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छत्तीसगढ़ के धूरा शिल्पकला में रुखमणी है बड़ा नाम, अब मुफलिसी ने घेरा

मिनीमाता समेत मिला अनेक सम्मान,

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भिलाई

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Abdul Salam

Oct 12, 2023

छत्तीसगढ़ के धूरा शिल्पकला में रुखमणी है बड़ा नाम, अब मुफलिसी ने घेरा

छत्तीसगढ़ के धूरा शिल्पकला में रुखमणी है बड़ा नाम, अब मुफलिसी ने घेरा

भिलाई. छत्तीसगढ़ और देश में कला के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाने वाली रुखमणी चतुर्वेदी 49 साल, निवासी रिसाली, मुफलिसी का जीवन जीने को मजबूर हैं। वह 1 सितंबर से बीमार हैं, आर्थिक हालात इतने खराब हैं, कि उनके पास इंसुलिन इंजेक्शन के लिए तक पैसे नहीं है। जरूरत के वक्त में उनके साथ न सरकार खड़ी है और न कलाकार। बुजुर्ग माता-पिता मजदूरी कर बेटी का देखभाल कर रहे हैं। इस कलाकार को न तो शासन से कोई पेंशन मिल रही है और न कोई आर्थिक मदद।

मिनीमाता समेत मिला अनेक सम्मान
प्रदेश में महिला उत्थान के क्षेत्र में रुखमणी ने बेहतर काम किया। 55 हजार महिलाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया। इसमें धुरा शिल्पकला, सिलाई कढ़ाई, गोदना, जूट शिल्प, शीशल शिप्ल शामिल है। मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति के लिए सम्मान किया। इसके लिए 2019 में मिनीमाता सम्मान से सम्मानित किया। इसके साथ उनको 2 लाख रुपए का चेक भी दिया गया था। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल ने महिला शक्ति सम्मान से 5 मार्च 2023 में सम्मानित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली में कबीर कोहिनूर अवार्ड से 2023 में सम्मानित किए।

धूरा शिप्लकला पढ़ा रहे 7 वीं के बच्चों को
रुखमणी चतुर्वेदी ने वेस्ट का बेहतर इस्तेमाल कर किस तरह से उससे शिल्पकला तैयार किया जा सकता है। इसका प्रशिक्षण बच्चों को दिया। यह शिल्पकला इतनी पसंद की गई, कि उसे छत्तीसगढ़ सरकार ने क्लास-7 के एक चेप्टर में शामिल कर लिया है। अब बच्चों को इसे पढ़ाया जाता है।

33 साल से चला रही प्रौढ़ शिक्षा
रुखमणी ने बताया कि वह 1990 से प्रौढ़ शिक्षा पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य उन प्रौढ़ व्यक्तियों को शैक्षिक विकल्प देना है, जिन्होंने मौका गंवा दिया है। अब वे अन्य शिक्षा का अनुभव करते हैं। उनको नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर, रोजगार के लिए रास्ता खोलने का काम कर रही हैं। वे सिलाई कढ़ाई सीख अपना काम कर रहे हैं। इसी तरह से कला के क्षेत्र में लोग आगे बढ़ रहे हैं। इसके साथ-साथ स्व. सहायता समूह तैयार किया। इसके माध्यम से सिलाई कड़ाई, गोदना, जूट शिल्प, शिशल वर्क का प्रशिक्षण दिए। धूरा शिल्प, केले के पत्ते से चित्रकारी सिखा रहे हैं। ग्राम उमर पोटी में जूट शिल्प सिखा रहे हैं।

आर्थिक तंगी में गुजर रहे दिन
उन्होंने बताया कि 1 सितंबर की रात में असहनीय पेट दर्द हुआ। शंकरा हॉस्पिटल में दाखिल किए। वहां 3 बार आईसीयू में दाखिल किए। खर्च बहुत है, आय का कोई जरिया नहीं है। वर्तमान में आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। पति की 2014 में मौत हो चुकी है। बच्चे की उसके पहले। अब माता-पिता का सहारा है। वे भी बुजुर्ग हो चुके हैं। मजदूरी करके पाल रहे हैं। बीमार हो जाने से परिवार के ऊपर आर्थिक संकट आ गया है।