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पत्रिका जन एजेंडा 2018-23 : शिवनाथ के पानी का लाभ किसानों को नहीं मिलता

पत्रिका समूह के जन एजेंडा २०१८-२३ के तहत हर विधानसभा क्षेत्र के लोगों, जन संगठनों और समूहों ने बैठक कर रोड मैप तैयार किया। क्षेत्र के विकास के मुद्दे तय किए।

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पत्रिका जन एजेंडा 2018-23 : शिवनाथ के पानी का लाभ किसानों को नहीं मिलता

संभावित दावेदार: प्रदीप देशमुख (चेंजमेकर) राजेश साहू (चेंजमेकर) विधानसभा क्षेत्र: दुर्ग ग्रामीण विधानसभा
भिलाई/दुर्ग. शहरी, ग्रामीण और औद्योगिक मिश्रित क्षेत्र होने के कारण अलग-अलग क्षेत्र की अलग-अलग प्राथमिकता। इसी के आधार पर जरूरत तय होना चाहिए। एरिया वाइस प्लान नहीं होने के कारण किसी भी क्षेत्र का ठीक से विकास नहीं हो रहा। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में आज भी कई सुविधाएं अछुती है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। रसमड़ा बोरई इलाके में उद्योग लगे हैं। ये अधिकतर उद्योग बंद हैं। जो उद्योग चालू हैं, वहां बाहर से लोगों को लाकर काम पर रखा जाता है। उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को लिए रोजगार तय किया जाए।

अवैध कॉलोनी बताकर विकास नहीं

रिसाली में करीब 30 कॉलोनियां बन गई है। इन कॉलोनियों से भिलाई नगर निगम टैक्स वसूल रहा है, लेकिन अवैध कॉलोनी बताकर विकास नहीं किया जा रहा है। टैक्स बंद करें।

शहरी आबादी के बाद भी एक भी सरकारी हॉस्पीटल नहीं है। रिसाली और धनोरा में सरकारी अस्पताल की सुविधा। अभी सुपेला या जिला अस्पताल जाना मजबूरी बन गया है, सुविधा दिलाई जाए।

पूरा इलाका सार्वजनिक परिवहन सुविधा से वंचित है। हालात यह है कि शहरी इलाके में सिटी बस तो दूर प्रायवेट टैम्पों और टैक्सियां तक नहीं चलती। सिटी बस संचालन व्यवस्था से इलाकों को जोड़ा जाना चाहिए।

विकसित क्षेत्र में पैदल चलने लायक भी सड़क नहीं

दुर्ग शहर से उतई को जोडऩे टू लेन सड़क बनाई जा रही है। इससे क्षेत्र की तेजी से विकास संभावित है, लेकिन पहले से विकसित क्षेत्र में पैदल चलने लायक भी सड़क नहीं है।

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लिफ्ट एरीगेशन से नगपुरा, अंजोरा, ढाबा इलाकों में पानी पहुंचाया जाना चाहिए। शिवनाथ का अधिकतर हिस्सा दुर्ग ग्रामीण से गुजरता है, लेकिन इसके पानी का लाभ किसानों को नहीं मिलता।

विधानसभा क्षेत्र को शिवनाथ को दो भागों में बांटता है। नदी में शिवनाथ पर दो से तीन जगहों पर पुल अथवा एनीकट बनाया जाना चाहिए। ताकि बेहतर व्यवस्था हो सके।

क्या है विजन
सड़क और सिंचाई पर काम। उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार। शहर से लगे इलाकों में निर्मित कॉलोनियों में विकास। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी।