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सड़क हादसे में मृत चार शव की अर्थी उठाने से परिजन ने कर दिया इनकार, पढ़ें खबर

मंगलवार को सड़क हादसे के शिकार चारों मृतकों का शव लेने से उनके परिजन ने किया इनकार कर दिया। वे चारों परिवारों के एक-एक आश्रित को स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) में अनुकंपा नियुक्ति और 25-25 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे थे।

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Bhilai patrika

सड़क हादसे में मृत चार शव की अर्थी उठाने से परिजन ने कर दिया इनकार, पढ़ें खबर

भिलाई. मंगलवार को सड़क हादसे के शिकार चारों मृतकों का शव लेने से उनके परिजन ने किया इनकार कर दिया। वे चारों परिवारों के एक-एक आश्रित को स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) में अनुकंपा नियुक्ति और 25-25 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। खबर मिलते ही एडीएम संजय अग्रवाल और एएसपी विजय पांडेय तुरंत परिजन से मिलने घर पहुंचे। वे सुबह 11 से शाम 4 बजे तक पांच घंटे समझाते रहे, लेकिन परिजन नहीं माने। साफ कह दिया नौकरी और मुआवजा दोगे तभी अर्थी उठेगी।

मालवाहक में सवार चारों लोग की मौत
मंगलवार की शाम करीब 5 बजे रायपुर से मुख्यालय बघेरा जा रही एसटीएफ की बस नेहरू नगर के पास फोरलेन पर एक बाइक सवार को बचाते बेकाबू हो गई। बस डिवाइडर को कूदकर दूसरी लेन में कूद गई और मालवाहक से जा टकराई। मालवाहक में सवार चारों लोग संतलाल बंजारे, रामनाथ बंजार, मेहत्तर लाल और चालक चंद्रशेखर गुप्ता की मौत हो गई। इसके बाद चारों शव मॉच्युरी में रखवा दिए गए। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करने शव सौंपना था, लेकिन परिजन लेने के लिए गए ही नहीं।

सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं, बड़ी अनहोनी है
संतलाल, रामनाथ और मेहत्तर तीनों का घर जुनवानी बस्ती में एक ही मोहल्ले में है। इनमें संतलाल और रामनाथ चाचा-भतीजे व मेहत्तर पड़ोसी था। तीन लोगों की मौत से मोहल्ले में मातम पसरा था। समाज, रिश्तेदार और बस्ती के लोग जुटे हुए थे। उनका साफ कहना था कि यह कोई सामान्य सडक हादसा नहीं है। बल्कि एक बड़ी अनहोनी विपदा है। एसटीएफ की बेकाबू बस ने एक ही झटके में चारों परिवारों के आश्रितों को भूखे मरने की नौबत ला दी है। परिवार में वे ही अकेले कमाने वाले थे। प्रशासन आश्रित को एसटीएफ में नियमित नहीं तो संविदा पर ही सही अनुकंपा नियुक्ति और नकद मुआवजा दिलवाए। मांग पूरी नहीं हुई तो गुरुवार को आंदोलन करेंगे।

शासन की नीति में यह संभव नहींं
एडीएम संजय अग्रवाल ने बताया कि यह सड़क दुर्घटना है। शासन की नीति के तहत २५ हजार रुपए तुरंत दिया गया। बाकी क्लेम के बाद कोर्ट निर्णय करेगी। वे संविदा नियुक्ति और २५ लाख रुपए मुआवजा की मांग कर रहे हैं, शासन की नीति में यह संभव नहीं है।