
बीएसपी कर्मियों के पदनाम पर सेक्टर-9 हॉस्पिटल में मंथन
भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मियों के पदनाम को लेकर अलग-अलग विभागों में बैठक शुरू की गई है। मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के स्टॉफ से पदनाम को लेकर नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील (एनजेसीएस) के सब कमेटी सदस्य एसपी डे ने चर्चा किया।
नए पदनाम पर
सेक्टर-9 हॉस्पिटल के स्टॉफ ने एकजुटता का परिचय देते हुए नए पदनाम के बारे में चर्चा किए। उनका मानना है कि डिप्लोमा के आधार पर नया पदनाम देने की बात चल रही है और सभी यूनियनों को पदनाम की चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है, तो क्यों नहीं ग्रेच्युएट और पोस्ट ग्रेच्युएट के आधार पर नए पदनाम पर चर्चा की जाए।
यह है बाहर के हॉस्पिटल में पदनाम
बाहर के हॉस्पिटल में नर्स को नर्सिंग ऑफिसर, टेक्निकल स्टाफ को साइंटिस्ट का पदनाम दिया जाता है। उसी तर्ज पर सेल भी सेक्टर-9 हॉस्पिटल सहित सेल के सभी अस्पतालों में कर्मियों का पदनाम को बदला जाए। दिल्ली में होने वाली बैठक में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के लिए अस्पताल कर्मियों ने यूनियन से गुहार लगाई है।
हॉस्पिटल कर्मचारी बना सकते हैं स्नातक एसोसिएशन
अस्पताल कर्मियों के बीच उनके पदनाम से लेकर उनको मिलने वाली सुविधाओं में हो रही उपेक्षा को देखते हुए भविष्य में स्नातक के आधार पर एसोसिएशन बनाने की भी बात पर सहमति बनी है। कर्मियों ने तर्क दिया कि वेतन समझौता से लेकर कर्मियों को मिलने वाले सुविधाओं तक हर मुद्दे पर संघर्ष करना तय रूप रूप से यूनियन का काम है। इस नाते यूनियन से जुड़े रहना व यूनियन के आह्वान पर संघर्षों में जाना कर्मियों की जिम्मेदारी है। ग्रेड व शिक्षा के आधार पर एसोसिएशन बनाना भी सामान्य बात है। चर्चा के दौरान अस्पताल कर्मियों ने कहा कि एसोसिएशन को यूनियन के पूरक के रूप में नहीं बल्कि सहायक के रूप में बनाने का निर्णय किया गया है।
ट्रेनिंग पीरियड जोडऩे का फैसला
अस्पताल के कर्मचारियों में 2003 से 2008 तक जो एक साल का ट्रेनिंग पीरियड को सेवा काल में जोडऩे के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इससे ना केवल अस्पताल बल्कि प्लांट में जितने भी 2003 के बाद से कर्मचारी काम कर रहे हैं, उनको भी फायदा होगा।
यहां हुई चूक
सेल प्रबंधन के आदेशानुसार बीएसपी प्रबंधन ने अक्टूबर 2008 के बाद ज्वाइन किए कर्मियों का 2 साल का ट्रेनिंग पीरियड सेवाकाल में जोड़ दिया, लेकिन 2003 से 2008 के बीच ज्वाइन किए हुए कर्मियों का 1 साल का ट्रेनिंग पीरियड जोड़ा जाना बाकी है, ऐसा नहीं करने से 2008 व उसके बाद ज्वाइन किए हुए कर्मी 2008 से पहले ज्वाइन किए हुए कर्मी से सीनियर हो गए हैं व विसंगतियां पैदा होनी शुरू हो गई है। कालांतर में प्रमोशन से लेकर कार्य संस्कृति को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। बेहतर है कि समय रहते ट्रेनिंग पीरियड को सेवाकाल में जोड़कर इसका समाधान निकाल लिया जाए
मंत्री से लेकर उच्च प्रबंधन ने किया गुमराह
पिछले 4 सालों में इस मुद्दे को लेकर कई उतार-चढ़ाव हुए कई मंत्रियों सांसदों, केंद्रीय मंत्रालयों के सचिव स्तर के अधिकारियों ने इसके समाधान के लिए सेल प्रबंधन को कई बार चिट्ठियां लिखी। जिस पर प्रबंधन को अपने ओर से कार्रवाई करते हुए आगे बढ़ जाना चाहिए था। सीटू ने भी इस विषय पर प्रबंधन को अपने स्तर पर समाधान निकालने के लिए कह दिया था, लेकिन ऐसा नहीं करके प्रबंधन ने इस विषय को एनजेसीएस में लाकर खड़ा कर दिया।
मसौदे पर सलाह मशवरा करना सीटू की कार्य संस्कृति
सीटू के महासचिव एसपी डे ने कहा कि सीटू का मानना है कि पदनाम के मुद्दे पर डिप्लोमा इंजीनियर्स की राय एक नहीं है। यह स्थिति शुरू से ही नजर आ रही थी। यूनियन शुरू से ही पदनाम के विषय पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद अपना पक्ष रखता आ रहा है, क्योंकि कुछ लोगों की राय पर आनन-फानन में पदनाम के मुद्दे पर किसी नतीजे पर पहुंचना व उस पर अमल करने की दिशा में आगे बढऩा ना केवल गलत कदम होगा, बल्कि सेल जैसे विशाल कंपनी के उत्पादन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसीलिए सीटू इस विषय पर हर वर्ग के बीच बात रखकर उनसे ठोस सलाह मशवरा कर रहा है, यही यूनियन की कार्य संस्कृति है।
Published on:
11 Feb 2020 09:56 pm
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