
आईटी की जांच में खुल सकता है किराए पर चल रहे वाहनों की गड़बड़ी के राज
भिलाई.आबकारी विभाग के ओएसडी अरूणपति त्रिपाठी के घर से जब्त दस्तावेज में गाडिय़ों के परिवहन संबंधित गड़बडिय़ों का राज खुलासा हो सकता है। सूत्रों की मानें तो आयकर विभाग की टीम ने आबकारी विभाग के ओएसडी त्रिपाठी के सेक्टर-9 स्थित आवास से जो दस्तावेज जब्त किए हैं। उसमें परिवहन से संबंधित कई दस्तावेज है। जिसमें सरकारी विभागों में चल रही वाहनों की जानकारी है। परिवहन से जुड़े एक ट्रेवल्स एजेंसी के फर्म का नाम सहित कई जानकारी है। आईटी की टीम की खुलासा से आबकारी सहित अन्य सरकारी विभागों में किराए पर चल रही गाडिय़ों के परिवहन से संबंधित गड़डिय़ों से पर्दा उठेगा।
2014 में हुईथी शिकायत, इसलिए आए राडार में
सूत्रों की मानें तो सरकारी विभाग में किराए पर गाडिय़ों की ठेकेदारी में गड़बड़ी को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय अधिकारी शिकायतों को नजर अंदाज करते रहे। इससे नाराज प्रतिद्वंदी निविदाकार अभय कुमार शुक्ल ने नवंबर 2014 में भारत संचार निगम लिमिटेड सर्तकता सेल के मंडल अभियंता से उनके खिलाफ शिकायत की। शिकायत के आधार पर नजर रखना शुरू किया गया। जिसमें कई तथ्य सामने आए। उसी के आधार पर आईटी की टीम ने छापामार कार्रवाई की। उनके निवास स्थान से कई अहम दस्तावेज, डायरी, विदेशी मुद्रा, सहित नकद राशि जब्त किया है।
लगातार सात वर्षों से एक ही फर्म को ठेका
2002 से 2007 के बीच जब त्रिपाठी बीएसएनएल महाप्रबंध कार्यालय दुर्ग में एडिशनल जनरल मैनेजर के पद पर पदस्थ रहे। तब विभाग ने किराए पर गाडिय़ां लेने के लिए निविदा बुलाई गई थी। तब निविदाकारों के पास स्वयं के या फर्म के नाम पर व्यावसायिक रूप से वाहनों का पंजीयन नहीं था। इसके बावजूद एक फर्म को ठेका दिया गयाथा। इसकी शिकायत हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुआ। जिस फर्म को उन्होंने ठेका दिलवाया था। वही फर्म लगातार सात वर्षों उच्चदर पर बीएसएनएल को किराए पर वाहन उपलब्ध कराया। 2008 में जब उनका रायपुर स्थानांतरण हुआ। तब भी उन्होंने ऐसा सेटिंग्स किया था कि उसी फर्म को ही ठेका मिला। इतना ही नहीं जब वह आबकारी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर गए। तब भी उसी फर्म को आबकारी विभाग में अधिकारियों की माटिरिंग और उसी फर्म से किराए पर गाडिय़ां ली।
अरुण पति त्रिपाठी भारत संचार निगम लिमिटेड के अधिकारी है। सूचना प्रौद्योगिकी के जानकार होने की वजह से पूर्ववर्ती सरकार ने दूर संचार से आबकारी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजा। जहां पिछले चार साल से आबकारी विभग में सेवाएं दे रहे हैं।जबकि उनकी प्रतिनियुक्ति जनवरी 2020 में समाप्त हो चुकी है। उनकी प्रतिनियुक्ति के बाद ही सरकार ने ठेका पद्धति से चल रहे शराब दुकानों के सिस्टम में बदलाव किया। शासन की निगरानी में शराब बेचने का निर्णय लिया गया। कंपनी से लेकर दुकान तक शराब छोडऩे, शराब दुकानों की मानिटरिंग के लिए अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई। शराब की परिवहन और मानिटरिंग के लिए शासन ने बाजार से किराए पर गाडिय़ां ली।
पेपर किए हैं जब्त
बता दें कि 27 फरवरी को आईटी की टीम ने त्रिपाठी के सेक्टर-9 स्थित आवास में छापा मारा। 29 फरवरी की शाम तक चली जांच-पड़ताल में उनके निवास से लगभग पेपर, डायरी, जमीन के दस्तावेज, नकदी राशि सहित इलेक्ट्रानिक्स गैजेट जब्त किया है।
Published on:
02 Mar 2020 01:15 pm

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