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BSP सेल चेयरमैन साहब… यह है ओएचपी-बी, यहां कर्मी जान जोखिम में डालकर काम करने जाते हैं

सेल चेयरमैन साहब...यह है भिलाई स्टील प्लांट की विस्तार परियोजना के तहत निर्मित नई इकाई ओर हैंडलिंग प्लांट-बी (ओएचपी-बी)। पूरा क्षेत्र पानी में डूबा हुआ है।

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भिलाई

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Bhuwan Sahu

Sep 28, 2018

PATRIKA

BSP सेल चेयरमैन साहब... यह है ओएचपी-बी, यहां कर्मी जान जोखिम में डालकर काम करने जाते हैं

भिलाई . सेल चेयरमैन साहब...यह है भिलाई स्टील प्लांट की विस्तार परियोजना के तहत निर्मित नई इकाई ओर हैंडलिंग प्लांट-बी (ओएचपी-बी)। पूरा क्षेत्र पानी में डूबा हुआ है। पहुंच मार्ग तक नजर नहीं आ रहा। यहां काम करने वाले सैंकड़ों कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर रोज इसी रास्ते से ड्यूटी-आते जाते हैं। दिन में तो जैसे आवाजाही हो जाती है, परेशानी रात पाली के कर्मचारियों को होती है। यहां आए दिन सांप और विषैले कीड़े-मकोड़े निकलते रहते हैं। आपके दौरे को लेकर ब्लास्ट फर्नेस-8, यूआरएम, एसएमएस-3, बीआरएम में खास इंतजाम किया जा रहा है। दिन-रात कर्मचारी लगे हुए हैं। दूसरी तरफ ओर हैंडलिंग प्लांट-बी (ओएचपी-बी) की अव्यवस्था को आपसे छुपाने का प्रयास किया जा रहा है।

कमरे से बाहर निकलने की हिम्मत नही कर पाते कर्मी

ओएचपी-2 में बने कंट्रोल रूम से हर विभाग कनेक्ट है। यहां सब स्टेशन, नया भवन तैयार हो चुका है। बिजली है लेकिन रात होते ही अंधेरा छा जाता है। फोन कनेक्शन है, लेकिन टेबल कुर्सी गायब है। कर्मचारी हैं, अफसर नजर नहीं आते। पचास फीसदी काम ठेका श्रमिक अंजाम दे रहे हैं। कर्मचारियों में भय का आलम यह है कि एक बार जैसे-तैसे अपने कार्यस्थल पर पहुंच जाते हैं फिर उसके बाद बाहर निकलने की हिम्मत नहीं करते। संचार व्यवस्था पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है, जिसके कारण कार्मिकों से संपर्क करने दिक्कत हो रही है।

17 कर्मियों का काम 5 से, अधिकारी नजर नहीं आते

एक्सपांशन के तहत तैयार हुए ओएचपी-बी से रॉ-मटेरियल ट्रैक हॉपर से एसएमएस-3 भेजा जाता है। इसके लिए यहां कंट्रोल रूम भी बना हुआ है। मटेरियल को भेजने के दौरान कई बार दिक्कत भी आती है। इस विभाग में वेगन टिप्लर-६, सब स्टेशन-४३ तैयार किए हैं। यहां कार्मिकों की कमी साफ तौर पर देखी जा सकती है। एक शिफ्ट में दो नियमित कर्मी और ३ पीआरडब्ल्यू रहते हैं। जबकि तीनों शिफ्ट में कम से कम ५० कर्मचारियों की यहां जरूरत है। अधिकारी यहां नजर ही नहीं आते।

चेयरमैन के दौरे से पहले सीइओ ने सुनी यूनियन नेताओं के दिल की बात

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के नए चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी शनिवार को भिलाई इस्पात संयंत्र के दौर पर आ रहे हैं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद सेल की किसी इकाई में यह उनका पहला दौरा है। अपने मुखिया के आगमन को लेकर संयंत्र प्रबंधन ने पूरी तैयारी कर ली है। इधर पिछली घटना से सबक लेते हुए बीएसपी के सीइओ एम रवि ने दौरे से एक दिन पहले शुक्रवार को यूनियन नेताओं को बुलाकर उनकी बातें सुनी।
इसी माह १० सितंबर को तत्कालीन सेल चेयरमैन सरस्वती प्रसाद ने संयंत्र विजिट किया था, तब संयुक्त यूनियन ने उनको अपना दुखड़ा सुनाने के लिए इस्पात भवन के गेट को घेर लिया था। पिछली बार की तरह इस बार भी कहीं प्रबंधन की किरकिरी न हो जाए इसलिए सबक लेते हुए रवि ने यूनियन नेताओं बुलाकर उनकी समस्याएं व शिकायतें सुनी। शुक्रवार को सीटू ठेका प्रकोष्ठ के नेताओं समेत अन्य से चर्चा खुद सीईओ एम रवि ने किया।

वेतन पर्ची देना किया जाए अनिवार्य

सीटू ठेका प्रकोष्ठ के महासचिव योगेश कुमार सोनी ने बताया कि यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ से मिलकर ठेका श्रमिकों की समस्याओं के समाधान की मांग की। सभी ठेका श्रमिकों को वेतन पर्ची देना अनिवार्य किया जाए। इस पर सीईओ ने जल्द इसकी व्यवस्था करने का भरोसा दिया। वेतन पर्ची में हाजिरी, मिलने वाले वेतन सहित पीएफ कटौती की जानकारी होती है। यह सारी जानकारी रहने पर ठेका श्रमिकों को उनका समुचित वेतन मिल सकेगा और उनके शोषण में कमी आएगी। प्रतिनिधमंडल में जमील अहमद, योगेश सोनी, मनीष सहगल, बैजनाथ, राजू भारती शामिल थे।