
दुर्ग . पाकिस्तानी नागरिक द्वारा भारतीय के खिलाफ न्यायालय में प्रस्तुत चेक बाउंस के परिवाद को न्यायाधीश दीप्ति बरवा ने खारिज कर दिया। पाकिस्तान मूल के पूरन भगत (३१ वर्ष) सुनवाई के दौरान न्यायालय को यह नहीं बता सका कि उधार के रुप में अनिश जैन को दिए ४० लाख रुपए उसके पास कहां से आए। परिवादी पूरण ने किसी तरह का गवाह भी प्रस्तुत नहीं किया। पूरण ने चेक बाउंस के मामले में आनिश के खिलाफ परिवाद पेश किया था।
परिवाद के मुताबिक गुरुनानक जनरल स्टोर्स इंदिरा मार्केट के संचालक पूरन भगत ने परिवाद प्रस्तुत किया था कि उसने अनिश जैन (२५ वर्ष) को १८ अप्रैल २०१४ को ४० लाख रुपए कर्ज में दिया था। जिसे लौटना के लिए जैन प्लास्टिक इंदिरा मार्केट के संचालक अनीश ने चेक दिया था। चेक उसने १७ जुलाई २०१४ को आईडीबीआई बैंक में जमा किया था।
गैर भारतीय है फिर भी चलेगा मुकदमा
परिवादी ने अपनी नागरिकता नहीं छिपाई है। भारतीय कानून व्यवस्था के अनुसार गैरभारतीय को भी सरंक्षण का अधिकार प्राप्त है। चेक बाउंस का प्रकरण अपराधिक प्रकरण की श्रेणी में आता है। परिवादी की नागरिकता संबंधी आवेदन लंबित है, जो विभागीय कार्य है। इसलिए परिवाद ग्राह्य योग्य है। जिस पर न्यायालय में नियमित सुनवाई भी हुई।
अनिश ने अपने बचाव में यह कहा
१. परिवादी भारतीय नागरिक नहीं है। इसलिए परिवाद ग्राह्य योग्य नहीं है।
२. परिवादी भारत का नागरिक नहीं इसके बाद भी शहर में अवैधानिक रुप से व्यापार कर रहा है।
३. परिवादी के पास पेन कार्ड है, इनकम टैक्स रिटर्न भरा है जो अवैधानिक है।
४. परिवादी की आय दस्तावेज के आधार पर महज १ से २ लाख वार्षिक है। इतनी बड़ी राशि उसके पास नहीं है। वह गलत दावा कर रहा है।
५. जिस चेक को परिवाद का आधार बनाया है उसने वह चेक पुष्पेन्द्र जैन को दिया था।
सभी प्रकरणों में राशि 1.40 करोड़ रुपए
बचाव पक्ष के वकील अनुराग ठाकर ने बताया कि पाकिस्तानी नागरिक पूरन भगत ने चेक बाउंस से संबंधित अलग-अलग कुल छह प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए है। सभी प्रकरणों में राशि १.४० करोड़ रुपए है। हमने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि परिवादी की आय सालाना १ से २ लाख रुपए है। आखिर इतनी संपत्ति उधार में देने का दावा का आधार क्या है? न्यायालय ने इस आधार को सही माना और फैसला सुनाया।
Published on:
27 Apr 2018 11:17 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
