
ऐतिहासिक देवबलौदा के महादेव मंदिर को सेल-बीएसपी ने लिया गोद
भिलाई. 13 वीं शताब्दी के देवबलौदा स्थित शिवमंदिर की कलाकृति को अब सवांरने का समय आ गया है। पिछले कुछ साल के दौरान मंदिर की दीवारों व परिसर में बनी कलाकृतियां अपने आप टूट-फूट रही थी इसको सहेजने के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) व भिलाई इस्पात संयंत्र ने हाथ बढ़ाया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देख-रेख में इसका पुनरुत्थान किया जाएगा। सेल ने इसको लेकर एमओयू किया है। सेल के गोद लेने के बाद यहां कुछ बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मंदिर की दिवारों में बनी कलाकृतियों को सहेजने की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की है। इसके लिए विशेषज्ञों को दूसरे राज्यों से बुलवाया जाएगा। सेल चेयरमैन सोमा मंडल ने भिलाई प्रवास के दौरान इसको लेकर संकेत दिए थे कि जल्द एमओयू हो जाएगा।
भगवान शिव के द्वारपाल नंदी के प्रतिमा में आया दरार
देवबलौदा के इस शिवमंदिर के ठीक सामने भगवान शिव के द्वारपाल नंदी की प्रतिमा है। इस पर भक्त दशकों से जल चढ़ाते आ रहे हैं। करीब दो साल पहले इस प्रतिमा में दरार आ गया। इसके बाद से इस पर झिल्ली चढ़ा दिया गया। ताकि जल चढ़ाने से प्रतिमा को सीधे नुकसान न हो।
मूर्तियां भी टूट-टूट कर गिर रही
मंदिर के दीवार पर भगवान श्रीगणेश की मूर्ति बनी हुई है। जिसे भी झिल्ली से ढक दिया गया है। इस मूर्ति से भी सामने का हिस्सा टूटकर गिर चुका है। इसके दूसरी ओर बनी मूर्ति भी टूट चुकी है। इनको सीधे कोई स्पर्श न करें, जिससे वह फिर वह टूटे, इसको ध्यान में रखते हुए झिल्ली से कव्हर किए हैं। अब इसकी मरम्मत कर वापस भक्तजनों के लिए खोल दिया जाएगा।
कलचुरी काल का है यह मंदिर
देवबलौदा में महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ में भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर कलचुरी काल का है। मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत एक संरक्षित स्मारक है। महाशिवरात्रि के दौरान भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए आस-पास के गांवों से एकत्र होकर यहां पहुंचते हैं। तब मंदिर में भारी भीड़ हो जाती है। लोगों को लंबी कतार लगाने के बाद ही दर्शन करने का मौका मिलता है। भक्तों के लिए सुविधा तब नहीं के बराबर होती है, खासकर बाहर से आने वालों को कुछ देर ठहरने के लिए कोई स्थान नहीं होता।
कर्ण और अर्जुन युद्ध
मंदिर की दीवारों में एक स्थान पर कर्ण और अर्जुन युद्ध का दृश्य है। जिसमें अर्जुन के रथ ध्वज पर हनुमान और कर्ण के धनुष पर प्रतिशोध के लिए तत्पर नागराज अश्वसेन बाण रूप में नजर आ रहे हैं। इसी तरह से कुछ दृश्यों में सुअरों व हिरणों के शिकार को दर्शाया गया है।
मिटते जा रही कलाकृतियां
कलाकृतियां धीरे-धीरे मिट रही है। पत्थर का जो हिस्सा उभरा हुआ है, वह धीरे-धीरे टूट कर गिर रहा है। जिससे कलाकृतियों में किसी घोड़े का पैर तो किसी हाथी का आधा हिस्सा नजर नहीं आता। इसकी वजह से भक्तों को वह कलाकृतियां देखने को नहीं मिल रही है, जो शुरू में बनाई गई थी। इसे पत्थरों में पुन: उकेरना होगा।
बाहर से आएगी टीम
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सेल-बीएसपी से एमओयू के बाद यहां सबसे अहम मूर्तियों के पुर्नउत्थान का काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए एक्सपर्ट दूसरे प्रदेश से आएंगे।
Published on:
21 Dec 2022 08:43 pm
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