
भरपूर मिनरल्स वाले फुटु खाने के आप भी है शौकीन तो इस खबर का जरूर पढि़ए
भिलाई. रेनी सीजन में गरियाबंद क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला बोड़ा बाजार पहुंच रहा है। भिलाइंस को फुटु का स्वाद खूब पसंद आ रहा है। जंगली इलाकों में अच्छी बारिश होने के बाद फुटु निकलता है। एक्सपर्ट का कहना है कि फुटु में सबसे अधिक प्रोटीन पाया जाता है।
विटामिंस का बड़ा स्त्रोत
इसके साथ खनिज तत्व, विटामिंस, रेशेदार तत्व आदि पाए जाते हैं। वैसे तो जंगलों में पाए जाने वाला 99 प्रतिशत मशरूम जहरीला होता है, लेकिन इसे पहचानकर उपयोग न किया गया तो यह नुकसान पहुंचा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि दीमक के घर में पाए जाने वाले मशरूम में भरपूर खनिज तत्व होते हैं।
जहरील और आम फुटु में होता है कम अंतर
डॉ. ठाकुर ने बताया कि मशरूम में चार भाग होते हैं जिसमें एक भाग मिट्टी से लगा होता है और उठा होता है। इसे वाल्वा कहते हैं। वाल्वा से लगा स्टेप अथवा तना होता है। तने के ऊपर छतरी और उसके नीचे कॉलर होती है। जिसे छल्ला कहते हैं। यह चार भाग जिन मशरूम में होता है वे जहारीले होते हैं। खाद्य पुटू में चार भाग नहीं होते। इसमें आयस्ट्रा, पैरा, बटन और मिल्की आदि खाद्य मशरूम हैं।
गरियाबंद से आवक ज्यादा
अभी बाजार में गरियाबंद क्षेत्र का बोड़ा पहुंच चुका है। जो 400 रुपए केजी के हिसाब से बाजारों में बिक रहा है। वहीं से फुटु की भी आवक ज्यादा होती है। इसी तरह बालोद व डौंडीलोहारा इलाके से भी फुटु की आवक होती है। जिसे ग्रामीण बाजार लेकर आते हैं। इसके अलावा जशपुर, रायगढ़ और अंबिकापुर से भी इसकी सप्लाई होती है।
पहचान पाना संभव नहीं होता
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के शिक्षण निर्देशक डॉ. एमपी ठाकुर ने बताया कि छत्तीसगढ़ में मशरूम को ही फुटु बोलते हैं। देसी फुटू बालोद-राजनांदगांव के जंगलों में पाया जाता है और जिसे देश के कई शहरों में विक्रय भी किया जाता है। आमतौर पर जहरीले और खाद्य मशरूम समान रूप के होते हैं जिन्हें पहचान पाना संभव नहीं होती। इसके लिए वैज्ञानिक रूप से पहचान की जाती है जिसमें चार भाग वाले मशरूम को जहरीले मशरूम की श्रेणी में रखा गया है।
Published on:
18 Aug 2018 01:17 pm
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