इस प्लांट का संचालन दिल्ली की कंपनी कर रही है। प्लांट प्रभारी रविकुमार ने बताया कि शहर की कॉलोनियों से आए कचरे को पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड पर तोला जाता है। फिर कचरे की छंटाई होती है। सब्जी, नारियल, फल, घर के कूडे को अलग किया जाता है। प्लास्टिक निर्मित कचरे यानि टयूब, टायर,पानी की बोतलें, बाल्टियां, पॉलिथीन व दूध की थैलियां आदि अलग किए जाते हैं। यहां आधुनिक मशीनों से कचरे से 10 मीट्रिक टन जैविक खाद बनाई जाती है। खाद की बिक्री खुले व पैकिंग में की जाती है। खाद बनाने के बाद बचे कचरे को चित्तौड़गढ़ स्थित सीमेंट प्लांट में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
प्लांट से फायदा