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भिलाई से नाता टूटा, रिसाली अब स्वतंत्र नगर निगम, राजपत्र में प्रकाशन के बाद 13 पार्षदों की पार्षदी हुई खत्म

रिसाली नगर निगम शुक्रवार (27 दिसंबर 2019) से स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आ गया। राज्यपाल के प्राधिकार से पृथक रिसाली नगर निगम के गठन की अधिसूचना का राजपत्र में अंतिम प्रकाशन हो गया। (Bhilai News)

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 28, 2019

भिलाई से नाता टूटा, रिसाली अब स्वतंत्र नगर निगम, राजपत्र में प्रकाशन के बाद 13 पार्षदों की पार्षदी हुई खत्म

भिलाई से नाता टूटा, रिसाली अब स्वतंत्र नगर निगम, राजपत्र में प्रकाशन के बाद 13 पार्षदों की पार्षदी हुई खत्म

भिलाई. रिसाली नगर निगम (Risali municipal corporation)शुक्रवार (27 दिसंबर 2019) से स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आ गया। राज्यपाल के प्राधिकार से पृथक रिसाली नगर निगम के गठन की अधिसूचना का राजपत्र में अंतिम प्रकाशन हो गया। इसके साथ ही भिलाई नगर निगम (Bhilai municipal corporation) से रिसाली क्षेत्र के 13 वार्डों का 21 साल से चला आ रहा नाता अब टूट गया। यहां के पार्षदों की पार्षदी भी अब खत्म हो गई है। फिलहाल नए महापौर चुनाव तक कलेक्टर को प्रशासक नियुक्ति किया गया है।

भिलाई नगर निगम को विभाजित कर पृथक रिसाली नगर निगम के गठन का राजपत्र में अंतिम प्रकाशन हो गया। फिलहाल भिलाई निगम के 13 वार्डों को मिलाकर स्वतंत्र रिसाली निगम का गठन किया गया है। इससे पहले राज्य शासन ने नवंबर में राजपत्र में प्रकाशन कर लोगों से दावा-आपत्ति मंगाया था। प्राप्त आवेदनों का निराकरण करने के बाद अब 26 दिसंबर को राजपत्र में अंतिम प्रकाशन किया गया। 27 दिसंबर को राज्यपाल ने इसकी मंजूरी दी।

होगी आयुक्त की नियुक्ति
पूरा सेटअप नियुक्त होने से पहले नवगठित निगम में आयुक्त और फिलहाल काम चलाने अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति शासन के निर्देशानुसार होगी। कलेक्टर चाहे तो भिलाई नगर निगम के आयुक्त को ही अतिरिक्त प्रभार भी सौंप सकते हैं।

अब कलेक्टर ही लेंगे सभी फैसले
छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 5 (1) के तहत कलेक्टर दुर्ग को आगमी आदेश पर्यंत तक प्रशासक नियुक्त किया गया है। अब रिसाली नगर निगम क्षेत्र से संबंधित सभी फैसले कलेक्टर ही लेंगे। किसी भी नगर निगम में महापौर परिषद और सामान्य सभा को मिलने वाले सभी अधिकार कलेक्टर के पास रहेंगे। आयुक्त की नियुक्ति होने पर वे 50 लाख तक के विकास कार्यों को मंजूरी दे सकेंगे। इससे अधिक व 5 करोड़ तक के कार्यों को अब कलेक्टर अनुमोदित करेंगे। इससे अधिक के कार्यों व खर्च की स्वीकृति राज्य शासन देगा।

पार्षदी खत्म, एल्डरमैन पद पर बने रहेंगे
रिसाली नगर निगम क्षेत्र के 13 पार्षदों वार्ड-40 ममता बाग, वार्ड-41 संजू साहू, वार्ड-42 गोविंद चतुर्वेदी, वार्ड-43 नरेश कोठारी, वार्ड-44 राजू मंडावी, वार्ड-45 केशव कुमार बंछोर, वार्ड-58 भूपेश ठाकुर, वार्ड- 59 चंद्रभान, वार्ड-60 चुम्मन देशमुख, वार्ड- 61 मोनिका जितेंद्र चंद्राकर, वार्ड-62 रंग बहादुर, वार्ड-63 राजेंद्र रजक और वार्ड-39 भैरों सिंह सोनवानी अब पार्षद नहीं रहेंगे। रिसाली क्षेत्र में निवास करने वाले दो एल्डरमैन संगीता सिंह और तरुण बंजारे की नियुक्ति चंूकि राज्य शासन की ओर से भिलाई नगर निगम के लिए हुई है, इसलिए वे अपने पद पर बने रहेंगे।

ताम्रध्वज की घोषणा, एमआईसी सदस्यों ने उठाई आवाज
नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भिलाई से पृथक कर रिसाली को स्वतंत्र नगर निगम बनाने की घोषणा की थी। भिलाई नगर निगम के महापौर परिषद फिर सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जाना था। महापौर परिषद में प्रस्ताव लटकता देख केशव बंछोर और नरेश कोठारी ने स्वयं परिषद का हिस्सा होने के बाद भी नाराजगी जताई। यहां तक कि बैठक में शामिल होने से भी इनकार कर दिया था।

इसके बाद बंछोर के समर्थन में रिसाली क्षेत्र के सभी पार्षद और राजनीतिक कार्यकर्ता आ गए थे। बंछोर ने कहा कि साडा के विघटन के समय से रिसाली को पृथक नगर निगम बनाने की मांग हो रही थी। मंत्री ताम्रध्वज साहू ने क्षेत्रवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखकर इसके लिए सार्थक पहल की और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इसे सहर्ष मंजूरी दे दी। 27 दिसंबर को रिसाली स्वतंत्र अस्तित्व में आ गया।

अधिनियम के अनुसार नगर निगम गठन के लिए न्यूनतम 40 और अधिकतम 70 वार्ड व पार्षद होना अनिवार्य है। ऐसे में 13 पार्षदों का निर्वाचन मान्य नहीं किया जा सकता। अब शासन क्षेत्र का परिसीमन कर नए सिरे से वार्ड संरचना करेगा। इसके बाद पार्षदों का निर्वाचन होगा। अब देवेंद्र यादव का भी महापौर के रूप में रिसाली क्षेत्र से कोई संबंध नहीं रहा।

दिसंबर 2020 में भिलाई, चरोदा के साथ हो सकता है चुनाव
परिसीमन से आबादी व क्षेत्र के अनुसार वार्ड संरचना कर शासन कभी भी नवगठित निगम का चुनाव करा सकता है, लेकिन प्रक्रिया में कम से कम चार-पांच महीना लगेगा ही। तब तक भिलाई व चरोदा निगम चुनाव की भी प्रशासनिक तैयारी शुरू हो जाएगी। दिसंबर 2020 में चुनाव हो सकते हैं।