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मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर लोग इसलिए विश्वास नहीं करते, यहां सूखे की स्थिति और आंकड़े बता रहा 10 साल का रिकार्ड टूट गया

दुर्ग जिले में इस साल मानसून इतना बरसा है कि पूरे 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। मौसम विभाग का आंकड़ा तो यही कह रहा है। पर बारिश कहां हुई, यह लोगों को समझ नहीं आ रहा।

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मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर लोग इसलिए विश्वास नहीं करते, यहां सूखे की स्थिति और आंकड़े बता रहा 10 साल का रिकार्ड टूट गया

भिलाई. दुर्ग जिले में इस साल मानसून इतना बरसा है कि पूरे 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। मौसम विभाग का आंकड़ा तो यही कह रहा है। पर बारिश कहां हुई, यह लोगों को समझ नहीं आ रहा। विभाग के आंकड़े के मुताबिक 2018 जुलाई में 613 मिमी से ज्यादा बारिश हुई। जबकि जुलाई में गिनती के कुछ दिनों को छोड़ दिया जाए तो लगातार बारिश को लोग तरस गए। जो बारिश हुई वह जमीन पर कहीं नजर ही नहीं आती। आंकड़ों के आधार पर ही दुर्ग जिला मौसम विभाग की उस टॉप लिस्ट में शामिल है, जहां औसत से ज्यादा बारिश हुई है। जबकि सच्चाई कुछ और ही है।

सावन में भी बारिश नहीं
आषाढ़ और सावन में सबसे ज्यादा बारिश होती है, पर सावन की शुरुआत को भी 6 दिन बीत गए लेकिन अच्छी बारिश नहीं हुई। केवल रिमझिम फुहार ही गिर रही। अभी से खंड वर्षा की स्थिति बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिक पीएल देवांगन ने बताया कि इस साल अच्छे मानसून के संकेत है, लेकिन जिस हिसाब से बंगाल की खाड़ी में सिस्टम नहीं बन पा रहा है उससे लगता है कि अगस्त में बारिश औसत से कम ही होगी।

दो दिन से घने बादल पर बरस नहीं रहे
शहर में दो दिन से लगातार मौसम बदल रहा है। बुधवार को बादल ऐसे छाए कि जैसे खूब बरसेंगे पर एक मिमी भी बारिश नहीं हो सकी। ऐसा ही हाल गुरुवार को रहा। दिनभर बादल छाए रहे पर बरसे नहीं। तीन चार दिनों से ऐसे ही मौसम का हाल है। पिछले एक सप्ताह से कभी-कभार हो रही रिमझिम बारिश भी इतनी कम है कि उसे नापना भी मौसम विभाग के लिए मुश्किल हो गया।

दो मशीन से जिले का आंकलन
मौसम विभाग रायपुर ने दुर्ग जिले के तापमान से लेकर बारिश का आंकड़ा दर्ज करने दो जगह मशीन लगाई है। जिसमें एक बीआईटी दुर्ग और दूसरी धमधा में है। इसी के आधार पर जिलेभर की बारिश दर्ज की जाती है। यहां भी कई बार रिकार्ड लेने वाले लोग भी समय पर मौजूद नहीं होते।

वर्ष बारिश मिमी में
2009 - 32.7 मिमी
2010- 467.6 मिमी
2011 -467 मिमी
2012 467 मिमी
2013- 585 मिमी
2014- 437 मिमी
2015- 186.43 मिमी
2016- 257.8 मिमी
2017- 187 मिमी
2018- 631.2 मिमी