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रोजाना 200 टन कचरे से बन रही 10 मीटि्रक टन खाद

भीलवाड़ा में कचरे के पहाड़ व बदबू से मिली निजात, तीन हजार रुपए प्रति ट्रॉली बिक रही खाद
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 19 Oct 2022, 8:34 AM IST

रोजाना 200 टन कचरे से बन रही 10 मीटि्रक टन खाद

रोजाना 200 टन कचरे से बन रही 10 मीटि्रक टन खाद

भीलवाड़ा. शहर से रोजाना निकले कचरे से जैविक खाद बनने लगी है, जिसे जिले के काश्तकार इस्तेमाल कर रहे हैं। सांगानेर के कीरखेड़ा ट्रेंचिंग ग्राउंड में नगर परिषद के कंपोस्ट प्लांट में प्रतिदिन विभिन्न कॉलोनियों से 150 से 200 टन कचरा आ रहा है। इससे 10 मीट्रिक टन जैविक खाद तैयार हो रही है। यह खाद किसानों को 2 से 3 हजार रुपए प्रति ट्रॉली बेची जा रही है।

इस प्लांट का संचालन दिल्ली की कंपनी कर रही है। प्लांट प्रभारी रविकुमार ने बताया कि शहर की कॉलोनियों से आए कचरे को पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड पर तोला जाता है। फिर कचरे की छंटाई होती है। सब्जी, नारियल, फल, घर के कूडे को अलग किया जाता है। प्लास्टिक निर्मित कचरे यानि टयूब, टायर,पानी की बोतलें, बाल्टियां, पॉलिथीन व दूध की थैलियां आदि अलग किए जाते हैं। यहां आधुनिक मशीनों से कचरे से 10 मीट्रिक टन जैविक खाद बनाई जाती है। खाद की बिक्री खुले व पैकिंग में की जाती है। खाद बनाने के बाद बचे कचरे को चित्तौड़गढ़ स्थित सीमेंट प्लांट में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
प्लांट से फायदा

प्लांट शुरू होने से पहले एक दशक में 172 बीघा के ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे के पहाड़ खड़े हो गए थे, जिन्हें अब खाद में बदले जाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे यहां से दुर्गंध भी कम होने लगी है।

13 साल पहले बना प्लांट
कंपोस्ट प्लांट का उद्घाटन तत्कालीन सांसद सीपी जोशी ने 11 अक्टूबर 2009 को किया था। 1.75 करोड़ रुपए की लागत के प्लांट से प्रतिदिन 75 मीट्रिक टन खाद बनाने की क्षमता थी। कुछ माह बाद इसे कंपनी ने बंद कर दिया, लेकिन नए प्लांट में आधुनिक संयंत्र लगने से उत्पादन क्षमता 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गई।
कलक्टर ने देखा प्लांट
जिला कलक्टर आशीष मोदी ने मंगलवार को ट्रेंचिंग ग्राउंड का दौरा किया। उनके साथ यूआईटी सचिव अजय आर्य, परिषद आयुक्त दुर्गाकुमारी, अधिशासी अभियन्ता सूर्यप्रकाश संचेती थे। मोदी ने पूछा कि शहर का सारा कचरा यही आता है। प्लांट प्रभारी रविकुमार ने इस बारे में कलक्टर को जानकारी दी।