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सांसद से लेकर कलेक्टर तक सबने चेताया, विधानसभा में मुद्दा बना फिर भी BSP का दावा झूठा, टाउनशिप में अब भी गंदे पानी की सप्लाई

Bhilai steel plant टाउनशिप के लोगों को केवल एक समय के पानी से काम चलाना पड़ता है। लोग तो पानी खरीदकर पी ही रहे हैं अब अब प्रेशर कम होने से निस्तारी में भी दिक्कतें हो रही है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Aug 16, 2021

सांसद से लेकर कलेक्टर तक सबने चेताया, विधानसभा में मुद्दा बना फिर भी BSP का दावा झूठा, टाउनशिप में अब भी गंदे पानी की सप्लाई

सांसद से लेकर कलेक्टर तक सबने चेताया, विधानसभा में मुद्दा बना फिर भी BSP का दावा झूठा, टाउनशिप में अब भी गंदे पानी की सप्लाई

भिलाई. टाउनशिप की डेढ़ लाख आबादी चार महीने से गंदा पानी पी रही है। इसका असर जलजनित संक्रामक रोगों के रूप में अब दिखने भी लगा है। लोग डायरिया और पेट सबंधी अन्य गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। दूषित पानी पीने से होने वाले रोग पीलिया के भी कुछ केस सामने आए हैं। बावजूद भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति को लेकर गंभीर नहीं है। पहले नाल्को को पानी साफ करने का ठेका दिया गया। परिणाम आशाजनक नहीं रहा तो शहर की ही एजेंसी केमबॉन्ड को काम सौंपा। दोनों एजेंसी के काम को परखने के बाद अब तीसरी एजेंसी आयन एक्सचेंज का टाउनशिप में साफ पानी आपूर्ति का जिम्मा सौंपा है। बीएसपी के जलकार्य विभाग के अधिकारी विजय शंकर राय ने गुरुवार का दावा किया था कि नई एजेंसी उन्नत तरीके से पानी को उपचारित करेगी।

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केमिकल डोजिंग का तरीका बदलकर एजिटेटर के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इसका असर शुक्रवार दोपहर तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में दिखने लगेगा और इसके अगले दिन यानि शनिवार को लोगों के घरों में साफ पानी पहुंचेगा। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। पानी पहले की तरह की दूषित तो है ही, कुछ दिनों नलों में प्रेशर भी कम हो गया है। टाउनशिप के लोगों को केवल एक समय के पानी से काम चलाना पड़ता है। लोग तो पानी खरीदकर पी ही रहे हैं अब अब प्रेशर कम होने से निस्तारी में भी दिक्कतें हो रही है।

जिला प्रशासन बेबस, नगर निगम लाचार जनता गंदा पानी पीने आज भी मजबूर
पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपनी जवाबदारी निभाने के बजाए, केवल प्रशासन पर गलती थोपता रहा। इधर कलेक्टर ने भी चि_ी लिखकर खानापूर्ति कर ली। नगर निगम प्रशासन का भी कुछ ऐसा ही हाल है। नोटिस भेजकर मान लिया कि सब कुछ ठीक हो गया। सांसद विजय बघेल और भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव भी केवल दौरा, बैठक और निर्देश देकर बेखबर हो गए। जबकि यह विकराल समस्या आज भी मुंहबाए खड़ी है।

सांसद जी, आपकी चर्चा, हिदायत का नतीजा कुछ नहीं निकला
सांसद विजय बघेल ने 27 अप्रैल को व्यवस्था सुधारने के निर्देश बीएसपी प्रबंधन को दिए थे। कहा था कि यह प्रशासनिक चूक और बड़ी लापरवाही है। पहले दिन से इसे दुरुस्त करने में बीएसपी व प्रशासन को लग जाना था। बाद में 3 जून को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा किया। तब कहा था कि आरोप-प्रत्यरोप का नहीं, शहर में स्वच्छ पानी की सप्लाई के लिए पहल करने की जरूरत है।

विधानसभा में मुद्दा उठाया लेकिन पानी तो साफ नहीं हुआ देवेंद्र जी
विधायक देवेंद्र यादव ने 29 जुलाई को विधानसभा में गंदे पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि बीएसपी लगातार गंदा पानी सप्लाई कर रहा है। इस्पात मंत्री और सेल चेयरमैन तक से मिला। बावजूद गंदे पानी की समस्या से लोगों को निजात नहीं मिल पाई है। सेल-बीएसपी प्रबंधन इसका समाधान क्यों नहीं चाहता यह समझ से परे है। उन्होंने सरकार से कार्रवाई करने की मांग की।

कलेक्टर साहब आपकी चि_ी का कुछ असर तो हुआ नहीं
कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने 14 जुलाई को बीएसपी प्रबंधन को पत्र लिखा। कलेक्टर ने कहा था कि प्रबंधन को चाहिए कि समस्या की जड़ पर काम करें। फिल्टर प्लांट को अपडेट करें। इसके पूरे होने तक ऐसा सिस्टम तैयार करे जिससे लोगों को साफ पेयजल मिल सके। टाउनशिप के परिवारों के प्रति बीएसपी प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी है। जब तक ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जाएंगे, नागरिकों में असंतोष बना रहेगा।

निगम आयुक्त जी क्या आप महामारी का इंतजार कर रहे हैं
भिलाई निगम के आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने 29 मई को प्रबंधन को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि सप्लाई होने वाला पानी अशुद्ध है। इसकी टर्बिडिटी अधिक है। पानी का रंग मटमैला है। इसे तत्काल सुधारें नहीं तो महामारी एक्ट 1987 यथा संशोधित 2020 प्रदत्त शक्तियों के तहत बीएसपी पर कार्रवाई की जाएगी।