
मजदूर की बेटी ने किया कमाल, स्टिक खरीदने नहीं थे पैसे, फिर भी मेहनत के बल पर नेशनल तक जाकर किया शानदार प्रदर्शन
भिलाई. जयंती बाग अभी 11 वीं की छात्रा है। पिता भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका मजदूर हैं। माता दूसरे के घरों में खाना बनाने जाती है। आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार है। ऐसे में छात्रा के सामने खेलने के ड्रेस किट व खेल सामग्री लेना मुमकिन नहीं था। बावजूद इसके उसका जज्बा कहीं कमजोर नहीं हुआ। हर दिन 2 से 3 घंटे तक स्कूल से आने के बाद प्रेेक्टिस करने में जुटी रही। छत्तीसगढ़ में मार्शल आर्ट गतका के चुनिंदा खिलाडिय़ों में उसका नाम आता है।
नेशनल खेलने पहली बार मिला मौका, हाथ में नहीं था हथियार
मार्शल आर्ट गतका की राष्ट्रीय स्तर पर स्पर्धा दिल्ली में थी। इसमें पहली बार मार्च 2022 में दिल्ली जाने का मौका मिला। इसके लिए सभी तैयारी में जुटे थे। नेशनल लेवल खेल के लिए नए स्टिक (खेल का हथियार) लेना जरूरी था। इसके लिए उनके पास पैसे नहीं थे। जयंती ने बताया कि बिना हथियार के इस मार्शल आर्ट की होने वाली प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेना संभव नहीं था। ऐसे में कोच ख्वाजा अहमद ने खुद ही स्टिक लेकर दिया। एक स्टिक की कीमत 3500 से 5000 रुपए तक होती है। इसके बाद ड्रेस कोड अगल है।
खेलों इंडिया में प्रदेश से सिर्फ 4 का हुआ चयन
दिल्ली में 2023 के दौरान खेलो इंडिया स्पर्धा हुई। इसमें छत्तीसगढ़ से मार्शल आर्टस, गतका के लिए सिर्फ 4 महिला खिलाडिय़ों का चयन हुआ। इसमें जयंती का नाम भी शामिल है। खेलो इंडिया में जयंती ने दूसरा स्थान हांसिल किया। इसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया। छात्रा ने खेल के माध्यम से अपने परिवार का नाम रौशन किया है।
रॉक बाल में भी बेहतरीन प्रदर्शन
जयंती ने सिर्फ गतका में ही नहीं, बल्कि रॉक बॉल में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह रॉक बॉल में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में हिस्सा लेने मार्च 2022 में हरियाणा गई थी। इसी तरह से अंबिकापुर में नवंबर 2022 के दौरान खेलने गई थी। इस खेल में उनके साथी हैं पायल नायक, हिमांशी सोना व विजिता सक्सेना
बुआ खेलती थी मार्शल आर्ट गतका
जयंती ने बताया कि बचपन से देख रही हैं कि बुआ मार्शल आर्ट गतका खेल रही हैं। तब से ही इस खेल को खेलने मन करता था। 9 वीं में पढऩे के दौरान शाम को स्कूल से लौटकर बुआ के साथ खेलने का मौका मिलता था।
पिता का मिला पूरा सपोट
खेलने के लिए निकले तो पिता तिवारी बाग और मां गीता बाग ने सपोट किया। वे जो भी मांग करो, वह सामग्री जी तोड़ मेहनत कर लाते जरूर थे। पिता चाहते हैं कि घर की माली हालत खराब है, इसका असर बच्चों के खेल पर न पड़े।
नेशनल स्तर का नहीं लेते खुराक
मार्शल आर्ट गतका और रॉक बॉल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों की खुराक अलग होती है। प्रशिक्षण के साथ-साथ वे खुराक पर भी खास ध्यान देते हैं। इससे खेलने के लिए उर्जा बनी रहे। उस स्तर का खुराक नहीं लेते। इसके लिए शासन से मदद की उम्मीद करते हैं।
Published on:
17 Feb 2023 09:49 pm

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