
IED ब्लास्ट में SSB जवान ने खोई एक आंख, ब्रेन का भी हुआ ऑपरेशन फिर भी देश सेवा का जज्बा बरकरार, पढि़ए शंकर की कहानी
भिलाई. वह 14 जनवरी का दिन था। हम शाम को पैदल अपने कैम्प की ओर वापस आ रहे थे। तभी अचानक ब्लॉस्ट की आवाज आई और बस खुद को हवा में उछलता पाया। बस इतना समझ आया कि मुझे कुछ हुआ पर क्या यह पता नहीं...पर जब पूरी तरह होश आया तो खुद को ICU में पाया। उस ब्लास्ट में मैंने अपनी एक बाई आंख खो दी, ब्रेन की सर्जरी भी हुई और कई छोटे ऑपरेशन भी हुए पर मैं अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो गया हूं और अब जल्द ही ठीक होकर अपनी ड्यूटी पर वापस लौटूंगा। चेहरे पर मुस्कान लिए SSB के जवान के शंकर ने जब हल्की सी आवाज में यह कहा तो पास बैठी उसकी पत्नी ने उसके हाथ को थामकर अपनी मौन सहमति भी दी।
डॉक्टरों ने किया जज्बे को सलाम
इसी घटना में घायल दूसरा जवान योगेन्द्र बालियान भी गंभीर स्थिति में आया था आंखों में चोट कम होने की वजह से उसकी दोनों आंखे बच गई पर उसे भी ऑपरेशन के कई दौर से गुजरना पड़ा और अब वह भी पूरी तरह ठीक है। सोमवार को जब शंकर की अस्पताल से छुट्टी हुई तो उनके जज्बे को सलाम करने स्पर्श हॉस्टिपल के डॉक्टर के हाथ भी अपने आप उठ गए। जवान से मिलने पहुंचे एसएसबी भिलाई सेक्टर के डीआईजी सुधीर कुमार, कमाण्डेंट अशोक कुमार ठाकुर और सीएमओ डॉ. विवेक ने भी उसका हौसला बढ़ाया।
DIG ने बढ़ाया हौसला
इस मौके पर डीआईजी सुधीर कुमार ने कहा घटना के बाद जवानों को तत्काल बेहतर इलाज उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिका थी। यूनिट के डॉक्टरर्स ने सीमित साधनों में जीवन बचाने के शुरुआती प्रयास तो कर दिए लेकिन उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी था और उनके इस गोल्डन अवर में उनके सामने स्पर्श हॉस्टिपल से बेहतर कोई विकल्प नहीं नजर आया। यहां दाखिले से ले कर सर्जरी तक का उनका फैसला आज सही साबित हुआ।
जवान के आने से पहले ही टीम तैयार
स्पर्श अस्पताल के डॉक्टर संजय गोयल, डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि घायल जवानों की सूचना मिलते ही 9 डॉक्टर्स की टीम उन्हें रिसीव करने पूरी तरह तैयार थी। करीब 10 बजकर 15 मिनट पर उनके पहुंचते ही उन्हें ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया। जहां उनके मल्टीपल फैक्चर, ब्रेन फैक्चर को देख तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया गया।
न्यूरोसर्जन डॉ. आदर्श तिवारी ने बताया कि ब्लॉस्ट की वजह से शंकर की बाई आंख बाहर निकल चुकी थी और दायी आंख को बचाने उन्हें एक आंख निकालनी पड़ी। वहीं ब्रेन के बाए हिस्से में अंदर छर्रे से लेकर बजरी, कंकड बुरी तरह फंसे थे जिसकी वजह से ब्रेन की एक हड्डी को भी बाहर निकालना पड़ा। उन्होंने बताया कि चंद महीने बाद शंकर का एक और ऑपरेशन होगा जिसमें उसके ब्रेन में आर्टिफिशियल बोन लगाया जाएगा।
इस तरह का पहला मामला
डॉ. संजय गोयल और डॉ. सांवत ने बताया कि आईईडी ब्लॉस्ट से इस तरह गंभीर हुए जवानों के इलाज का उनके अस्पताल में यह पहला मामला था। उन्हें देखकर लगा कि देश के यह जवान हमारे लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं और इस स्थिति में उनके जज्बे को देख वे खुद हैरान थे। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद शंकर को दो दिन वैंटिलेटर और सात दिन आईसीयू में रखा गया और अपने आत्मबल से वे जल्दी रिकवर होने लगे।
यह थी डॉक्टर्स की स्पेशल टीम
इन जवानों की जान बचाने में स्पर्श मल्टीस्पेशल्टिी हॉस्पिटल की टीम में डॉ संजय गोयल, डॉ. सामंत, डॉ. दीपक वर्मा, डॉ. दीपक कोठारी, डॉ. आदर्श तिवारी, डॉ. गुंजन भाटिया, डॉ. लिफो डेनियल, डॉ. समीर करहाले, डॉ. सुप्रिया शामिल थे।
Published on:
15 Feb 2022 12:39 pm
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