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ट्रैफिक का भारी दबाव, हर पल खतरा, एलशेप ब्रिज के ढलान पर बनेगा रोटरी आइसलैंड

नेहरु नगर गुरुद्वारा पर ट्रैफिक का भारी दबाव, हर पल खतरा, एलशेप ब्रिज के ढलान पर बनेगा रोटरी आइसलैंड

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bhilai patrika

nehrunagar chouk

भिलाई. नेहरू नगर रेलवे फाटक पर एल शेप ओवरब्रिज निर्माण के बाद नेहरू नगर चौक से गुरुद्वारा चौक तक ट्रैफिक व्यवस्था ही चौपट हो गई है। यहां दुर्घटना का खतरा पहले से और बढ़ गया है। फोरलेन में सुपेला चौक के बाद गुरद्वारा चौक सबसे खतरनाक हो गया है। यहां पर व्यवस्था ठीक करने के लिए ट्रैफिक पुलिस आए दिन नए-नए प्रयोग करती है। अब एलशेप ओवर ब्रिज के गुरुद्वारा छोर में ढलान पर रोटरी आइसलैंड बनाने की कवायद की जा रही है। वहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि एक छोर की व्यवस्था ठीक करने का प्रयास किया जाता है तो दूसरा छोर प्रभावित होता है। अधिकारियों का कहना है कि गुरुद्वारा छोर पर ब्रिज में चढऩे व उतरे वाले वाहनों के बीच टकराने की आशंका को देखते हुए ढलान पर रोटरी आइसलैंड बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए ढलान पर रेत से भरी बोरियां रखकर तीन दिन से प्रयोग किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि ट्रायल के दौरान कुछ दिक्कत आई तो उसे दूर किया जाएगा।

इस चौक पर चौतरफा रहता है वाहनों का भारी दबाव

गुरुद्वारा चौक पर चारों तरफ से वाहनों की आवाजाही होती है। अंजोरा बायपास की ओर से भारी वाहनों का आना जाना लगा रहता है। दुर्ग की ओर से आने वाले वाहन भी इसी चौक पर मिलते हैं। नेहरू नगर कालोनी के लोग भी इसी चौक से होकर गुजरते हैं। टाउनशिप की तरफ से ब्रिज से होकर आने वाले भी गुरुद्वारा चौक पर ही आते हैं। इस तरह इस चौक पर चारों तरफ से वाहनों का अधिक दबाव रहता है।

अधिकारियों का दावा: रोटरी आइसलैंड से टलेगा खतरा

अधिकारियों का कहना है कि रोटरी आइसलैंड बनने के बाद एलशेप ब्रिज से उतरने वाले वाहन रटोरी के साइड से होकर गुजरेंगे। नेहरू नगर की ओर जाने वाले रोटरी के राइट साइड में मुड़ जाएगें। वहीं दुर्ग की ओर या ब्रिज के नीचे होकर भिलाई की ओर जाने वाले रटोरी के लैफ्ट साइड से उतरेंगे। इससे वाहनों के टकराने का खतरा नहीं रहेगा। ब्रिज के उपर जाने वालों को भी दिक्कत नहीं होगी।

चौक पर इस समस्या का समाधान नहीं: टकराने का सबसे अधिक खतरा यहीं पर

गुरुद्वारा चौक पर नेहरू नगर छोर और बायपास से आने वालों को दिक्कत होती है। सिग्लन रेड होने पर गुरद्वारा छोर में ब्रिज के करीब से वाहनों की लाइन लग जाती है। इससे ब्रिज से नीचे उतरने वालों को दिक्कत होती है। यहीं पर एक दिक्कत यह भी होती है कि दुर्ग की तरफ से आने वालों के बीच टकराने का खतरा रहता है। दुर्ग की तरफ से आने वालों को जो सुपेला की ओर जाते हैं वे चौक से मुड़कर सीधे निकल जाते हैं। जिन्हें गुरुद्वारा की ओर जाना होता है उन्हें बचकर सावधानी से निकलना पड़ता है। जब सिग्नल ग्रीन होती है तब आपाधापी में टकराने का खतरा रहता है। क्योंकि आधे लोग सीधे सुपेला की ओर निकलते हैं तो आधे लोग गुरुद्वारा की तरफ जाते हैं। इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला गया है।

पहले भी किए गए हैं प्रयोग, पर नहीं निकला मुकम्मल हल

यहां पर थोड़ी दूर में दो जगह सिग्नल हैं। ब्रिज बनने के बाद दो चौक बनाया गया है। एक सिग्रल पुराना नेहरू नगर चौक पर है। दूसरा गुरुद्वारा चौक पर। नेहरू नगर चौक पर व्यवस्था बनाने के लिए पहले भी कई प्रयोग किए गए। पहले इस चौक का सिग्रल बंद किया गया। फिर नेहरू नगर व रेलवे फाटक की ओर डिवाइडर लगाकर सड़क को बंद करके देखा गया। इसमें भी बात नहीं बनी तब डिवाइडर हटाकर सड़क को फिर शुरू किया गया। क्योंकि लोगों को गुरुद्वारा चौक की तरफ से घूमकर जाना पड़ रहा था। सड़क खोलने के बाद सिग्रल को फिर चालू किया गया। इसके बाद भी समस्या कायम है। ट्रैफिक एएसपी बलराम हिरवानी का कहना है कि गुरुद्वारा चौक पर ट्रैफिक का दवाब बढ़ गया है। ट्रैफिक व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए रोटरी आइसलैंड बनाया जाएगा। फिलहाल अभी बोरियों में रेत रखकर ट्रायल किया जा रहा है।