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टिकट कटने से ज्यादा आश्चर्य पैनल में नाम नहीं होने वाले को प्रत्याशी बनाने पर, नए नामों को लेकर बगावत

संभावित दावेदारों ने टिकट नहीं मिलने पर प्रदेश पार्टी मुख्यालय में रविवार को जहां विरोध प्रदर्शन किया, वहीं ब्लॉक स्तर पर हुई बैठकों में कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता पार्टी छोडऩे का ऐलान भी कर दिए हैं।

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टिकट कटने से ज्यादा आश्चर्य पैनल में नाम नहीं होने वाले को प्रत्याशी बनाने पर, नए नामों को लेकर बगावत

भिलाई. भारतीय जनता पार्टी द्वारा छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव के लिए 77 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। प्रत्याशियों के नामों की घोषणा एवं एकमात्र महिला मंत्री सहित 12 विधायकों के नाम कटने के बाद प्रत्याशी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं नामों की घोषणा के बाद जीत हार के गुणा भाग के अलावा निपटने-निपटाने और भितर और खुलाघात की चर्चा तेज हो गई है।

कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता पार्टी छोडऩे का ऐलान भी कर दिए
संभावित दावेदारों ने टिकट नहीं मिलने पर प्रदेश पार्टी मुख्यालय में रविवार को जहां विरोध प्रदर्शन किया, वहीं ब्लॉक स्तर पर हुई बैठकों में कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता पार्टी छोडऩे का ऐलान भी कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा दुर्ग ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र से मंत्री के टिकट कटने और वैशालीनगर विस के प्रत्याशी की घोषणा सूची में शामिल नहीं होने को लेकर हो रही है।

टिकट कटने से ज्यादा जागेश्वर को टिकट मिलने पर अवाक

मंत्री की टिकट काटकर पूर्व मंत्री जागेश्वर साहू को टिकट मिलने से सबको आश्चर्य में डाल दिया है। खुद मंत्री रमशिला साहू अपनी टिकट कटने से ज्यादा जागेश्वर को टिकट मिलने पर अवाक है। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि पैनल में नाम नहीं होने के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने किस आधार पर उनका चयन किया, यह आश्चर्यजनक घटना है। इससे चयन प्रक्रिया पर भी कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं।

कांग्रेसी संस्कृति यहां भी हावी
पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की मानें तो टिकट चयन प्रक्रिया में कथित अनुशासित पार्टी बीजेपी में भी कांग्रेस संस्कृति हावी होती दिख रही है। जिस तरह कांग्रेस में प्रत्याशियों के फाइनल चयन में सिर्फ जीतने वाले कैंडीडेट ही चयन का पैमाना होता है उसी तरह बीजेपी में यह होने लगा है। ऐसे में अब कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि फिर पार्टी की ओर से फाइनल प्रत्याशी चयन के लिए विधानसभा स्तर पर पार्टी कार्यालयों में गुप्त मतदान क्यों कराया गया? क्या गुप्त मतदान दिखावा था। यदि ऐसा नहीं हैं तो जागेश्वर साहू की टिकट कैसे फाइनल हो गई।

वैशाली नगर से अब कौन होगा प्रत्याशी ?
इसी तरह वैशाली नगर विस क्षेत्र के प्रत्याशी के नाम की घोषणा अचानक कैसे रोक दी गई। 77 प्रत्याशियों की सूची में वैशालीनगर सीट भी शामिल बताए जा रहे थे। पेंच कहां फंस गया? बताया जाता है कि पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री सांसद सरोज पांडेय के भाई राकेश पांडेय का नाम लगभग फाइनल हो गया था। विस क्षेत्र के पार्टी पदाधिकारी और बाहरी प्रत्याशी की आड़ में होने वाले संभावित विरोध को देखते हुए घोषणा को टाल दिया गया है। इसी के साथ ही लोगों सहित कार्यकर्ताओं में यह जिज्ञासा बनी हुई हैं कि राकेश नहीं तो कौन यहां से प्रत्याशी होगा। यदि वर्तमान विधायक विद्यारतन भसीन की टिकट कट गई और राकेश का नाम भी फाइनल नहीं हुआ तो पैनल में किसके नाम है। पार्टी के जानकार बताते हैं कि पैनल में राकेश के साथ पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष बृजेश बिजपुरिया का नाम शामिल है। संभवत: पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है।