18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विश्व बालश्रम निषेध दिवस : मजदूरी के दलदल में फंसा बचपन, इन शहरों के हजारों बच्चे पढ़ाई छोड़कर बन गए मजदूर

World Day Against Child Labour : बालश्रम दंडनीय अपराध होने के बाद भी इस पर अभी प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ है।

3 min read
Google source verification
विश्व बालश्रम निषेध दिवस : मजदूरी के दलदल में फंसा बचपन, इन शहरों के हजारों बच्चे पढ़ाई छोड़कर बन गए मजदूर

विश्व बालश्रम निषेध दिवस : मजदूरी के दलदल में फंसा बचपन, इन शहरों के हजारों बच्चे पढ़ाई छोड़कर बन गए मजदूर

World Day Against Child Labour : बालश्रम दंडनीय अपराध होने के बाद भी इस पर अभी प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ है। आज भी 30 हजार से अधिक श्रमिक परिवार के बच्चे पढ़ाई से वंचित है। शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद भी स्कूल जाने से वंचित बच्चों का यह आंकड़ा कई सवाल खड़ा करता है। (cg bhilai news hindi) इन बच्चों के स्कूल नहीं जा पाने की सबसे बड़ी वजह गरीबी के कारण माता पिता का पलायन करना है।

यह भी पढ़े : छत्तीसगढ़ी को बनाएं शिक्षा का माध्यम

इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। बच्चों को भी पढ़ाई छोड़कर उनके साथ जाना पड़ता है। ये बच्चे माता पिता के साथ काम पर भी लगाए जाते हैं। शिक्षा विभाग ने 2022 में सर्वे कराया था तब 30 हजार से अधिक बच्चे शाला त्यागी मिले थे। (cg news in hindi) उसके बाद से सर्वे नहीं कराया गया। शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि आज भी हजारों बच्चे शाला से दूर हैं।

यह भी पढ़े : धाविका रन इन साड़ी... बुलेट में झांसी की रानी

नाइट शेल्टर स्कूल फंड नहीं मिलने से बंद

प्रदेश में नाइट शेल्टर स्कूल संचालित किया जा रहा था। पूरे छत्तीसगढ़ में करीब 26 नाइट शेल्टर स्कूल संचालित थे। इन स्कूलों से जुड़े शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2014-15 के बाद इसके लिए फंड मिलना ही बंद हो गया, और धीरे-धीरे सब स्कूल बंद हो गए। (cg news in hindi) इन स्कूलों में दिन में रेलवे स्टेशन या अन्य जगहों पर कूड़े करकट में झिल्ली पन्नी बोतल आदि बीनने वाले बच्चों को पढ़ाया जाता था। स्कूल बंद होने से बच्चे फिर अपने पुराने ढर्रे पर लौट गए।

यह भी पढ़े : Weather Update : झमाझम बारिश से भीगा दंतेवाड़ा, गर्मी से मिली राहत

ऐसा भी हुआ प्रयास

भिलाई में श्रमिक बच्चों को पढ़ाने के लिए दुर्ग के तत्कालीन एसएसपी रमेश शर्मा ने एक स्कूल शुरू किया था। जहां पुलिस आरक्षक श्रमिक बच्चों को पढ़ाते थे। उनके तबादले के बाद यह भी बंद हो गया। तब स्कूल में करीब 70 बच्चे पढ़ने आते थे।

यह भी बालश्रम का रूप

बालश्रम का एक रूप भीख मांगना भी है। सड़क किनारे आज भी छोटे बच्चे भीख मांगते हुए दिखते हैं। बच्चों से भीख मंगवाना भी अपराध है, (bhilai news today) पर गरीब और घुमंतु तबके के परिवार के बच्चे भीख मांगते हैं। भीख को ही वे आमदनी का जरिया मानते हैं।

यह भी पढ़े : CG Election 2023 : संभागीय सम्मलेन में बनी कांग्रेस की रणनीति, इन खास बातों पर किया फोकस

एक्सपर्ट व्यू

चिरंजीवी जैन, शिक्षाविद

गरीबी और बेरोजगारी इसकी एक बड़ी वजह है। लोगों में यह मानसिकता भी है कि जो पढ़ाया जा रहा है, वह भविष्य में कभी काम नहीं आएगा। रोजगार के लिए बच्चे माता-पिता के साथ जाने लगते हैं पढ़ाई छोड़ देते हैं। (cg bhilai news) सरकारी स्कूलों की स्थिति को बेहतर कर स्कूल से विमुख बच्चों को जोड़ने के लिए काम करना होगा।

लोक शिक्षण संचालनालय ने ली सुध

अब लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा विभाग को शाला त्यागी बच्चों को वापस स्कूल से जोड़ने व उनको समर्थन देने कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। (Chhattisgarh news) कहा है कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके लिए नियमित बनाएं नवचारी प्रस्ताव तत्काल बनाकर प्रेषित किया जाए। प्रबंधन संचालक समग्र शिक्षा ने कहा है कि ऐसे बच्चों की पहचान कर विभिन्न स्तर पर कार्य कर रहे इच्छुक लोगों से प्रस्ताव लेकर तत्काल उसका परीक्षण कर बेहतर नवाचारी प्रस्तावों को स्वीकृत कर शीघ्र भेंजे।

श्रमिक शालाएं भी बंद

छत्तीसगढ़ में शासन ने बालश्रमिक स्कूल भी शुरू किया था। हर जिले में कहीं दो तो कहीं तीन-चार स्कूल संचालित किए जा रहे थे। ये सारे स्कूल बंद हो गए हैं।