
भिलाई. नगर पालिक निगम भिलाई के वैशाली नगर जोन में पदस्थ कार्यपालन अभियंता टीके रणदिवे को कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के निर्देश पर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने ट्रैफिक सिग्नल के अनियमितता के मामले में निलंबित कर दिया है। 8 सितंबर को रणदिवे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्हें 3 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने कहा था। कार्यपालन अभियंता ने नोटिस का कोई भी जवाब नहीं दिया। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (1)(2)(3) के अंतर्गत रणदिवे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की अवधि में रणदिवे का मुख्यालय जोन क्रमांक 5, सेक्टर 6 होगा। इस अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
अनुबंध और कार्य आदेश जारी करने सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली
नेहरू नगर एवं खुर्सीपार चौक में ट्रैफिक सिग्नल के स्थापना, संचालन, संधारण के लिए निगम ने रुचि की अभिव्यक्ति के तहत एक एडवरटाइजर्स के साथ अनुबंध कर कार्यादेश जारी किया था। इसकी प्रक्रियाओं में बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच की गई। जांच में यह बात सामने आई कि रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित किए जाने तथा नियम शर्तों का सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन लिया गया परंतु जब दरें प्राप्त हुई तब अनुबंध एवं कार्य आदेश जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली गई।
2020 में नई दर स्वीकृत फिर भी 2016 की दर पर दिया ठेका
महापौर परिषद ने यूनीपोल के लिए 18 नवंबर 2020 को राजस्व विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर दर का निर्धारण किया था, फिर भी ट्रैफिक सिग्नल के मामले में वर्ष 2016 की प्राप्त दरों को निविदा समिति में रखा गया। वर्ष 2020 एवं 2016 के दरों का तुलनात्मक औचित्य का भी ध्यान नहीं रखा गया। पूर्व स्वीकृत दर का लगभग 4 गुना कम दर पर अनुशंसा दे दी गई। रुचि की अभिव्यक्ति के नियम, शर्तों के विपरीत जाकर एजेंसी से अनुबंध किया गया। एजेंसी को सक्षम स्वीकृति के बिना ही लगभग 4 गुना अधिक साइज पर कार्य आदेश दे दिया गया। इससे निगम को आर्थिक क्षति हुई।
निविदा क्रय समिति में पांच लोग, कार्रवाई सिर्फ एक पर क्यों
नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रिकेश सेन निगम प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि निविदा क्रय समिति में रणदिवके अलावा स्वयं तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सत्येंद्र सिंह ने आयुक्त की हैसियत से दस्तखत किया था। इनके अलावा लेखा अधिकारी जितेंद्र ठाकुर, जोन-2 की आयुक्त पूजा पिल्ले और उपायुक्त जितेंद्र कुमार बंजारे भी शामिल थे। गड़बड़ी के लिए सभी बराकर के जिम्मेदार है तो कार्रवाई एक पर क्यों?
Published on:
18 Sept 2021 01:29 pm
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