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Patrika Parenting Today: अरे..यार पापा आपको तो कुछ भी नहीं आता, आप हिंदी मीडियम वाले हो…

बचपन में जिसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसकी हर जरूरत पूरी की। वही लाडला बड़ा होने के बाद अपने पैरेंट्स को दुश्मन समझने लगा है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 07, 2018

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Patrika Parenting Today: अरे..यार पापा आपको तो कुछ भी नहीं आता, आप हिंदी मीडियम वाले हो...

भिलाई. बचपन में जिसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसकी हर जरूरत पूरी की। वही लाडला बड़ा होने के बाद अपने पैरेंट्स को दुश्मन समझने लगा है। बेटा अभी स्कूल में है, लेकिन जब उसे कुछ सिखाओ तो कहता है कि अरे... यार पापा आपको कुछ नहीं पता, मैं इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ता हूं। आप हिंदी मीडियम वाले हो।

क्या ये सही है? यह सवाल भावुक लहजे में जैसे ही एक पिता ने पूछा हर कोई एक्सपर्ट की ओर उत्सुक्ता भरी नजरों से देखने लगा। यह नजारा मंगलवार को हुई पत्रिका और सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज की पैरेंटिंग टुडे कार्यशाला का है। सेक्टर 7- स्थित बीएसपी वर्कर्स यूनियन कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पैरेंट्स और बच्चे मौजूद रहे।

बतौर एक्सपर्ट सर्टिफाइड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने पैरेंट्स की ओर देखा और बोले, ये सब स्कूल का कुसूर नहीं बल्कि बात संस्कारों की है। हमें उसके सामने आदर्श स्थापित करना होगा। बच्चों को डांटना या मारना इसका हल नहीं। बच्चा खुद को इस लिए सुपीरियर समझ रहा है, क्योंकि उसके सामने आपका वेटेज कमजोर पड़ा है।

बतौर पैरेंट्स आपको अपनी मौजूदगी प्रभावी बनानी होगी। अंग्रेजी या हिंदी मीडियम से कुछ नहीं होता। पैरेंट्स का मान बच्चों के दिल में होना चाहिए। एक्सपर्ट के इस जवाब से उस पिता का सवाल पूरा हुआ। इसके बाद सवालों की जैसे झड़ी सी लग गई। हर पैरेंट्स अपनी दिक्कत सामने रखने लगे।

कार्यक्रम में भिलाई प्रसिद्ध कॅरियर काउंसलर डॉ. किशोर दत्ता और पत्रिका भिलाई के स्थानीय संपादक नितिन त्रिपाठी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों को कभी भी अपनी सफलता का घमंड अपने पैरेंट्स को नहीं दिखाना चाहिए। यहां तक पहुंचने का रास्ता आपके पैरेंट्स ने ही तो बनाया है। हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा काबिल बने। पैरेंट्स ही बच्चों के सबसे पहले शुभचिंतक होते हैं।

यह कार्यक्रम बीएसवी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता के सहयोग से बीडब्ल्यूयू कार्यालय में कराया गया। इस दौरान यूनियन उपाध्यक्ष नोहार सिंह गजेंद्र, जोगा राव, सुनीश सहारिया, महासचिव खूबचंद वर्मा, उप-महासचिव शिव बहादुर सिंह एवं डिलेश्वर राव मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन पत्रिका की रिपोर्टर दाक्षी साहू और इवेंट मैनेजर पत्रिका देवेश मिश्रा ने किया।

नाम गंगाधर पटेल। उम्र महज 26 साल। इस उम्र में जब दूसरे लड़के दुनिया की चकाचौंध में खोकर अपनी मर्जी से जीने की राह तलाशते हैं, उनसे विपरीत यह भाई 3 बहनों की लाइफ बनाने में जुटा है। यह वही भाई है जो अपनी बहनों को काबिल बनाने सुबह से शाम तक सीए के पास अकाउंटेंट का काम करता है तो शाम ढलते ही एटीएम बूथ में चौकीदारी। कार्यशाला में मौजूद सैकड़ों लोगों ने गंगाधर के लिए दिल खोलकर तालियां बजाई। एक्सपट्र्स ने भी उनकी सराहना की।

अगर, माता-पिता बच्चों को अपनी तरह बनाना चाहें तो क्या ये गलत है? पैरेंट्स के हिसाब से बच्चे तैयार नहीं होंगे?
हर डॉक्टर पिता चाहता है कि मेरा बेटा भी डॉक्टर बने। आप सही हो सकते हैं, लेकिन यह बात गलत है। हर बच्चा अपनी यात्रा में होता है। हम उसके फैसेलिटेटर हैं, न कि उसके कोच। उस पर दबाव डालकर उसे अपनी तरह से तैयार करना सही नहीं है। हो सकता है वो डॉक्टर की बजाए बेहतर सिंगर बनना चाहता हो। इसमें उसे कामयाबी मिले।

मेरा बेटा पढ़ाई में अव्वल है, लेकिन वो किसी भी सोशल प्रोग्राम में इनवॉल्व नहीं होना चाहता। उसे इंट्रेस्ट नहीं। क्या ये टेंशन का विषय है?
कई बच्चे होते हैं, जो सिर्फ एक माइंड सेट बनाकर चलते हैं। उसने पढ़ाई को चुना है। वह इसमें ही बेहतर कर दिखाएगा। हालांकि उसे दूसरी चीजों में भी आगे आना चाहिए, लेकिन आप उसे उतना ही रिक्वेस्ट करें जितने में वह उत्साहित हो। कुछ नया करने का फैसला उसे लेने दें।

