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पार्षद नाराज, भिलाई की कांग्रेस राजनीति में मची खलबली

मंगलवार को एक बड़ा व नाटकीय घटनाक्रम ने शहर की कांग्रेसी राजनीति में हलचल मचा दी है। पटरीपार के निर्वाचित कांग्रेसी पार्षद अचानक पृथक वैशाली नगर निगम के गठन की मांग को लेकर लामबंद हो गए। इतना ही नहीं सभी कांग्रेस के भिलाई शहर जिलाध्यक्ष मुकेश चंद्राकर के निवास पहुंच गए और अपनी इस मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंप आए।

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भिलाई

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Nirmal Sahu

Apr 19, 2022

पार्षद नाराज, भिलाई की  कांग्रेस  राजनीति में मची खलबली

पार्षद नाराज, भिलाई की कांग्रेस राजनीति में मची खलबली

Bhilai भिलाई. मंगलवार को एक बड़ा व नाटकीय घटनाक्रम ने शहर की कांग्रेसी राजनीति में हलचल मचा दी है। पटरीपार के निर्वाचित कांग्रेसी पार्षद अचानक पृथक वैशाली नगर निगम के गठन की मांग को लेकर लामबंद हो गए। इतना ही नहीं सभी कांग्रेस के भिलाई शहर जिलाध्यक्ष मुकेश चंद्राकर के निवास पहुंच गए और अपनी इस मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंप आए।

अपने ज्ञापन में पार्षदों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि वर्तमान में दो विधानसभा (भिलाई एवं वैशाली नगर) के अंतर्गत भिलाई नगर पालिक निगम है। भिलाई नगर निगम में कुल मतदाता लगभग 4,06,833 है जिसमें वैशाली नगर विधानसभा में 2,43,000 एवं मिलाई विधानसभा में 1,63,000 है।
वर्तमान में दुर्ग जिला में दुर्ग नगर पालिक निगम में लगभग 1,85,000 एवं रिसाली नगर पालिक निगम में लगभग 1,00,000 मतदाता हैं। इस दृष्टि से दुर्ग जिले में वर्तमान में वैशाली नगर विधानसभा में सघन व सर्वाधिक मतदाता हैं। इस विधानसभा में अत्यधिक विकास की जरूरत को देखते हुए वैशाली नगर को पृथक नया नगर पालिक निगम बनाया जाना चाहिए।
ये पार्षद हुए हैं लामबंद
नगर के अध्यक्ष गिरवर बंटी साहू व 3 महापौर परिषद के सदस्य सहित 13 वर्तमान व एक पूर्व पार्षद ने इस मांग पत्र में हस्ताक्षर किया है। इनमें इंजीनियर सलमान, संतोष नाथ सिंह, मन्नान गफ्फार, अंजु सुमन सिन्हा, केशव चौबे, रविशंकर कुर्रे, चंद्रशेखर गवई, अरविंद राय, धर्मंेद्र वैष्णव, लालचंद वर्मा, नितीश यादव, नेहा साहू, हरिओम तिवारी और पूर्व पार्षद डॉ. दिवाकर भारती शामिल हैं।
पटरीपार के प्रति भेदभाव से नाराज हैं पार्षद
पार्टी संगठन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के भय से इन पार्षदों ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी नाराजगी की वजह बताई। कहा कि पटरीपार और टाउनशिप में विकास कार्यों में कितना अंतर है साफ दिख रहा है। पटरीपार की लगातार उपेक्षा की जा रही है। जबकि विकास कार्यों की जरूरत सबसे अधिक अभी पटरीपार को है। टाउनशिप के लिए तो भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन स्वयं बैठा है, फिर वहां पैसा फंूकने की क्या जरूरत है। बीते कार्यकाल में टाउनशिप में खूब पैसा खर्च किया गया है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम लोग जनता के सामने किस मुंह से जाएंगे।
शहर सरकार में फूट, कांगे्रस की चिंता बढ़ी
तीन महीने में ही पार्षदों के अचानक इस तरह मुखर होने को कांग्रेस व शहर सरकार में फूट के रूप में भी देखा जा रहा है। इसे कांगे्रस की अंदरुनी कलह भी बताया जा रहा है। पाटी के एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने कहा कि यह किसी शीर्ष नेता के बगैर संरक्षण के संभव नहीं है। जरूर इसके पीछे किसी बड़े नेता का हाथ है।