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मंगल अभिषेक के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन, आचार्य विशुद्ध सागर बोले-नसिया तीर्थ में नियमित हो पूजा व स्वाध्याय

Panchakalyaanak Mahotsav: आचार्य ने कहा सब दिन एक से नहीं होते, कोई आप पर दोषारोपण भी करे तो शांत रहना, कोई उत्तर नहीं देना। समय दे दो, समस्या का समाधान स्वमेव हो जाएगा। हर बात का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है।

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Panchkalyanak Pratishtha Mahotsav

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नवप्रभात की नई किरण के साथ भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत से निर्वाण प्राप्ति अग्नि कुमार देवों द्वारा नखकेश संस्कार का कार्यक्रम हुआ। इसके बाद महामस्ताभिषेक व रथ प्रदक्षिणा एवं विसर्जन किया गया। इस मौके पर आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि नसिया तीर्थ में नियमित पूजा व स्वाध्याय होते रहना चाहिए।

आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा वो जीव धन्य है जो अपने आवरण विचार और शरीर को विशुद्ध रखते है। शिवनाथ तट पर नसिया तीर्थ का सुन्दर निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि मंदिर में पूजा व प्रवचन नियमित होना चाहिए। जिस मंदिर के कपाट बंद रहते है वहॉ कबूतर आते है और जिस मंदिर के कपाट खुले रहते है वहां देव आते है।

मोक्ष कल्याणक के दिन आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि बड़े पुण्य के कारण ही आप सब लोगों को पंच कल्याणक महामहोत्सव में शामिल होने का अवसर मिला है। उन्होंने नसिया तीर्थ के निर्माण में योगदान देने वाले सभी लोगों को मंगलाशीष व आशीर्वाद दिया। आचार्य ने विभिन्न प्रांत से आए लोगों से वर्ष में एक बार चंद्रप्रभ भगवान का दर्शन करने नसिया तीर्थ में आने का आहृवान किया और स्थानीय लोगों से प्रतिदिन मंदिर आकर पॉच मिनट का स्वाध्याय करने के लिए कहा।

आचार्य ने कहा कि जहां स्वाध्याय होता है वहीं देव आते है। भक्ति करोगे तो भगवान अपने आप आएंगे। उन्होंने कहा कि तुम मुनि बनो या न बनो लेकिन मुनि की महिमा को समझो। व्यक्ति मूलाचार नहीं है, संत मूलाचार है। मूलाचार में जियोगे तो भगवान बन जाओगे। आचार्य ने कहा कि मांस खाना महापाप है। अरिहंत रामकृष्ण व हनुमान के भक्त मांस का सेवन नहीं करते। हमेशा शाकाहार व सात्विक भोजन करें। घर की रसोई सीता की रसोई की तरह होनी चाहिए, जो मुनि के अवशेष भोजन को भोगता है वह स्वर्ग को प्राप्त करता है। भगवान की भक्ति करते रहो।

अंतिम दिन ये बने पुण्यार्जक
अंतिम दिन शांति धारा के पुण्यार्जक प्रकाशचंद प्रदीप बाकलीवाल बने। अग्नि कुमार देव बनने का सौभाग्य कमल विनोद पाटनी नरेन्द्र मनोज ठोलया को प्राप्त हुआ। चंद्रप्रभ भगवान का अभिषेक गुमानमल सुनील अनिल गोधा ने किया। मुनि सुव्रत भगवान का अभिषेक भागचंद संजय पाटनी ने किया। पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक चंद्रकुमार नरेश बाकलीवाल ने किया। चंद्रप्रभ भगवान के शांतिधारा के पुण्यार्जक देवेन्द्र सजल काला व दीपचंद भरत गोधा बने। मुनि सुव्रत नाथ भगवान के शांतिधारा के पुण्यार्जक सुयश सोहम व मूलचंद बलदेव परिवार व पार्श्वनाथ भगवान के शांतिधारा के पुण्यार्जक मदन लाल महेन्द्र गजेन्द्र पाटनी सन्नी पाटनी बने। तीनों ध्वजारोहण रतनलाल दिनेष पाटनी वैशालीनगर ने किया।

आचार्य ने किया नांदगांव की ओर विहार
कार्यक्रम के समापन के बाद आचार्य विशुद्ध सागर महाराज अपने संघ के साथ राजनांदगांव विहार पर निकल गए। वे रात्रि में अपोलो कालेज में विश्राम करेंगे।