
B.E काउंसलिंग: छत्तीासगढ़ में इंजीनियरिंग कॉलेजों का क्रेज हुआ कम, 11 हजार से ज्यादा सीटें अभी भी खाली
भिलाई. इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिलों का ग्राफ अबकी बार 40 फीसदी के पार जाने की गुंजाइश अब खत्म सी हो गई है। बीई की काउंसलिंग के दो चरण में 3389 सीटें ही भर पाईं। जबकि 629 एडमिशन मैनेजमेंट कोटे से भरे गए। कुल मिलाकर दो राउंड में 4018 एडमिशन पक्के हुए। इसके बाद मंगलवार से बीई के तीसरे राउंड का सीट अलार्टमेंट भी जारी कर दिया गया, जिसमें 779 सीटें अलार्ट की गई। इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से कॉलेजों को स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ोतरी का भरोसा था, लेकिन कोई खासा फर्क नहीं पड़ा। हालांकि भिलाई के कुछ कॉलेजों ने एडमिशन में मामूली बढ़त जरूर ली है। तीसरे राउंड की काउंसलिंग की रिक्त सीटें 16 नवंबर को घोषित होंगी, जिसके बाद प्रवेश की पूरी स्थिति साफ हो जाएगी।
अधिकारियों की दिवाली छुट्टी कैंसल
इंजीनियरिंग सहित तमाम पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया तकनीकी शिक्षा निदेशालय पूरी कर रहा है। काउंसलिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की दीपावली छुट्टी कैंसल कर दी गई है। वे त्योहार में भी ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे। कार्यालय में सभी दिन काम होंगे।
पीजी कोर्स में प्रवेश विलंब से शुरु
पीजी में एमबीए, एमसीए, एमटेक और एम फार्मेसी की काउंसलिंग का आगाज भी मंगलावार से हो गया। पीजी कोर्स में प्रवेश के लिए 13 नवंबर तक आवेदन करना होगा। बताया जा रहा है कि पीजी की काउंसलिंग में विलंब इसलिए हुआ क्योंकि तकनीकी विवि सीएसवीटीयू ने बीई के आखिरी सेमेस्टर के नतीजे देरी से 9 नवंबर को निकाले। वहीं डिप्लोमा का रिजल्ट 7 नंबवर को घोषित किया गया। एके गर्ग, काउंसलिंग प्रभारी, डीटीई ने बताया कि बीई की काउंसलिंग के तीसरे चरण में 779 सीटें अलॉर्ट की गई हैं। इसके साथ ही पीजी कोर्स की काउंसलिंग भी शुरू हो गई है। दीपावली की छुट्टियों में भी काउंसलिंग जारी रहेगी।
जानिए... कैसे डाउनफॉल में इंजीनियरिंग...
2019-20 - 15626 - 31.69
2018-19 - 18529 - 32.25
2017-18 - 20267 - 32.28
2016-17 - 16896 - 48.33
2015-16 - 17941 - 53.95
2014-15 - 18868 - 57.45
2013-14 - 19508 - 70.78
एक्सपर्ट से समझिए क्यों डाउनफॉल में बीई...
कॅरियर काउंसलर डॉ. किशोर दत्ता का कहना है कि अब लोग नए कॅरियर की तरफ रुख करने लगे हैं। पहले जहां सिर्फ मेडिकल और इंजीनियरिंग ही उम्दा कॅरियर स्कोर सेक्टर थे, उसमें बदलाव हुआ है। पैरेंट्स और स्टूडेंट्स दोनों ऑर्ट, कॉमर्स को तरजीह दे रहे हैं। लॉ कॉलेजों की तरफ रुझान भी बढ़ा है। इसमें स्पेशलाइजेशन करने के बाद अच्छे सैलरी पैकेज भी इंजीनियरिंग में डाउनफॉल होने की एक वजह हो सकती है। हालांकि इंजीनियरिंग का भी के्रज अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ एडमिशन ही कम हुए हैं, जिसे भविष्य में सुधारा जा सकता है। कॉलेज ही इसमें सबसे बड़ा रोल अदा करेंगे। यूनिवर्सिटी और कॉलेज को बड़े बदलाव की जरूरत है। ऐसा माहौल दोबारा से बनाना होगा जिससे की लोगों को दोबारा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पर भरोसा हो जाए।
Published on:
11 Nov 2020 12:02 pm
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