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अन्नदाता की झोली में उम्मीदों की ‘फसल’, आय दोगुनी करने का दावा अब भी ‘कसौटी’ पर

- एमएसपी की गारंटी पर बढ़ा जोर, फसल बीमा में 'स्पीड' का वादा - राजस्थान के तिलहन-दलहन को मिल सकता है बड़ा बूस्ट केंद्रीय बजट 2026

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Farmers have a 'harvest' of hope, the claim of doubling income is still being tested.

Farmers have a 'harvest' of hope, the claim of doubling income is still being tested.

केंद्र सरकार की ओर से पेश बजट 2026 में 'किसान' एक बार फिर केंद्र बिंदु में है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में संभावित बढ़ोतरी और डिजिटल किसान कार्ड जैसे कदमों के जरिए सरकार ने गांव और गरीब को साधने की कोशिश कर सकती है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या 'आय दोगुनी' करने का वादा हकीकत की जमीन पर उतर पाएगा? बजट में कृषि बुनियादी ढांचे और सिंचाई के लिए भारी-भरकम आवंटन तो है, लेकिन किसान संगठनों की निगाहें एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी और इनपुट लागत में कमी पर टिकी हैं।

एमएसपी और फसल बीमा: दावों के बीच 'क्लेम' की चुनौती

बजट में एमएसपी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने का खाका खींचा जाना चाहिए। विशेष रूप से दलहन (उड़द, मसूर) के लिए 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने की दिशा में 'मिशन आत्मनिर्भरता' को गति दी जाए। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 'क्विक सेटलमेंट' मॉडल प्रस्तावित है, ताकि ओलावृष्टि या सूखे की मार झेलने वाले किसान को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

सिंचाई: हर खेत को पानी का 'डिजिटल' समाधान

राजस्थान जैसे मरुस्थलीय राज्य के लिए सिंचाई हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। बजट में सौर ऊर्जा आधारित पंपों (पीएम-कुसुम) के लिए सब्सिडी बढ़ाने और 'सूक्ष्म सिंचाई' को बढ़ावा देने के लिए नए फंड का प्रावधान किया जाए। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव और मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट अब सीधे किसान के मोबाइल पर होगी। राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बजट में कुछ खास प्रावधानों का असर दिखने की उम्मीद है।

पड़ताल: नारा या हकीकत?

किसानों का मानना है कि बजट में तकनीकी सुधारों (एग्री-टेक) पर तो जोर है, लेकिन खाद-बीज की बढ़ती कीमतों और डीजल के दाम किसानों की शुद्ध आय को प्रभावित कर रहे हैं। जब तक इनपुट कॉस्ट (उत्पादन लागत) कम नहीं होगी, तब तक आय दोगुनी होने का लक्ष्य दूर की कौड़ी नजर आता है।

केंद्र सरकार कृषकों की आय में वृद्धि के लिए नित नए वादे करती है लेकिन वे सिर्फ और सिर्फ वादे ही सिद्ध हो रहे हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणाएं करते हैं लेकिन वृद्धि नहीं करते हैं। बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की जानी चाहिए।

राम प्रसाद जाट, सराणा

केन्द्र सरकार में बैठे नेताओ ने कृषकों की आय 2022 तक दुगुनी करने की बातें करते थे लेकिन 2026 आ गया आय दुगुनी नहीं हुई। केन्द्र सरकार ऐसा बजट लाए जो गांव, गरीब के लिए हितकारी हो। कृषि उत्पादन के उपकरणों को सस्ता किया जाए।

धनराज जाट, किसान

कृषकों को कृषि कार्य करने के लिए कृषि उपकरण सस्ती दर पर मिलने चाहिए। कृषि कार्य करने वाले कृषकों का सबसे बड़ा संकट ऋण ह। उद्योगपतियों की तरह कृषकों को भी उनकी फसलों के दाम तय करने का अधिकार मिलना चाहिए। बजट में इसका प्रावधान किया जाए।

भागवत सिंह राणावत, नाहरगढ़

कृषकों के लिए इन दिनों कृषि करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। कृषकों के ऋण माफ कर राहत दी जानी चाहिए। प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, अकाल के समय तुरंत आर्थिक सहायता देने के प्रावधान किए जाए।

कालू लाल पालीवाल, किसान

कृषकों की समस्याओं का समाधान त्वरित गति से किया जाना चाहिए। कृषकों को समय पर खाद बीज मिले उन्हें काला बाजारी में खाद नहीं लेना पड़े। कृषक अव्यवस्थाओं के कारण दुःखी है। बजट में किसानों को राहत मिलनी चाहिए।

शंकर लाल खटीक, किसान

सरकार को समर्थन मूल्य पर सोचना चाहिए। जबकि यह मूल्य न्यूनतम होता है। लेकिन कई बार तो किसान को मजबूरी में इससे भी कम दाम में अपनी फसल को बचना पड़ता है। ऐसा कानून बने की सरकार के समर्थन मूल्य से दाम कम नहीं होना चाहिए। समर्थन मूल्य को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

बद्रीलाल जाट, भारतीय किसान संघ अफीम आयाम प्रमुख राजस्थान प्रदेश