
: जातीय समीकरण को भुनाकर दुर्ग संसदीय क्षेत्र में पहले लगातार चार बार और पिछली बार वोटों के बड़े (bjp party) अंतर से कब्जा जमाने वाली भाजपा के फॉर्मूले को कांग्रेस ने अपनाया है। (loksabha election 2024) दरअसल भाजपा ने इस बार भी पिछली बार रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करने वाले सांसद विजय बघेल को मैदान में उतारा है। (loksabha chunav 2024) इसके जवाब में कांग्रेस ने साहू समाज पर दांव लगाते हुए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र साहू को मैदान में उतारा है।
दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान ने इसकी घोषणा कर दी है। साहू समाज का झुकाव अमूमन भाजपा की ओर माना जाता है। (congress candidates name list) पिछली लोकसभा में रिकॉर्ड मतों से जीत और तीन महीने पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय को भी समाज के ध्रुवीकरण का परिणाम माना जा रहा है। (Lok Sabha Election 2024) इसके बाद भी साहू को मैदान में उतारने के फैसले को मौजूदा सांसद विजय बघेल के खिलाफ जिले की जातीय समीकरण को भुनाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
जाति आधारित राजनीति में भाजपा को दुर्ग संसदीय क्षेत्र में पहली सफलता वर्ष 1996 के ग्याहवीं लोकसभा चुनाव में मिली थी। (bjp candidates name list) भाजपा ने क्षेत्र में कांग्रेस से लगातार पराजय से उबरने जाति का कार्ड खेलते हुए सर्वाधिक आबादी वाले साहू समाज के प्रतिनिधि दिवंगत नेता ताराचंद साहू को मैदान में उतारा था। ग्यारहवीं लोकसभा चुनाव के साथ 1998, 1999 व 2004 के चौदहवीं लोकसभा चुनाव में लगातार चार बार जीत दर्ज करने में सफल रही।
वर्ष 2009 में स्थानीय नेताओं से अनबन के कारण साहू ने भाजपा छोड़ दिया। भाजपा ने 2009 के पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव में सांसद सरोज पांडेय को मैदान में उतारा। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा ने जीत दर्ज कर लिया, लेकिन साहू समाज के निर्दलीय प्रत्याशी के चलते भाजपा को काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद 2014 में जाति समीकरण के बूते कांग्रेस के ताम्रध्वज साहू ने यह सीट भाजपा से छीन लिया।
पिछली बार दोनों दलों ने साहू समाज को दरकिनार कर कुर्मी समाज का प्रत्याशी उतार दिया। इसमें मौजूदा सांसद विजय बघेल रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करने में सफल रहे। इस बार वे दोबारा भाजपा की ओर से प्रत्याशी है। कांग्रेस ने इस बार भी 2014 का गणित आजमाते हुए साहू समाज के राजेंद्र को मैदान में उतार दिया है।
वर्ष 2009 के लोकसभा क्षेत्र में 14 लाख 98 हजार 937 मतदाता थे। इनमें सर्वाधिक 3 लाख 29 हजार 768 साहू समाज के थे। पिछली बार मतदाताओं की संख्या 17 लाख 55 हजार से अधिक थी। इसमें साहू समाज के मतदाताओं की संख्या 3 लाख 75 हजार से अधिक थी। इस बार दुर्ग के 14 लाख 8 हजार 376 और बेमेतरा जिले के 6 लाख 37 हजार 378 मतदाताओं को मिलाकर 20 लाख 45 हजार 754 मतदाता है। इनमें 4 लाख 75 हजार से ज्यादा साहू हैं।
दोनों दलों के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा से दुर्ग लोकसभा सीट पर मुकबला तय हो गया है। पिछले चुनाव में सांसद विजय बघेल ने 3 लाख 91 हजार मतों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की थी। तब उनके खिलाफ कुर्मी समाज का प्रत्याशी था। इस बार जातीय समीकरण कारगर साबित हुआ तो राजेंद्र साहू उन्हें तगड़ी चुनौती प्रस्तुत कर सकते हैं। हालांकि सांसद विजय बघेल ने विधानसभा चुनाव में पाटन में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कड़ी टक्कर दी थी। बताया जा रहा है कि राजेंद्र साहू सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों के बीच मुकाबला कड़ा होगा।
Updated on:
09 Mar 2024 02:08 pm
Published on:
09 Mar 2024 01:52 pm
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