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भिलाई

ग्रामीण खिलाडिय़ों की पुकार दिल्ली ने सुनी, आंखों में तैरते सपने को मिला उम्मीदों का सागर

सोमवार को भारतीय खेल प्राधिकरण की टीम पुरई गांव पहुंची। इस टीम के आने ने पुरई के बच्चों की उम्मीदों को पंख लगा दिए। सुबह से उनका इंतजार हो रहा था।

भिलाईNov 28, 2017 / 10:58 am

Dakshi Sahu

patrika
भिलाई. आखिर जिन तैराकों की बात भिलाई के खेल संघों और दुर्ग के प्रशासन ने नहीं सुनी, उनकी पुकार दिल्ली ने सुन ली। वहां से सोमवार को भारतीय खेल प्राधिकरण की टीम पुरई गांव पहुंची। इस टीम के आने ने पुरई के बच्चों की उम्मीदों को पंख लगा दिए। सुबह से उनका इंतजार हो रहा था।
इस बीच टीम भिलाई पहुंची तो यहां बच्चों का ट्रायल स्विमिंग पूल में कराने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन प्राधिकरण की टीम में शामिल स्विमिंग की नेशनल कोच ने साफ कह दिया कि वे गांव जाकर वहां के हालात भी देखेंगी। दरअसल, टीम बच्चों में से प्रतिभावान तैराकों का चयन करेगी, साथ ही इनके जल सत्याग्रह की वजह और जिस तालाब में तैराकी सीखकर इन्होंने पहचान हासिल की, उसकी असलियत बताने रिपोर्ट भी तैयार करेगी। यह रिपोर्ट केंद्र व राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।
पुरई गांव के तालाब में तैरते हुए यहां के प्रतिभावान बच्चों ने तैराकी में जिले का ही नहीं पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया। इन बच्चों को जो पहचान मिली वो इनकी अपनी कोशिशों का नतीजा थी। लेकिन इनकी तैराकी को निखारने की बजाय उस तालाब को ही गंदा कर दिया गया। यह तालाब में गंदगी जाने से परेशान थे।
पंचायत ने नहीं सुनी तब पत्रिका ने इनकी पीड़ा समझी और इस मुद्दे को सामाजिक सरोकार के तहत सामने लाया। ग्रामीणों ने साथ दिया और यह तैराक जल सत्याग्रह पर बैठे। मामला सुर्खियां बना तो दिल्ली से भारतीय खेल प्राधिकरण की टीम देश के लिए इनमें से बेहतर तैैराकों का चयन करने पहुंची।
बच्चों की तैराकी का ट्रायल करीब एक घंटा चला। राष्ट्रीय कोच ने कहा कि सिर्फ तैराकी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने बड़े ग्राउंड की जानकारी मांगी। ग्रामीणों ने शासकीय शाला का जिक्र किया। प्राधिकरण की दोनों अधिकारी बच्चों को अपनी गाडिय़ों में लेकर वहां पहुंची। सबसे पहले बच्चों का वजन और ऊंचाई नापी।
कोच ने किसी भी बच्चे को मायूस नहीं किया। उन्हें सौ मीटर के रेस ट्रेक पर दौड़ लगवाई। बिना थके दौड़ लगाते बच्चों को देखकर खुशी जताई। फिजिकल टेस्टके बाद मोटल एबीलिटी टेस्ट लिया। ३० मीटर फ्लाई रन कराया। हर टेस्ट की जानकारी दी फिर फील्ड पर उतारा। बच्चों को वर्टिकल जंप बास्केट बॉल थ्रो कराया। इस सबके बाद फिर लंबी दौड़ के लिए तैयार किया।
७ साल के बच्चों से लेकर दिव्यांग कैटेगरी में आने वाले अंडर-१९ तैराकों का ट्रायल लिया गया। तालाब में अभ्यास के बाद भी तैराकी की प्रोफेशनल स्कि ल देख प्राधिकरण की राष्ट्रीय स्वीमिंग कोच दुर्गेश नंदिनी ने इनकी खूब तारीफ की। सबसे अच्छा लम्हा वह रहा जब राष्ट्रीय कोच ने गांव की लड़कियों के नेशनल मेडल व तैराकी का हुनर देख गर्मजोशी से उनका हौसला बढ़ाया। सुविधाओं के बगैर तैराकी करने वाली एक छात्रा को राष्ट्रीय कोच ने स्वीमिंग कैप भी दिया। टीम ने गांव के ३९ तैराकों का ट्रायल लिया। सभी ने काबिलियत दिखाई।
ओम ओझा ने गांव में बच्चों को प्र्रशिक्षित कर राष्ट्रीय स्तर का तैराक बनाया। उन्होंने बताया कि बच्चों को तैराक बनाने वाले युवा ओम ओझा के जुनून को टीम ने सलाम किया। ओम वर्ष २००९ से बच्चों को तैराकी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे खुद राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं। उनकी बदौलत गांव के ७० से अधिक बच्चों ने राज्य व राष्ट्रीय स्पर्धा में ३० से ज्यादा गोल्ड, सिल्वर व ब्राउंज मेडल जीत पुरई को पहचान दिलाई।

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