
मिलिए CG के मानस से, जिसने 50 लाख पैकेज की नौकरी छोड़कर चुना स्टार्टअप, एल्गो यूनिवर्सिटी खोलकर छाए सॉफ्टवेयर कंपनियों में
भिलाई. कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग पूरी कर विदेशी नौकरी की चाहत रखने वाले छत्तीसगढ़ के युवाओं का सपना अब जरूर पूरा होगा। रायपुर के मानस कुमार वर्मा और उनके स्कूल के दोस्त अपार अग्रवाल और शैलेश रेखानी ने ऐसे स्टार्टअप की शुरुआत की है, जो सीएस स्टूडेंट्स को सॉफ्टवेयर कंपनियों की नौकरियों के लायक बनाएगा। इस स्टार्टअप का नाम है, एल्गो यूनिवर्सिटी। जैसा की नाम से ही जाहिर है, ये कोई प्लेसमेंट फर्म नहीं है, बल्कि एक ऑनलाइन यूनिवर्सिटी है, जहां सीएस स्टूडेंट्स को पहले एक साल तक सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से तैयार किया जाएगा। गूगल, ऐपल, टेस्ला और विप्रो के जैसी कंपनियों में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स फैकल्टी है। ये सभी फैकल्टी स्टूडेंट्स को कंपनी में चल रहे कंरट सॉफ्टवेयर ट्रेंड के बारे में जानकारी देंगे। ऑनलाइन क्लास लगेगी।
शुरू में नहीं देनी है कोई फीस
एल्गो यूनिवर्सिटी रायपुर से शुरू हुई है। फाउंडर मानस वर्मा का कहना है कि इसमें एनरोल होने वाले किसी भी स्टूडेंट्स को शुरुआत में कोई फीस नहीं देनी है। सालभर पढ़ाने के बाद जब एग्लोयूनिवर्सिटी उनकी नौकरी देश-विदेश की सॉफ्टवेयर कंपनी में लगाएगी, तब ज्वाइनिंग के वक्त उन्हें अपनी फीस देनी होगी। फीस नौकरी के पैकेज के अनुसार तय होगी। नामी सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ एल्गो यूनिवर्सिटी ने समझौता किया है, जहां प्लेसमेंट कराए जाएंगे। एल्गो यूनिवर्सिटी की शुरुआत कोरोना लॉकडाउन के बीच साल 2020 में 20 स्टूडेंट्स के साथ हुई।
दो छात्र को मिला 60 लाख पैकेज
मानस ने बताया कि पहले बैच के सभी स्टूडेंट्स को 12 से 60 लाख तक के पैकेज पर सफलतापूवर्क प्लेसमेंट कराया गया। इसमें से दो स्टूडेंट्स को सिंगापुर की नामी सॉफ्टवेयर कंपनी में 62 लाख रुपए के पैकेज पर ज्वॉइन कराया गया। कॉलेज के चौथे साल में पहुंच चुके स्टूडेंट्स अपनी क्षमता को बढ़ाकर शानदार नौकरी पाने एल्गो यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले सकेंगे। वहीं यूनिवर्सिटी का कोर्स कंटेंट सामान्य यूनिवर्सिटी से अलग होगा। उन्हें कोडिंग, वेब डवलपमेंट, सिस्टम आर्किटेक्चर और सिस्टम डिजाइनिंग जैसे कंटेंट प्रैक्टिकल करने होंगे। सॉफ्टवेयर कंपनी को जैसा डवलपर चाहिए वैसा तैयार किया जाएगा। सबसे खास बात यह भी है कि बीते पांच साल में प्रदेश से किसी भी स्टूडेंट्स का विदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी में डायरेक्ट प्लेसमेंट नहीं हुआ था, जिसे एल्गो यूनिवर्सिटी ने सच कर दिखाया।
कैसे आया स्टार्टअप का आइडिया
मानस ने बताया कि उन्होंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई हैदराबाद ट्रीपल आईटी से पूरी की। इसके बाद 50 लाख के पैकेज पर सिंगापुर की एक कंपनी में नौकरी लगी। कंपनी ने भारत आने को कहा। जब मैं भारत आया तो ट्रीपल आईटी के बैच मेट्स के साथ मिलकर एक आइडिया पर बात हो रही थी। सभी दोस्तों ने इस स्टार्टअप की शुरुआत करने का मन बना लिया, मैंने भी अपनी नौकरी छोड़ दी और रायपुर आकर एल्गो यूनिवर्सिटी की शुरुआत हुई। जल्द ही एल्गोयूनिवर्सिटी देशभर में विस्तार को तैयार है। हमारा पहला लक्ष्य प्रदेश के होनहार स्टूडेंट्स को एक बेहतर नौकरी तक पहुंचाना है।
Published on:
16 Mar 2021 12:07 pm
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