
CG की पहली बिकनी फिटनेस मॉडल निशा, जब मर्दो के खेल में आई तो लोगों ने कहा बेटी हो बेटा बनने की कोशिश मत करो
कोमल धनेसर@भिलाई. बॉडी बिल्ंिडग और वह भी बिकनी में..? यह काम लड़कों को शोभा देता है.. बेटी हो बेटा बनने की कोशिश मत करो.. ऐसे कई ताने हैं जो दुर्ग की बेटी निशा भोयर को उस वक्त सुनने मिले थे जब उन्होंने बॉडी बिल्डिंग जैसे खेल में कदम रखा था। बिकनी पहनकर स्टेज पर जाना और फिटनेस मॉडल बनकर मिस छत्तीसगढ़ से लेकर मिस एशिया तक का खिताब जितना आसान नहीं था। बिकनी पहनने से पहले घर वालों को एतराज था। फिर लोगों ने भी खूब ताने मारे पर निशा ने हिम्मत नहीं हारी। छत्तीसगढ़ की पहली मिस इंडिया बिकनी बॉडी बिल्डर बनकर बॉडी बिल्डिंग की दुनिया में कदम रखा और दूसरी युवतियों के लिए प्रेरणा बनी।
देश के लिए गोल्ड जीता
छत्तीसगढ़ के दुर्ग की बेटी निशा ने मिस इंडिया से लेकर साउथ एशिया बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में देश के लिए गोल्ड जीता। पर दक्षिण कोरिया में होने वाली मिस वल्र्ड की प्रतियोगिता में वह इसलिए चूक गई क्योंकि वहां तक पहुंचने उसे कोई स्पांसर नहीं मिला। पर वह अब भी हिम्मत नहीं हारी है और अब अप्रैल में फिर से मिस इंडिया और उसके बाद मिस एशिया बॉडी बिल्डिंग बिकनी मॉडल के लिए तैयारी करेगी। निशा भोयर छत्तीसगढ़ की पहली लड़की है जिसने बॉडी बिल्डिंग जैसे पुरुषों के गेम में अपनी अलग पहचान बनाई। वह छत्तीसगढ़ की पहली महिला हंै जिसने 2018 में महाराष्ट्र के पुणे में इंडियन बॉडी बिल्डिंग और फिटनेस फेडरेशन के सीनियर नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में मिस इंडिया का खिताब जीता। इससे पहले 2017 में इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक ही हासिल कर पाई थी।
एथलीट से बिकनी फिटनेस मॉडल का सफर
निशा स्कूल के दिनों में एथलीट थी, लेकिन 2016 में उसने लड़कियों की बॉडी बिल्डिंग के बारे में सुना और इसमें किस्मत आजमाई। निशा ने बताया कि उसके घर वालों को यह पता था कि वह बॉडी बिल्डिंग कर रही है, लेकिन उसमें क्या पहना जाता है, यह छुपा कर रखा था। जब घरवालों को बिकनी की बात पता चली तो काफी विरोध हुआ, लेकिन धीरे-धीरे मिलने वाले अचीवमेंट ने घरवालों का दिल जीत लिया। लीक से हटकर बॉडी बिल्डिंग के क्षेत्र में आगे बढऩे कड़े संघर्ष के साथ उसका सामना लोगों की उपेक्षा और तानों से भी था, लेकिन कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उसे आगे बढऩे का हौसला दिया। दुर्ग के एक जिम में ट्रेनिंग देते हुए डाइटिशियन और ट्रेनर का कोर्स भी किया। निशा स्वयं के पैरों पर तो खड़ी ही हैं, परिवार के लिए भी सहारा बन गई हैं। क्योंकि पिता मानकृष्ण सरकारी नौकरी में तो थे, लेकिन उनकी कमाई पांच सदस्यों वाले परिवार को चलाने में मुश्किल होती थी।
नौकरी का इंतजार
निशा बताती हैं कि देश के लिए पदक जीतने के बाद भी उसे अब भी नौकरी की तलाश है। रेलवे सहित राज्य के खेल कोटे में पुरुष बाडी बिल्डर्स को नौकरी आसानी से मिल जाती है,लेकिन अब तक महिला बॉडी बिल्डर्स के लिए कोई नौकरी नहीं है। उसका कहना है कि राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में परफार्मेस दिखाना आसान है,लेकिन उस प्रतियोगिता में शामिल होने से पहले उसकी तैयारी में लगने वाली रकम और स्पांसर जुगाडऩा सबसे मुश्किल काम है, और इसी आर्थिक तंगी की वजह से वह पहले भी मिस वल्र्ड जैसी प्रतियोगिता में शामिल होने से चूक गई थी।
Published on:
28 Feb 2021 01:27 pm
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