26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भिलाई गोलीकांड की 26 वीं बरसी पर नम हुई आंखें, मृत श्रमिकों को दी श्रद्धांजलि

फ्रेम में जकड़े अपने लाडले की श्वेत-श्याम तस्वीर, उस पर टंगी माला और सामने छोटे से कलश पर जलते दीये को देखते ही दुखद स्मृतियां फिर ताजी हो गई।

2 min read
Google source verification
A July shootout case

भिलाई गोलीकांड की 26 वीं बरसी पर नम हुई आंखें, मृत श्रमिकों को दी श्रद्धांजलि

भिलाई. 65 की उम्र की सांकरा निवासी ठगिया बाई, कुम्हारी की लेडग़ी बाई और शारदा पारा कैंप-2 की गीता नारों की गर्जना में स्वर में स्वर मिला रही थीं। आसमान की ओर रह-रहकर उठती उनकी भिंची हुई मुठ्ठी से साफ था कि प्रहार, प्रतिशोध, प्रतिज्ञा की ज्वाला २६ सालों से आज तक उनके दिलों में भभक रही है। इनके जैसे और भी कितने बूढ़े मां-बाप, पत्नी और बच्चे थे जो अपनी दुखद स्मृतियों के साथ 1 जुलाई 1992 को भिलाई गोलीकांड में मारे गए अपने बेटे, पति और पिता को श्रद्धांजलि देने पॉवर हाउस रेलवे स्टेशन आए थे।

गोलीकांड में मारे गए सभी 17 श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी

हाथों में लाल-हरा झंडा, सरकार, प्रशाासन और उद्योगपतियों को कोसने वाले बैनर व पोस्टर तथा मजदूरों के कथित शोषण के खिलाफ गगनभेदी नारे, मगर पूरी तरह अनुशासित श्रमिकों व उनके परिजन का कतारबद्ध काफिला रविवार को दोपहर डेढ़ बजे पॉवर हाउस रेलवे स्टेशन पहुंचा। यह रैली स्टेशन के दूसरे छोर पर जाकर रुकी जहां पर गोलीकांड में मारे गए सभी 17 श्रमिकों असीम दास, केएन प्रदीप कुट्टी, केशव प्रसाद गुप्ता, किशोरी लाल मल्लाह, लक्ष्मण वर्मा, कुमार वर्मा, रामाज्ञा चौहान, प्रेम नारायण वर्मा, पुरानिक लाल साहू, मनहरण वर्मा, इंद्रदेव चौधरी, हिरऊ राम साहू, मधुकर नाई, जोगा यादव, रामकृपाल सिंह,धीरपाल ठाकुर और लोमन उमरे की वेदी सजी हुई थीं। फ्रेम में जकड़े अपने लाडले की श्वेत-श्याम तस्वीर, उस पर टंगी माला और सामने छोटे से कलश पर जलते दीये को देखते ही दुखद स्मृतियां फिर ताजी हो गई। रह-रहकर उठती हिचकियां अश्रुज्वार में बदल गईं।

एक स्वर में कहा हम अपना हक लेकर ही रहेंगे
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के नेता जनकलाल ठाकुर, भीमराव बागड़े व बंशीलाल ठाकुर की अगुवाई में दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव व दल्लीराजहरा से आए छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता व मजदूर एसीसी चौक नंदिनी रोड में एकत्रित हुए। वहां श्रमिक नेताओं ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कथित मजदूर विरोधी नीतियों के लिए सरकार को जमकर कोसा। शहीद शंकर गुहा नियोगी की हत्या की जांच उच्च न्यायालय के न्यायधीश से करवाने की मांग की गई। काम से निकाले गए मजदूरों को उनका हक दिलाकर रहने का संकल्प लिया गया।

बरसते पानी में भी नहीं डिगे लोग
सभा पश्चात रैली पॉवर हाउस रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुई। रैली में मृत श्रमिकों के बूढ़े मां-बाप, पत्नी और बच्चे शामिल थे। रैली छावनी चौक पहुंची ही थी कि तेज हवाओं के साथ जमकर बारिश होने लगी। बावजूद मजूदरों की यह कतारबद्ध और अनुशासित रैली न कहीं रुकी, न थमी। बारिश में भीगने से बचने किसी ओट का सहारा लेने की बजाए नारों की गंूज और बुलंद हो गई।