बिटिया एमबीबीएस करना चाहती थी, लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ। वह पढ़ाने में बहुत अच्छी है, स्किल्ड लोगों की तरह टीचिंग करती है पर वह टीचर नहीं बनना चाहती। उसे मेडिकल न मिलने का टेंशन है, क्या करें?
आगे बढऩे के लिए एक एग्जाम को पैमाना मान कर न चलें। आपकी बिटिया चाहे तो मेडिकल के चुनिंदा क्षेत्र में बीएससी करने के बाद इसमें एम फिल या पीएचडी कर सकती हैं। ऐसे उनका मेडिकल में इंट्रेस्ट भी बना रहेगा और उनकी टीचिंग स्किल के जरिए पढ़ाने का काम भी कर पाएंगी।

कहा जाता है कि बच्चों की तुलना न करें, लेकिन तुलना पॉजीटिव हो तो क्या दिक्कत है?
हम तुलना झुंझलाहट में करते हैं। तुलना सकारात्मक तभी हो सकती है, जब हम बच्चे की अच्छाइयों पर बात करें। वैसे तुलना किया जाना किसी को भी पसंद नहीं, फिर वो तो बच्चा है।

बच्चे को सिर्फ स्कूल या ट्यूशन के भरोसे छोड़ा जाने लगा है, क्या ये उस पर विपरीत प्रभाव डालेगा?
जो पैरेंट्स बच्चे को सिर्फ स्कूल या ट्यूशन भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं, इसमें पहला नुकसान उनका ही है। बच्चे को टाइम न देना उसे आपसे दूर करेगा। वह इसके लिए दूसरों पर निर्भर हो जाएगा, जिससे बात बिगड़ सकती है।

मैं अपनी तीन बहनों को पढाई के लिए शहर लाया,दिन-रात मेहनत कर उन्हें पढ़ा रहा हूं, लेकिन वो कहती हैं कि मैं उन्हें समय नहीं दे पाता, क्या करूं?
आपको उन्हें बैठाकर समझाना होगा कि अभी जो आप कर रहे हैं, वो सबकी भलाई के लिए ही हैं। एक-दो दिन में सब साथ बैठकर खाना खाते वक्त भी यदि बात कर ली जाए तो यह काफी होता है। उन्हें क्वालिटी टाइम दीजिए।

मेरी बहन कराते में स्टेट चैम्पियन है, लेकिन इससे उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पढऩे में मन नहीं लगता, वो सिर्फ कराते में ही आगे बढऩा चाहती है, कैसे समझाऊं?
आप ही वो फैक्टर हैं, जो चेंज ला सकते हैं। उन्हें पढ़ाई की एहमियत बताइए। ये भी समझाएं कि खेल जारी रखे लेकिन पढ़ाई को भी उतना ही वक्त दें। कम से कम ग्रेजुएशन तो पूरा होना चाहिए। इससे उन्हें रेलवे या अन्य जगहों पर खेल कोटे से नौकरी भी मिल सकती है।

अभी १२वीं पास किया है, एयरलाइंस में जाना चाहती हूं। कौन सी बातें जरूरी होती हैं?
एयरलाइंस के लिए पहले खुद को परख लें। क्या आपमें अट्रैक्टिव पर्सनालिटी, हिंदी व अंग्रेजी का बेहतर कमांड और कम्युनिकेशन स्किल हैं तो यह फील्ड बढिय़ा है। कई संस्थान हैं जो ट्रेनिंग दे रहे हैं, लेकिन पहले इनका ठीक से रिव्यू कर लें, ताकि प्लेसमेंट में दिक्कत न आएं।

देशभर में गल्र्स सेफ्टी के लिए इंतजाम हो रहे हैं, लेकिन पैरेंट्स अपने स्तर पर क्या व्यवस्था रखें?
सबसे पहले बच्चे को यह समझाएं कि चाहे जो हो आपसे झूठ न बोले। यानि आपको यह पुख्ता होना चाहिए कि बच्चा कहां है। आप उसके मोबाइल में एप के जरिए पैनिम बटन इंस्टॉल कर सकती हैं। उन्हें सेल्फ डिफेंस सिखाना भी अब वक्त की मांग है।

क्या पैरेंट्स को अपने बच्चों के साथ फ्रेंडली होना चाहिए?
बच्चों के साथ फ्रेंडली होना है, न की उनके साथ इसका नाटक करें। फें्रडली बनकर उनकी जासूसी तो बिल्कुल भी नहीं। बच्चों को माता-पिता से बेहतर कोई नहीं जान सकता। इसलिए फ्रेंडली जरूर हों, लेकिन ईमानदारी के साथ।

१२वीं के बाद अब मेरा इंट्रेस्ट थिएटर में है, मुझे कहां एडमिशन लेना चाहिए?
आप चाहें तो एनएफटी या एनएसडी से थिएटर में डिग्री या डिप्लोमा कर सकते हैं। इसके अलावा पहले अपना सामान्य ग्रेजुएशन करें, साथ-साथ किसी नाट्य संस्था के साथ जुड़कर अपनी इनर क्वालिटी को बेहतर कर सकते हैं।