
54 हजार की आबादी को कव्हर करने वाली यूपीएचसी का हाल
भिलाई. यूपीएचसी, दादर यहां की करीब 54 हजार की आबादी को कव्हर करती है। आसपास के बहुत से मरीज हर माह गैर-संचारी रोग (एनसीडी) के तहत पंजीकृत हैं। वे यहां आकर हर माह बीपी, शुगर व दूसरी बीमारियों का जांच करवाते हैं। यहां से जांच करवाने के बाद उनको माहभर की दवा दी जाती है। पिछले करीब दो माह से यूपीएचसी, दादर में आने वाले मरीजों की जांच तो की जा रही है, लेकिन मरीजों को बीपी की एम्पोडिपीन और शुगर की दवा रेग्यूलर नहीं मिल रही है। यह दवा उनको जेनेरिक मेडिकल सेंटर से लेनी पड़ रही है।
योजना पर उठ रहे सवाल
गैर-संचारी रोग जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने एनसीडी प्रोग्राम चला रखा है। इसमें मरीजों को बुलाकर हर माह जांच किया जाता है कि उसका रक्तचाप बढ़ रहा है या घट रहा है। उच्च कोलेस्ट्रॉल कितना है। वजन में कमी तो नहीं आ रहा है। योजना हर सरकारी अस्पताल में चल रही है, उससे जुड़ी दवा जो एक-एक मरीज को माह में 30-30 देना पड़ती है। वह कम क्यों पड़ रही है। हर माह दवा लेकर जाने वाले मरीज खाली हाथ लौट रहे हैं, लेकिन नाम इस वजह से नहीं बताना चाहते क्योंकि अगले माह फिर उस अस्पताल में ही उनको जाना है।
बाहर से ला रहे पानी
अस्पताल में वाटर फिल्टर मशीन लगी है, लेकिन वह बंद है। जिसकी वजह से अस्पताल के कर्मचारी खुद बाहर से लाकर पानी पी रहे हैं। भीषण गर्मी में यूपीएचसी आने वाले मरीजों को ठंडे पानी की तलब होती है, जो यहां नहीं मिल पा रहा है। यहां बड़ी संख्या में डिलीवरी से पहले जांच कराने मरीज पहुंचते हैं। गर्मी में पानी के लिए वे भी इधर-उधर भटक रहे हैं।
क्लॉस-4 कर्मी की कमी
यूपीएससी, दादर में क्लॉस-4 कर्मी की कमी है। क्लॉस-4 का सिर्फ एक कर्मचारी है, यहां कम से कम दो कर्मचारी होना चाहिए। इसकी वजह से कई काम बाधित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दूसरे कर्मचारी को नहीं दिए जाने की वजह से अस्पताल में अव्यवस्था भी नजर आती है। चिकित्सक कक्ष में बिना अनुमति के लोग प्रवेश कर जाते हैं। इससे भीतर जांच करवा रही महिलाओं को दिक्कत हो जाती है।
कौन करे मरहम पट्टी, बिना ड्रेसर के चल रही यूपीएचसी
इस यूपीएचसी में ड्रेसर नहीं है। छोटी चोट वाले आते हैं तो उनका नर्सिंग स्टॉफ पट्टी कर देते हैं। इसी तरह से अगर चिकित्सक की मौजूदगी में घायल आते हैं तो वे खुद भी मरहम पट्टी कर देते हैं। ड्रेसर की कमी यहां नजर आती है।
रात में जरूरत है सुरक्षा कर्मियों की
यूपीएचसी में रात के वक्त ड्यूटी करना आसान नहीं है। नर्सिंग स्टॉफ को इससे परेशानी होती है। रात में सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी की जरूरती है।
दवा हमेशा रहे इसके लिए सीएमएचओ से की जाएगी चर्चा
निर्मल कोसरे, महापौर, नगर पालिक निगम, भिलाई-चरोदा ने बताया कि दवा हमेशा रहे इसके लिए सीएमएचओ से चर्चा की जाएगी। लोगों के लिए दादर के यूपीएचसी में नियमित तौर पर दवा उपलब्ध रहे ऐसा इंतजाम करवाया जाएगा। रात में सुरक्षा व्यवस्था अस्पताल की पुख्ता रहे, इसके लिए क्या बेहतर हो सकता है उस संबंध में संबंधित अधिकारी से चर्चा की जाएगी।
मरीज को लौटाना नहीं है बिना दवा दिए
डॉक्टर जेपी मेश्राम, चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग ने बताया कि दवा उपलब्ध करवाने के लिए अलग-अलग व्यवस्था है, स्टोर से नहीं मिल रही है तो सीएमएचओ दफ्तर से ले सकते हैं। वर्ना लोकल पर्चेस कुछ दिनों के लिए किया जा सकता है। पर मरीज को बिना दवा के लौटाना नहीं है। दादर में किल्लत है तो दूर की जाएगी।
Published on:
27 Apr 2022 09:52 pm
बड़ी खबरें
View Allभिलाई
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
