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भिलाई से लगे इस गांव में चिपको आंदोलन, पूरी आबादी में मशहूर हुए ये युवा, हर कोई इनसे मिलना चाहता है

युवा जो शिक्षा के लिए जितने फिक्रमंद है, उतनी ही उन्हें पर्यावरण बचाने की भी चिंता है।

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patrika harit pradesh

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भिलाई . दुर्ग से 10 किलो मीटर दूरी पर बसा सुंदर सा पढ़ा-लिखा ग्राम भटगांव। इन गांव की खासियत है यहां के युवा जो शिक्षा के लिए जितने फिक्रमंद है, उतनी ही उन्हें पर्यावरण बचाने की भी चिंता है। रविवार को गांव के युवाओं ने पत्रिका के हरियर प्रदेश अभियान के साथ जुड़कर एक और नक काम की नीवं रखी। युवाओं ने गांव के सभी लोगों को साथ लेकर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सभी ने अपने-अपने नाम का एक-एक पौधा रोपा। इसे हमेशा सहेजने की कसम खाई। हर एक पौधा रोपते वक्त गायत्री मंत्र का जाप किया गया। पौधा रोपते वक्त युवाओं के चेहरों पर प्रकृति के प्रति जवाबदेही साफ दिखाई दे रही थी। शिवनाथ नदी के किनारे रोपे गए इन पौधों की देखभाल का जिम्मा भी युवाओं ने ले लिया है।

पौधों को बांधा रक्षासूत्र
ग्राम भटगांव में शिवनाथ नदी किनारे करीब सात एकड़ भूमि पर गांव के युवा श्रमदान कर श्रीराम शर्मा स्मृति उपवन विकसित कर रहे हैं। यहां रविवार को आम, चीकू, लीची, अमरूद, संतरा, मौसंबी, कटहल, बेर, आंवला, जामुन के 200 पौधे रोपे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सह संघचालक डॉ. रामस्वरूप शर्मा और दुर्ग विभाग प्रचारक सतीश शर्मा, गांव की सरपंच दीपा दायराम यादव, उपसरपंच यीशु साहू, पंच सुकृत दास मानिक, गणमान्य नागरिक मायाराम यादव ने भी पौधरोपण किया। पौधे रोपने के बाद उन्होंने रक्षा सूत्र बांधा। सतीश ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण का महत्तव बताया। पेड़ बनने तक नियमित देखभाल करने का भी संकल्प लोगों को दिलवाया।

इनका रहा विशेष योगदान
पौधरोपण के इस यज्ञ में गायत्री शक्तिपीठ दुर्ग की विनिता तिवारी, स्नेहलता साहू प्रफ्ुल्ल पटेल और उनकी पूरी टीम, रचनात्मक युवा प्रकोष्ठ गायत्री परिवार भटगांव के किशोर देशमुख, स्वामी विवेकानंद युवा मंडल, स्वामी विवेकानंद विचार क्रांति मंच और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के युवाओं की विशेष भागीदारी रही।

रोज करते हैं श्रमदान
शिवनाथ नदी किनारे जहां पर श्रीराम स्मृति उपवन बना रहे हैं वहां पहले कटीली झाडिय़ों की भरमार थी। गांव के युवाओं की टोली ने ही श्रमदान कर पूरी झाडिय़ों की सफाई की। यहां बच्चों से लेकर युवा सभी कुछ घंटे नियमित श्रमदान करते हैं। पौधे तैयार करने के लिए खुद की नर्सरी भी बना रखे हैं। पौधरोपण के लिए भी पूरे गड्ढे युवाओं ने ही खोदे।