
दुर्ग . शहर में धमधा रेलवे फाटक से उरला रेलेवे फाटक तक करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में रेलवे ने सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया है। इस ड़ेढ़ किलोमीटर में रेल पटरी के तरफ घनी झांडियां है और दूसरे तरफ झुग्गी बस्ती है। घनी झांडियां असमाजित तत्वों को अड्डा बना हुआ है। नशापान करते व जुआ खेलने वालों को झाडिय़ों की पीछे मजमा लगा रहता है।
एक दिन पहले ही इसी जगह पर समता एक्सप्रेस पर पत्थर बरसाया गया था। जिसमें कई यात्री चोटिल हो गए थे। दो यात्रियों को राजनांदगांव जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। यह पहली घटना नहीं है। इस जगह इसके पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी है। जिसका खामियाजा मुसाफिरों को भुगतना पड़ता है। कभी ट्रेन पर पत्थर मारना, कभी चैन पुलिंग होने से यात्री परेशान होते हैं।
नशे के कारोबारियो का अड्डा
लोगों का कहना है कि यह जगह नशे के कारोबारियों के लिए सुरक्षित है। नागपुर से ब्राउन शुगर या नशे का अन्य सामान लाने वाले ट्रेन से इसी इलाके में चैन पुलिंग कर या आउटर मे ट्रेन के रूकने पर उतर कर झाडियां में छुप जाते हैं। आउटर की वजह से यहां पर ट्रेन की गती धिमी होती है। इसका फादया असमाजिक तत्व उठाते हैं। स्टेशन में पकड़े जाने का भय रहता है। इसलिए वे आउटर पर सक्रिय रहते हैं।
रेलवे ट्रैक के एक तरफ घनी झाडिय़ां
रेलवे पटरी के एक तरफ प्रेमनगर, दूसरी तरफ शंकर नगर है। प्रेमनगर की तरफ घनी आबादी है। रेलवे पटरी के दोनो तरफ किसी प्रकार की कोई बाउंड्रीवाल भी नहीं है। जिसके कारण भी पटरी पार करके लोग एक तरफ से दुसरी तरफ जाते है। आसपास के लोगों का कहना है कि यहां पर जो कोई नशा करता है वही ऐसी घटना को अंजाम देते है। इसकी सूचना रेलवे पाटक पर तैनात कर्मचारियों को नहीं है। लोगों का कहना है कि रेलवे सुरक्षा बल दुर्ग स्टेशन से उरला फाटक तक गश्त का दायरा बढ़ाना चाहिए।
Published on:
17 Mar 2018 09:04 am
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