत्तीसगढ़ में दीक्षा लेकर कड़वे प्रवचनों से विख्यात, जैन मुनि तरूण सागर का निधन, नगपुरा जैन तीर्थ और कैवल्य धाम से था गहरा नाता
भिलाई. अपने कड़वे प्रवचनों के लिए मशहूर जैन मुनि तरूण सागर का शनिवार को निधन हो गया। वे 51 वर्ष के थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा लेकर कड़वे प्रवचनों से देश के युवाओं को जगाने का अनोखा प्रयास किया। दुर्ग जिले के कैवल्य धाम कुम्हारी और नगपुरा जैन तीर्थ से मुनिवर का गहरा नाता था। भिलाई में उनके कड़वे प्रवचन सुनने के लिए कुछ सालों पहले विशेष तौर पर स्कूली और कॉलेज छात्रों को बुलाया गया था। समाज के हर वर्ग के लोगों को उन्होंने अपने प्रवचन से देश में नई ऊर्जा भरने की सीख दी।
पीलिया से पीडि़त थे मुनिवर
मिली जानकारी के अनुसार मुनिवर लंबे समय से पीलिया से पीडि़त थे। जिसके चलते उन्हे दिल्ली के ही एक हॉस्पिटल में लाया गया था। शनिवार सुबह शनिवार सुबह 3:18 बजे उन्होंने दिल्ली के शाहदरा के कृष्णानगर में अंतिम सांस ली। पिछले कई दिनों से उन पर दवाओं का असर बंद हो गया था। बताया जा रहा है कि जैन मुनि ने उपचार कराने से मना कर दिया था और कृष्णानगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर जाने का फैसला किया था।
आज किया जाएगा अंतिम संस्कार
जैन मुनि तरुण सागर का अंतिम संस्कार दोपहर 3 बजे किया जाएगा। इसके लिए दिल्ली-मेरठ हाइवे स्थित तरुणसागरम तीर्थ को चुना गया है। जानकारी के अनुसार जैन मुनि अंतिम यात्रा दिल्ली के राधेपुर से शुरू होगी और 28 किमी की दूरी तयह करती हुई तरुणसागरम पर पहुंचेगी। आपको बता दें कि जैन मुनि तरुण सागर अपने प्रवचनों के लिए सुर्खियों में रहते थे।
विधानसभा में जैन मुनि ने दिया था प्रवचन
यहां तक कि उन्होंने देश की कई विधानसभाओं में भी अपना प्रवचन दिया है। हरियाणा विधानसभा में दिए गए उनके प्रवचन को लेकर काफी विवाद हो गया था। उनके इस प्रवचन के चलते संगीतकार विशाल डडलानी के एक ट्वीट पर काफी हंगामा हो गया था। हालांकि बाद में उनको माफी मांगनी पड़ी थी। आपको बता दें कि डडलानी ने इस विवाद के बाद राजनीति से रिश्ता तोड़ दिया था।
मध्यप्रदेश के दमोह में हुआ था जन्म
दरअसल, जैन मुनि तरुण सागर मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और उनका जन्म 26 जून, 1967 को दमोह में हुआ था। जैन मुनि के पिता का नाम प्रताप चंद्र व माता का नाम शांतिबाई था। तरुण सागर काफी पहले अपना घर त्याग चुके थे। बताया जाता है कि उन्होंने 8 मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था और छत्तीसगढ़ में दीक्षा लेने चले गए थे।
Published on:
01 Sept 2018 10:13 am
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