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बाबा मुझे माफ कर देना, साथ जीने-मरने का वादा किया, साथ-साथ जा रहे दुनिया से, आखिरी खत के साथ निकली घर से चार लाश

अशोक प्रजापति का पूरा परिवार खत्म हो गया। उसने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया अभी वजह स्पष्ट नहीं है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 19, 2017

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भिलाई. अशोक प्रजापति का पूरा परिवार खत्म हो गया। उसने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया अभी वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस भी कह रही है जांच के बाद ही पता चलेगा, मगर डायरी के पन्ने में लिखी जमीन के कागजात और पैसे संबंधी बातें कई इशारे कर रहे हैं।

पड़ोस में रहने वाली 14 साल की शबाना रोज की तरह सुबह करीब पौने नौ बजे खेलने के लिए अशोक के घर गई। वह काफ ी देर तक दरवाजा खटखटाती रही, मगर किसी ने न तो दरवाजा खोला और न ही भीतर से कोई आवाज आई। शबाना ने जाकर अपनी मां को यह बातें बताई। सुबह इतने देर तक पूरा परिवार कैसे सोए रह सकता है, पड़ोसियों को भी आशंका हुई।

पास ही रहने वाले अशोक के छोटे भाई अजीत प्रजापति के घर खबर दी। अजीत काम पर जा चुका था। उसकी पत्नी ममता दौड़े-दौड़े आई। पड़ोसियों ने जोर से धक्का देकर दरवाजा खोला। देखा तो दंग रह गए। अशोक का शव सामने ही लटक रहा था। भीतर का दृश्य तो और भी दिल दहला देने वाला था। बिस्तर पर मां गनेश्वरी और दोनों मासूम बच्चों रागिनी और सागर के शव ऐसे पड़े थे मानो सो रहे हों।

यह देख सभी के रोंगटे खड़े हो गए। ममता अपनी जेठानी गनेश्वरी और मासूमों को हिलाती- डुलाती रही मगर उनकी सांसें तो पहले ही थम चुकी थीं। पड़ोसियों ने वार्ड पार्षद दिवाकर भारती को सूचना दी और फिर दिवाकर ने पुलिस को
सूचना दी।

घटना के दबी जुबान होती रही जमीन, मकान और बाइक की चर्चा
अंतिम संस्कार के दौरान राजनांदगांव के छुरिया से आए गनेश्वरी के परिजन के बीच दबी जुबान जमीन, मकान और मोटर साइकिल की चर्चा होती रही। इसी बात का उल्लेख अशोक ने भी अपने सुसाइडल नोट में किया है। संग्राम चौक पर जिस मकान में अशोक रहता था उसे उनके ताऊ ने खरीदा है। उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ में भी 5 लाख रुपए की जमीन खरीदने की बात सामने आई है। सभी कागजात अशोक के पास ही था। उसने अपनी मोटर साइकिल भी छोटे भाई अजीत के यहां रख दी थी जहां ताऊ रहते थे।

पिता ने दूसरी शादी कर ली थी, ताऊ ने पाला पोसा

अशोक और उसके छोटे भाई अजीत का पालन पोषण ताऊ लौटन राम प्रजापति जिन्हें वे प्यार से दादा कहते थे, ने किया था। लौटन ने बताया कि वे वर्ष १९५९ में आजमगढ़ उत्तर प्रदेश से भिलाई आए। अशोक के पिता अभिराम प्रजापति ने अशोक, अजीत और उसकी मां को छोड़ कर दूसरी शादी कर ली। उस समय अशोक चार साल का था। इसके बाद दोनों भाइयों का पालन पोषण लौटन ने ही किया। अशोक का शव देखते ही वे फफककर रो पड़े।

बेड पर सिराहने के बगल में मोबाइल और छोटी सी डायरी में सुसाइडल नोट मिला। जिसमें अशोक ने लिखा था कि जीना साथ था, मरना साथ था। हमने मिलकर यह फैसला लिया है। इसमें किसी का दोष नहीं है। इसे लेकर किसी को परेशान न किया जाए।

मर्जी से की थी शादी
अशोक ने प्रेम विवाह किया था। छह साल पहले अशोक अपने एक दोस्त की शादी में राजनांदगांव गया था। वहां शादी समारोह में गनेश्वरी से मुलाकात हुई। अशोक की शादी ममता से तय हो चुकी थी। उसने मर्जी से शादी की थी।
घटना के बाद मोहल्ले में लगी भीड़ में एक महिला स्व सहायता समूह से 48 हजार रुपए कर्ज लेने की भी चर्चा होती रही। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। कहीं ऐसा तो नहीं समूह के लोग द्वारा तकाजे करते रहें होंगे। यह अभी पुलिस जांच का विषय है।

कभी लड़ते झगड़ते नहीं सुना
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दोनों पति- पत्नी को कभी बहुत लड़ते झगड़ते नहीं देखा। छोटी-मोटी बात तो हर परिवार में होते रहता है। अशोक अपनी पत्नी को बहुत चाहता था। न जाने अचानक क्या बात हुई की उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया।लडला था। घर के पेपर आलमारी में है। रानी के बड़े पर्स में कुछ पैसे रखे हैं। बाबा मुझे माफ कर देना। बेड पर सिराहने के बगल में मोबाइल और छोटी सी डायरी में सुसाइडल नोट मिला। जिसमें अशोक ने लिखा था कि जीना साथ था, मरना साथ था। हमने मिलकर यह फैसला लिया है। बाबा मुझे माफ कर देना।