
रेलवे के रनिंग स्टाफ की छोटे से स्टेशन में ड्यूटी कर दी जा रही साइन ऑफ, काम के घंटों में बड़ी कटौती
चरोदा लॉबी के अधीन में 2000 हैं रनिंग स्टाफ
भिलाई मार्शलिंग यार्ड, चरोदा लॉबी के अधीन काम करने वाले रेलवे के करीब 2000 रनिंग स्टाफ हैं। इसमें चालक, सह चालक व गार्ड शामिल हैं। रेलवे के अधिकारी इन कर्मियों से 13 से 14 घंटे काम करवाने के बाद, उसमें से 1 ले 2 घंटे की कटौती कर रहे है। इससे रनिंग स्टाफ को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनके खून-पसीने की कमाई को पाने के लिए वे संघर्ष की राह पर आ खड़े हैं।
छोटे-छोटे स्टेशन में लगा दिए बायोमैट्रिक
रेलवे अफसरों ने छोटे-छोटे रेलवे स्टेशन में बायोमैट्रिक लगा दिया है। रनिंग स्टाफ को रेलवे स्टेशन में कुछ देर के लिए ड्यूटी साइन ऑफ करवा दी जाती है। इसके एक घंटे बाद, ऑन ड्यूटी कर दिया जाता है। नियम से जब रनिंग स्टाफ ड्यूटी पर चढ़ता है, तो वापस हेडक्वाटर आने से ड्यूटी साइन ऑफ करना चाहिए। दूसरा तरीका यह है कि वह रेलवे के रनिंग रूम में जाए, तब उसकी ड्यूटी साइन आफ हो।
ऐसे करते हैं रेलवे पायलट ड्यूटी
रेलवे पायलट की ड्यूटी क्रू पाइंट से शुरू होती है। छत्तीसगढ़ में क्रू पाइंट भिलाई, भांठापारा, बिलासपुर, डोगरगढ़ में है। रनिंग स्टाफ इन स्थानों से ड्यूटी शुरू करता है। इसी तरह से वहीं आकर खत्म करता है। इस दौरान वह चाहे ट्रेन चला रहा हो, ट्रेन स्टेशन में खड़ी हो या एक ट्रेन को जहां तक निर्देश मिले, वहां तक पहुंचाकर, दूसरी ट्रेन में लौट रहा हो। वापस क्रू पाइंट आने तक ड्यूटी में रहता है।
अफसर ऐेसे कर रहे कटौती
रायपुर रेल मंडल में रनिंग स्टाफ से अधिकारी ड्यूटी पूरी 13 से 14 घंटे तक ले रहे हैं। वहीं उनके काम का आवर्स 12 घंटे ही बन रहा है। अधिकारी काम के घंटे में कटौती करने के लिए, जब चालक रैक लेकर एक स्थान तक पहुंचता है। वहां पर वह ड्यूटी छोडऩे से पहले, दूसरे चालक के आने का इंतजार करता है। तब तक उसे लोको में ही ठहरना है, उस समय को ड्यूटी आवर्स से काट दे रहे हैं। एक चालक अपने क्रू पाइंट हो या रास्ते में, लोको में 1 घंटे बैठकर दूसरे चालक का इंतजार कर रहा है। तब उस 1 घंटे को ऑफ ड्यूटी बता दिया जा रहा है। इस 1 घंटे में उसे लोको छोडऩे की इजाजत नहीं है। तब वह ऑफ ड्यूटी कैसे हो सकता है।
हर माह हो रहा 20,000 रुपए का नुकसान
रनिंग स्टाफ में पायलट से अगर काम करवाने के बाद 1 घंटे कटौती की जाती है। तब माह में इस तरह से 20 घंटे किया जाता है। तब पायलट को 20,000 रुपए का नुकसान होता है। पायलट इस वजह से नाराज है, क्योंकि केंद्र सरकार या रेलवे बोर्ड ने रनिंग स्टाफ के काम के अवर्स में किसी तरह से कटौती करने के आदेश जारी नहीं किया है। इसके बाद भी रेलवे के अधिकारी यह काम कर रहे हैं।
मैसेज उच्चाधिकारियों तक देने की तैयारी
रनिंग स्टाफ इस मामले में चरोदा के लॉबी में प्रदर्शन कर मैसेज रेलवे के उच्चाधिकारियों तक पहुंचाना चाहता है। इससे कम से कम रेलवे अधिकारियों को मालूम हो कि किस तरह से कर्मियों के साथ हो रहा है।
Published on:
15 Feb 2024 08:52 pm
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