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Video: हाफपेंट पहनने वाले 91 वर्षीय पद्मश्री डॉ. सुब्बाराव के फैन हुए मिनी इंडिया के यूथ, सुर से सुर मिलाकर गया हमारा प्यारा हिंदुस्तान

छरहरी की काया और एक सूती की शर्ट के साथ हॉफपेंट पहने पद्मश्री डॉ सुब्बाराव की बातें युवाओं को दिल तक पहुंच गई कि वे उनसे बात करने उमड़ पड़े।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Mar 14, 2019

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Video: हाफपेंट पहनने वाले 91 वर्षीय पद्मश्री डॉ. सुब्बाराव के फैन हुए मिनी इंडिया के यूथ, सुर से सुर मिलाकर गया हमारा प्यारा हिंदुस्तान

भिलाई. एक धारा देश हमारा प्यारा हिन्दुस्तान, दुनिया में बेजोड़ अनोखा भारत वर्ष महान..दो कदम मिलाओ रे...दो कदम बढ़ाओ रे, ऐ वतन के नौजवान, इस चमन के बागवान, इस देश को महान बनाओ रे.. जैसे गीत को जब अपनी ओज वाणी में जब डॉ. सुब्बाराव ने गाया तो उनके पीछे-पीछे कॉलेज के प्रोफेसर से लेकर युवा भी सुर में सुर मिलाने लगे। छरहरी की काया और एक सूती की शर्ट के साथ हॉफपेंट पहने पद्मश्री डॉ सुब्बाराव की बातें युवाओं को दिल तक पहुंच गई कि वे उनसे बात करने उमड़ पड़े।

अहिंसा के रास्ते पर चलकर देश को बनाना है महान
इस दौरान डॉ राव ने देश को महान बनाने और एक सूत्र में पिरोने नौजवानों को आगे की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को एक घंटा अपने स्वास्थ्य और एक घंटा अपने देश को देना चाहिए। उन्होंने अंहिसा के रास्ते पर चलकर ही देश को महान बनाने की बात कही। गुरुवार को कल्याण कॉलेज में संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश को एक करने के लिए बंदूक की नहीं जरूरत नहीं बल्कि बंदूक का विकल्प खोजना चाहिए और नौवजानों को एक होकर देश के लिए आगे आना चाहिए।

मनुष्य में ईश्वर है तो फिर क्यों लड़ते हैं?
डॉ. सुब्बाराव ने कहा कि पांच हजार साल पुराने सतानत धर्म से लेकर 4 सौ साल पुराने सिख धर्म में यही कहा गया है कि ईश्वर हमारे अंदर बसता है तो हम धर्म और जाति के नाम पर क्यों लड़ते हैं। टोपी, दाढ़ी, लुंगी से पहचानने की बजाए हम एक हिन्दुस्तानी की तरह खुद की पहचान बनाए। हमें सभी भाषाओं को अपनाना चाहिए और सभी धर्म के लोगों को अपनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सीख दी कि वे अपनी गलती को स्वीकारना सीखे। जरूरी नहीं है कि हर बार वे ही सही हो। प्रजातंत्र की रक्षा के लिए हमें विविध इच्छाओं को स्वीकार करना चाहिए।

विविधता वाले भारत की भुट्टों ने भी की तारीफ
डॉ. राव ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फीकर अली भुट्टो की उस किताब का संस्मरण भी सुनाया जिसे भुट्टो ने जेल में लिखी थी। भुट्टों ने कहा था कि भारत की तुलना वे पाकिस्तान तो क्या दुनिया के किसी भी देश से नहीं कर सकते क्योंकि यह इकलौता प्रजातांत्रिक देश है जो विविधता वाले धर्म से भरा हुआ है। इस दौरान उन्होंने 1945 का एक वाकया सुनाया कि वे सब युवा एक शिविर में थे जब पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद की लिखी किताब भारत के अगर टुकड़े हो गएतो?.. पढ़ी और कहा था कि यह सब कभी नहीं हो सकता। लेकिन दो साल बाद वह दिन आया और केवल धर्म के नाम पर देश के टुकड़े हो गए।

युवाओं के सवालों के दिए जवाब
पद्मश्री डॉ. सुब्बाराव ने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने कहा कि वे मदर टेरेसा से काफी प्रेरित है। उन्होंने अमेरिका में मदर टेरेसा के दिए उस बयान के बारे में भी बताया जिसमें मदर ने यह कहा था कि मैं एक अमीर देश भारत से गरीब देश अमेरिका आई हूं, अमेरिका इसलिए गरीब है, क्योंकि यहां आध्यात्मिका शून्य है। मदर टेरेसा के इस बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति भी कुछ नहीं कह पाए थे।