
देखो कमाल.. Bhilai देशभर का सफर किया इस शख्स ने साइकिल से
भिलाई. बीएमवाय चरोदा की गुमनाम गलियों में जमील खान का रहना होता है। वे जब छत्तीसगढ़ से बाहर निकलते हैं, तब देश के तमाम धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। साइकिल से पूरे देश का भ्रमण वे कर चुके हैं। अब तक करीब 65 हजार किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं। 58 साल की उम्र में वे फिर एक बार साइकिल से लंबी दूरी तय करने की तैयारी करने में जुटे हैं। दूसरे राज्यों में साइकिल से पर्यावरण के बचाव को लेकर सफर पर निकलने वाले जमील को हर कोई जानता है। वे उनके ठहरने और खाने का इंतजाम भी करते हैं।
शरीर रहता है स्वस्थ
उनका कहना है कि साइकिल चलाने से शरीर फिट रहता है। सेहतमंद बने रहने के लिए हर दिन साइकलिंग जरूर करना चाहिए। यही वजह है कि रिटायर्ड होने की उम्र में वे साइकिल से देश के किसी भी कोने में जाने के लिए तैयार हैं। आज के युवा से भी कहा जाए, तो वे बगले झांकने लगेंगे।
धार्मिक स्थलों का किया भ्रमण
देशभर में साइकिल से भ्रमण करने का मकसद क्या था। इस पर उन्होंने बताया कि भारत में अलग-अलग धार्मिक स्थान है। उनको देखना और उनके संबंध में जानने का मकसद था। एक-एक कर हर धार्मिक स्थल तक पहुंचा। हर जगह लोगों का बहुत प्यार और सम्मान मिला। इसका जीवनभर ऋणी रहूंगा।
2018 को निकला यात्रा पर
उन्होंने बताया कि 2018 को पर्यावरण बचाव का संदेश लेकर देश की यात्रा करने साइकिल से निकला। शुरू में हर दिन करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करता था। आम तौर पर मंदिर को नीचे से ऊपर की ओर बनाते हैं। देश में एक मंदिर ऐसा भी देखा, जिसे ऊपर से नीच की ओर बनाया गया है। देशभर का दौरा कर दो साल बाद 2020 में घर लौटा।
6 माह आराम कर फिर निकला सफर में
लौटने के बाद करीब 6 माह आराम किया। इसके बाद पुन: 2020 में ही साइकिल से सफर पर निकल गया। इस बार गुजरात के द्वारका पहुंचा, तब लॉक डाउन में फंसा। इसके बाद भी साइकिल का पहिया थमा नहीं। रास्ते में लोगों को देखा कि किस तरह से जो घर लौट रहे थे, उनकी मदद कर रहे थे।
पैदल निकले मुसाफिर के साथ बाघा बॉर्डर तक गया
इस दौरान भारत का एक व्यक्ति हज करने के लिए पैदल निकला। वह पैदल यात्रा करते हुए बाघा बॉर्डर तक गया। वहां तक जमील भी साइकिल से उनको छोडऩे गए। बाघा बॉर्डर के बाद उस व्यक्ति को पैदल आगे जाने इजाजत नहीं मिली। तब वे प्लेन से आगे का सफर तय किए।
बाघा बॉर्डर से 28 दिनों में लौटा भिलाई
बाघा बॉर्डर तक पदयात्री को छोड़कर जमील साइकिल से सीधे घर के लिए रवाना हुए। बाघा बॉर्डर से भिलाई 1760 किलोमीटर का सफर 28 दिनों में उन्होंने पूरा किया। रास्ते में लोग उनको 50 किलोमीटर सफर करने के बाद ही गांव और शहर में रोक लेते थे। इसके बाद वे अगले दिन रवाना होते। इस तरह से 2023 में लौटे हैं। अब फिर एक बार लंबी यात्रा के लिए जाने की तैयारी में जुट गए हैं। वे गोवा में आओ साइकिल चलाएं कार्यक्रम में शामिल होंगे।
बच्चों को स्कूलों में जाकर बताया
उन्होंने बताया कि स्वर्ण मंदिर, पटना साहेब, नादेड़, अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण हो रहा, सबरी माता के कर्नाटक स्थित मंदिर भी गया। दरगाह शरीफ हजरत मलिक बिन दिनार, केरल, अजमेर शरीब, मुंबई हाजी अली, महाराष्ट्र में ऊपर से नीचे बनाया गया है मंदिर 5 हजार पुराना है, अंजता एलोरा की गुफाएं, जगन्नाथ पुरी, कोनार्क, कन्याकुमारी, रामेश्वरम गए। इसके अलावा भी जगह भी गए। इसकी जानकारी स्कूलों में बच्चों को जाकर देता भी गया।
Published on:
02 Jun 2023 09:40 pm
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