23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब IIT भिलाई में नहीं चलेंगी पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां, जानिए क्या है वजह

IIT Bhilai: देश में शुरू हुए थर्ड जनरेशन के 6 नए आईआईटी में भिलाई पहला संस्थान होगा, जिसके कैंपस में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां बिल्कुल नहीं दौड़ेंगी। आईआईटी फैकल्टी से लेकर स्टूडेंट्स सभी या तो पैदल आना-जाना करेंगे या फिर उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल का उपयोग करना होगा।

3 min read
Google source verification
 IIT भिलाई

IIT भिलाई

IIT Bhilai: देश में शुरू हुए थर्ड जनरेशन के 6 नए आईआईटी में भिलाई पहला संस्थान होगा, जिसके कैंपस में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां बिल्कुल नहीं दौड़ेंगी। आईआईटी फैकल्टी से लेकर स्टूडेंट्स सभी या तो पैदल आना-जाना करेंगे या फिर उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल का उपयोग करना होगा। इसके लिए आईआईटी पूरे कैंपस में 20 चार्जिंग स्टेशन तैयार कर रहा है। ऐसे स्टूडेंट्स जो ईवी व्हीकल अफॉर्ड नहीं कर पाएंगे उनके लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था संस्थान की ओर से होगी।

इस फैसले के पीछे आईआईटी ने कार्बन फुटप्रिंट कम करने और इकोफ्रेंडली कैंपस को वजह बनाया है। कैंपस को इस तरह से तैयार किया जा रहा है फैकल्टी और स्टूडेंट्स रोजाना कम से कम 500 मीटर पैदल चलें। इसी तरह डिजाइन आर्किटेक्टर में एक से दूसरे भवन में जाने का वाकिंग डिस्टेंस कम से कम हो। भिलाई में इन दिनों हजारों ई-व्हीकल दौड़ रहे हैं, लेकिन एक भी ईवी चार्जिंग स्टेशन की सुविधा नहीं है।

आईआईटी 2500 विद्यार्थियों की क्षमता के हिसाब से 20 चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था करेगा। प्रदेश में यह पहला स्पॉट बन जाएगा, जहां एक साथ इतने चार्जिंग स्टेशन होंगे। फैकल्टी को ईवी कारों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं, शेयरिंग सिस्टम का पालन होगा, जिससे कार्बनफुट को कम किया जा सके।

यह भी पढ़ें: महिला की हत्या के बाद घर से लाखों रुपए के जेवरात पार, मर्डर या फिर लूट की थी प्लानिंग, पुलिस कर रही जांच

उमस कम करने रेडिएंट कूलिंग
आईआईटी भिलाई पहला होगा जिसमें सीलिंग और दीवारों को ठंडा रखने रेडिएंट कूलिंग का उपयोग किया जाएगा। सभी बिल्डिंग को लिंक करते हुए कमरों का तापमान पानी के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। यहां एसी का इस्तेमाल नहीं होगा।

एलएंडटी कर रही निर्माण
आईआईटी भिलाई के फेज-1 का निर्माण कार्य 750 करोड़ रुपए से किया जा रहा है। परिसर को आकार देने की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड कंपनी (एलएंडटी) को दी गई है। इस कैंपस के निर्माण में प्रकृति के संरक्षण का खास ध्यान रखा गया है। जैसे, कैंपस में पहले से मौजूद पेड़ और तालाबों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। नए तालाबों को विकसित किया गया है ताकि कैंपस को ठंडा बनाए रखने के साथ साथ पर्यावरण संरक्षित रहे।

यह भी पढ़ें: जंगल में मिली महिला की सड़ी-गली लाश: रस्सी के सहारे लटक रहा था सिर, बाकी हिस्सा गला हुआ, जांच में जुटी पुलिस

प्रो. राजीव प्रकाशडायरेक्टरआईआईटी भिलाई ने कहा, पहले कैंपस में सिर्फ साइकिल का प्रावधान था, लेकिन इस बार स्टूडेंट्स के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल को मंजूरी दी गई है। उनकी गाड़ियों को चार्ज करने परिसर में 20 चार्जिंग स्टेशन बनाने का निर्णय लिया गया है। फैकल्टी को अपने क्वार्टर से कैंपस तक पहुंचने पैदल आना होगा या वे ईवी का सहारा लेंगे। पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर पाबंदी होगी।

30 साल नहीं करना होगा दीवारों को पेंट
आईआईटी का कैंपस जितना आधुनिक है, उतना ही खर्च कम वाले वाला भी है। इसके लिए दीवारों पर पेंट के बजाय 50 एमएम के पत्थर लगाए जा रहे हैं, इसे स्टोन क्लैडिंग कहते हैं। वहीं ग्रीट प्लास्टर यानी कांक्रीट व पत्थर को मिक्स करके कोट लगाए जा रहे हैं। इसकी मदद से आईआईटी परिसर को साल दो साल में पेंटिंग कराकर खूबसूरत दिखाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि स्टोन क्लैडिंग की मदद से 30 सालों तक पेंट कराने का झंझट खत्म हो जाएगा।

प्रकृति संरक्षण पर विशेष ध्यान
आईआईटी भिलाई के फेज-1 का निर्माण कार्य 750 करोड़ रुपए से किया जा रहा है। इस कैंपस के निर्माण में प्रकृति के संरक्षण का खास ध्यान रखा गया है।जैसे, कैंपस में पहले से मौजूद पेड़ और तालाबों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। नए तालाबों को विकसित किया गया है ताकि कैंपस को ठंडा बनाए रखने के साथ साथ पर्यावरण संरक्षित रहे।