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अब छत्तीसगढ़ी में बोलकर भी कर सकेंगे गूगल में ट्रांसलेशन, फ्रांस और सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने बताया रीजनल लैैंग्वेज पर चल रहा काम

दुनिया में वाइस आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का मार्केट 1.3 बिलियन डॉलर का है। यही वजह है कि नामचीन कंपनियां अगले दो साल में 6 हजार रीजनल लैंग्वेज में डेटा ट्रांसलेशन की सुविधा दे देगी।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 20, 2020

अब छत्तीसगढ़ी में बोलकर भी कर सकेंगे गूगल में ट्रांसलेशन, फ्रांस और सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने बताया रीजनल लैैंग्वेज पर चल रहा काम

अब छत्तीसगढ़ी में बोलकर भी कर सकेंगे गूगल में ट्रांसलेशन, फ्रांस और सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने बताया रीजनल लैैंग्वेज पर चल रहा काम

भिलाई. हे सीरी...ओके गूगल बोलकर आजकल आपको जरूरी जानकारी चुटकियों में मिल जाती है, लेकिन अब ये वॉइस कमांड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम भावनाएं भी समझेगा। मशीन लर्निंग को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि उनमें भी इमोशंस होंगे। दुनिया में वाइस आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का मार्केट 1.3 बिलियन डॉलर का है। यही वजह है कि नामचीन कंपनियां अगले दो साल में 6 हजार रीजनल लैंग्वेज में डेटा ट्रांसलेशन की सुविधा दे देगी। छत्तीसगढ़ी में भी आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा। टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलाव और उससे इकोनॉमी पर असर के ये कमाल के फैक्ट्स शनिवार को फ्रांस के वैज्ञानिक डॉ. खालिद चौकरी ने बताए। वे संतोष रूंगटा कॉलेज के वर्चुअल टेक्नो इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस 'शास्त्रार्थ में बतौर मुख्य वक्ता जुड़ें। उन्होंने आगे बताया कि अभी आप बायोमैट्रिक डिवाइस में अंगूठा लगाकर हाजिरी दे रहे हैं, लेकिन कुछ दिनों में ऐसा सिस्टम मार्केट में आ जाएगा, जिसमें अपना नाम पुकराते ही आपकी हाजिरी खुद-ब-खुद लग जाएगी। कोविड ने सभी सेक्टर को इनोवेशन के लिए प्रेरित किया है।

दो दिन में 450 पेपर प्रजेंटेशन
इस शास्त्रार्थ में देशभर से 450 टेक्निकल पेपर प्रजेंट किया जाएगा। इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में तकनीकी विवि सीएसवीटीयू के कुलपति डॉ. एमके वर्मा बतौर मुख्य अतिथि जुड़े। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का काम समाज की सेवा करना होता है। दुनियाभर की ग्राउंड रिपोर्ट देखी जाए तो हर दिन टेक्नोलॉजी अपग्रेड होकर नए वर्जन में लॉन्च हो रही है। इसका मतलब है, इनोवेशन जारी है। कार्यक्रम में रुंगटा समूह के चेयरमैन संतोष रूंगटा और डायरेक्टर सोनल रुंगटा, डॉ. सौरभ रुंगटा भी शामिल रहे।

बिना ड्राइवर चलेगी सड़कों पर टैक्सी
टेक्नोलॉजी के बदलते आयामों के बारे में बताने दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय फॉर वूमन की कुलपति डॉ. अमिता देव शास्त्रार्थ का हिस्सा बनीं। उन्होंने शानदार तथ्यों के साथ बताया कि जल्द ही आप बिना ड्राइवर वाली टैक्सी में सफर करेंगे। यह सबकुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मुमकिन हो पाएगा। गूगल के साथ तीन बड़ी कंपनियां इस तकनीक की टेस्टिंग फेज को भी पार कर चुकी हैं, अब सिर्फ लान्चिंग ही शेष है। उन्होंने आगे कहा कि वैज्ञानिक चैटबॉट सिस्टम डवलप करने में लगे हुए हैं, जो इमोशंस के साथ लोगों की हूबहू इंसान की तरह मदद करेगा, लेकिन होगा ये रोबोट।

रिसर्च इकोनॉमी की बैकबोन
केआईआईटी ग्रुप के डायरेक्टर जर्नल डॉ. एसएस अग्रवाल भी शास्त्रार्थ का हिस्सा बने। बतौर वक्ता उन्होंने कहा, साइंस हमारी सोसाइटी और इकोनॉमी की बैकबोन है। इसे मजबूत बना लिया तो समझो देश का विकास आसमान छुएगा। इसे बेहतर बनाने के लिए हमें रिसर्च का दायरा बढ़ाना होगा। रिसर्च के बिना इनोवेशन संभव नहीं। बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत ने दुनिया के शीर्ष 100 देशों की सूची में खुद को बेहतर इकोनॉमी और रिसर्च में शामिल किया है। दुनिया के नामी वैज्ञानिकों को साथ लेकर कराए गए इस कॉन्फ्रेंस को रुंगटा कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. मनीषा अग्रवाल और डॉ. एजाजुद्दीन ने अपने समन्वय में संपन्न कराया। रविवार को इस कॉन्फ्रेंस में पेपर प्रजेंटेशन का दौर शुरू होगा।

हमें चाहिए इन्क्यूबेशन सेंटर्स
रूंगटा शास्त्रार्थ के वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में अमेटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. पीबी शर्मा बतौर वक्ता जुड़े।

लैंग्वेज प्रोसेसिंग को बनाएं कॅरियर
शास्त्रार्थ में बतौर वक्ता सिंगापुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ ली. हाएजु शामिल हुए। उन्होंने लैंग्वेज प्रोसेसिंग पर कहा कि दुनिया में हिंदी तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, यही वजह है कि फेसबुक भारत को ही सबसे बड़े बाजार के तौर पर देखता है। फेसबुक जल्द ही भारत और चाइन में नई तकनीक मॉर्डन ट्रांसलेशन इजाद करेगा, जिससे दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति के लिए भाषा की बाधा समाप्त हो जाएगी। आपको बता दूं कि आज लैंग्वेज प्रोसेसिंग इंडस्ट्री 23 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। जिसमें भारत का बड़ा शेयर है। भारत में इंजीनियरिंग के लिए यही सबसे बड़ा जॉब मार्केट भी खोलेगा।