
Video: स्वाइन फ्लू से भिलाई में पहली मौत, लापरवाही ऐसी कि स्वाब के नमूने की जगह ले रहे ब्लड सैंपल
भिलाई. शहर के एक निजी अस्पताल में दाखिल स्वाइन फ्लू से पीडि़त रामप्रसाद गुप्ता की शनिवार को मौत हो गई। सेक्टर 6 निवासी रामप्रसाद गुप्ता को 10 जनवरी से अस्पताल में दाखिल कराया गया था। जहां उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। स्वाइन फ्लू के लिए दुर्ग जिला संवेदनशील है। बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करना तो दूर, एडवाइजरी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सैंपल लेने का तरीका नहीं मालूम
स्वास्थ्य विभाग ने जिन पैरामेडिकल स्टाफ को निगम की टीम के साथ भेजा है। उनमें से अधिकतर लोगों को सैंपल लेने के तरीके ही मालूम नहीं है। ब्लड से सैंपल एकत्र कर रहे हैं। खुर्सीपार, छावनी, सुपेला और सेक्टर-४ में सर्वे किया। खुर्सीपार में स्वास्थ्य शिविर लगाकर सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत पर स्लाइड बनाई गई। गाइडलाइन के मुताबिक स्वाइन फ्लू के लक्षण के अनुसार तीन कैटेगिरी में बांटा गया है।
तीन में से केवल सी केटेगिरी वाले मरीज का ही सैंपल लेकर जांच क लिए भेजना है, लेकिन निगम के कर्मचारियों के साथ घरों में दस्तक देने वाली स्वस्थ्य विभाग की टीम को इसकी जानकारी नहीं है। सर्दी, खांसी और बुखार के अनुसार स्लाइड बना रहे हैं। सैंपल को मेडिकल कॉलेज भेजा रहा है। चिकित्सकों या प्रशिक्षित टीम की कमी की स्थिति में बीमारी से पीडि़त व्यक्ति की पहचान पाना मुश्किल हैै। स्थिति बिगडऩे पर कंट्रोल में करना भी मुश्किल होगा।
ये है तीन कैटेगरी
ए- सर्दी खांसी के अलावा नाक से पानी बहना
बी- गले में खराश, बुखार, के साथ सर्दी खांसी, व दर्द की तकलीफ
सी- सांस लेने में तकलीफ, बैचेनी होना, घबराहट, होने के साथ ही ए और बी कैटेगिरी के लक्षण हो।
ऐसे लेना है सैंपल
सी कैटेगिरी लक्षण वाले व्यक्ति का सैंपल टेक्नीशियन या फिर डॉक्टर को लेना है। मरीज के मुंह के अंदर पाइप डालकर गले से स्वाब का नमूना लेना है।
इसलिए उठ रहे सवाल
2017 में जुलाई से अगस्त के बीच स्वाइन फ्लू से चार लोगों की मौत हुई थी। तब संचालनालय स्वास्थ्य विभाग ने शासकीय अस्पताल, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम संचालकों को स्वाइन फ्लू,ू सर्दी खांसी, बुखार की पहचान और बचाव को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। बावजूद अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सर्वे टीम को इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
नहीं मिला सोर्स- रामप्रसाद को स्वाइन फ्लू कैसे हुआ था इसका पता आखिर तक नहीं चला पाया। सीएचएमओ की टीम ने लगातार तीन दिनों तक पीडि़त के परिवार से पूछताछ की थी। संभावना जताई जा रही है कि ऑटो रिक्शा में ही बैठी किसी सवारी से वायरस आए होंगे।
सेक्टर-9 में रिपोर्ट से पहले इलाज
सेक्टर 9 में दाखिल स्वाइन फ्लू के संदिग्धों की रिपोर्ट आने के पहले ही इलाज शुरू कर दिया। डॉक्टर ने कहा रिपोर्ट के इंतजार में काफी समय बीत जाता है, इसलिए उन्हें प्राइमरी दवाइयां लक्षण के हिसाब से दे दी गई है। हालांकि चोवाराम की स्थिति पहले से काफी बेहतर हो चुकी है। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब उनका इलाज सामान्य मरीजों की तरह किया जाएगा।
156 घरों में किया सर्वे
्स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को सेक्टर-4 के 90 और खुर्सीपार के 156 घरों का सर्वे किया। सेक्टर 6 में सुपरविजन किया। यहां एक भी संदिग्ध नहीं मिला एहतियातन लोगों को स्वाइन फ्लू के लक्षण और बचाव की जानकारी दी गई है। गुरुवार से डेंगू के संदिग्ध आधा दर्जन मरीज जिला अस्पताल में भर्ती है। महापौर चंद्रिका चंद्राकर शनिवार को जिला अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य के बारे में पूछा। प्रसूत वार्ड में डेंगू प्रभावित महिला बोरसी निवासी संतोषी महिलांगे से मुलाकात की।
महापौर ने डेंगू प्रभावित मरीजों के उपचार संबंधी जानकारी सिविल सर्जन डॉ. केके जैन से ली। शुक्रवार की स्थिति में छह मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने संतोषी महिलांगे की हालत को बेहत्तर बताया। जल्द छुट्टी देने की जानकारी दी। जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग चंद्रशेखर चन्द्राकार, दिनेश देवांगन,शिवेंद्र परिहार,विजय जलकारे,गायत्री साहू, दिलीप साहू, डॉ देवनारायण तांडी, विशंकर ढीमर,आदि लोग उपस्थित थे।
Published on:
20 Jan 2019 12:58 pm
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